CG: बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है यह गांव, सड़क न होने से गई बुजुर्ग की जान

 वाहन तक पहुंचने के बाद परिजन जब कोतबा अस्पताल पहुंचे परिजनों को पता चला कि बुजुर्ग की मौत हो चुकी है. 

CG: बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है यह गांव, सड़क न होने से गई बुजुर्ग की जान
बुजुर्ग का शव लेकर नदियों और पगडंडियों को पार करते हुए वापस घर ले आए

नई दिल्लीः छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव में सड़क न होने से एक बुजुर्ग की जान चली गई. दरअसल, रातूराम काफी समय से हृदय की समस्या से पीड़ित था. जिसके चलते रातूराम का रायगढ़ स्थित अस्पताल में इलाज चल रहा था. तबियत ठीक होने के बाद कुछ ही समय पहले रातूराम को परिजन घर लेकर आए थे, लेकिन अचानक फिर तबियत खराब होने पर उसे अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने निजी वाहन किराये पर लिया, लेकिन सड़क के आभाव में वाहन गांव तक पहुंचने में 1 घंटे का समय लग गया. वाहन तक पहुंचने के बाद परिजन जब कोतबा अस्पताल पहुंचे परिजनों को पता चला कि बुजुर्ग की मौत हो चुकी है. जिसके बाद दुखी परिजन फिर बुजुर्ग का शव लेकर नदियों और पगडंडियों को पार करते हुए वापस घर ले आए.

सड़क के साथ ही बिजली और पानी की भी समस्या
प्रदेश में विकास के दावों के बीच किसी की सड़क के आभाव में मृत्यु प्रदेश को शर्मसार कर देने वाली घटना है. बता दें प्रदेश में आज भी ऐसे कई इलाके हैं जहां तक सड़कों की पहुंच नहीं है. जिसके चलते ग्रामीणों को काफी सम्याओं का सामना करना पड़ता है. कभी कोई व्यक्ति इलाज के आभाव में अपनी जान गंवा बैठता है तो कहीं शव को लाने ले जाने के लिए वाहन ही उपलब्ध नहीं होते. रातूराम के बेटे तिलक मिरी का कहना है कि सड़क की कमी गांव के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है. इसके चलते कई बार गर्भवती महिलाओं को भी काफी समस्याएं होती हैं. करीब 200 से अधिक आबादी वाले इस गांव में सड़क के साथ बिजली और पानी की सुविधा भी नहीं है.

रातूराम को खाट पर लेटाकर पैदल ही वाहन तक पहुंचे
बता दें घटना पत्थलगांव विकासखंड के गांव फरसाटोली की है. जहां गोलियाढ़ बनटोला निवासी रातूराम (65) काफी समय से हृदयरोग से जूझ रहा था. हालत में सुधार होने पर कुछ समय पहले ही रातूराम को डिस्चार्ज किया गया था, लेकिन अचानक तबीयत खराब होने पर जब परिजनों ने रातूराम को अस्पताल ले जाने की कोशिश की तब वह अस्पताल तो दूर सड़क के आभाव में तक भी बड़ी मुश्किल से पहुंच पाए. जिसके चलते रातूराम की जान चली गई.

कोतबा अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया
सड़क के आभाव में मजबूर परिजनों को रातूराम को खाट में लिटाकर कांधों में लेकर ढाई किलोमीटर का तक पैदल चलना पड़ा, लेकिन मुख्य मार्ग पर पहुंचने पर जैसे ही परिजन स्थानीय कोतबा अस्पताल में प्राथमिक जांच के लिए पहुंचे चिकित्सकों ने बुजुर्ग को मृत घोषित कर दिया. जिसके बाद शोक में डूबे परिजन फिर रातूराम को लेकर वापस निकल पड़े. शव को वापस लेकर जाने में परिजनों को फिर शव को कंधे में रखना पड़ा और ढाई किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ी.

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