डब्ल्यूएचओ ने कहा, दुनिया में टीबी को हराने के लिए पहले भारत में जीतना जरूरी

भारत में सबसे ज्यादा संख्या में टीबी रोगी हैं और इस रोग से सबसे ज्यादा मौत होती है.

डब्ल्यूएचओ ने कहा, दुनिया में टीबी को हराने के लिए पहले भारत में जीतना जरूरी
'इंड टीबी समिट' का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेडरोस अधानोम घेबरेयेसूस ने मंगलवार को आयोजित 'इंड टीबी समिट' में कह कि दुनिया को अगर तपेदिक रोग (टीबी) के खिलाफ जीत हासिल करनी है, तो उसे पहले भारत में जीतना होगा. उन्होंने कहा कि भारत में सबसे ज्यादा संख्या में इसके रोगी हैं और इस रोग से सबसे ज्यादा मौत होती है. 'इंड टीबी समिट' का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया. उन्होंने भारत में 2025 तक टीबी के उन्मूलन का अभियान शुरू किया, जो वैश्विक तय समय सीमा से पांच वर्ष पहले है.

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वैश्विक संगठन टीबी उन्मूलन में भारत और अन्य देशों के साथ
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने कहा कि वैश्विक संगठन बीमारी के उन्मूलन में भारत और अन्य देशों के साथ है. टेडरोस ने कहा कि डब्ल्यूएचओ और स्टॉप टीबी की साझेदारी नेताओं और सभी क्षेत्र के सहयोगियों से अपील करता है कि भारत ने आज जितना साहसिक कदम उठाया है, उसी तरह वे भी प्रतिबद्धता जताएं. भारत में टीबी प्रमुख घातक बीमारी है. जहां 2016 में इस बीमारी के 28 लाख नए मामले सामने आए, जिनमें से चार लाख लोगों की इस बीमारी से मौत हो गई. इनमें वे लोग थे जिन्हें टीबी और एचआईवी दोनों बीमारियां थीं. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा कि अगर दुनिया को टीबी के खिलाफ जंग जीतनी है, तो हमें पहले भारत में इस बीमारी पर काबू पाना होगा.

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पांच वर्ष पहले ही लक्ष्य को पाने की कोशिश- मोदी
आपको बता दें कि इस अभियान की शुरुआत के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि पूरे विश्व में टीबी को वर्ष 2030 तक खत्म करने का लक्ष्य है. हमने इसे पांच वर्ष पहले ही खत्म करने का लक्ष्य रखा है. उल्लेखनीय है कि अगले तीन वर्षो में तपेदिक रोग के उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना को 12 हजार करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक मरीज को गुणवत्ता संपन्न रोग निदान, उपचार और समर्थन मिल सके. राष्ट्रीय रणनीतिक योजना का उद्देश्य टीबी के सभी रोगियों का पता लगा कर उन्हें उपचार मुहैया कराना है.

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