ZEE जानकारी: लगता है अब्दुल्ला साहब मन से पूरी तरह पाकिस्तानी हो चुके हैं

फारुक अब्दुल्ला 3 बार जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वो 5 बार जम्मू कश्मीर के विधायक रहे हैं. एक बार भारत सरकार के मंत्री रह चुके हैं. और 5 बार सांसद भी रहे हैं.

ZEE जानकारी: लगता है अब्दुल्ला साहब मन से पूरी तरह पाकिस्तानी हो चुके हैं

राजनीतिक दुकानदारी और देशविरोधी एजेंडे के बीच की रेखा बहुत पतली होती है.. और कई बार हमारे देश के नेता इस फर्क को मिटा देते हैं. हमारी ये बातें समझने के लिए आपको सबसे पहले एक बयान देखना होगा. इस बयान को देखने के लिए वैधानिक चेतावनी ये है कि ये एक देशविरोधी बयान है. और अगर आप देशभक्त हैं, तो ये बयान आपको परेशान कर सकता है. 

ये फारुक अब्दुल्ला हैं. जो 3 बार जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वो 5 बार जम्मू कश्मीर के विधायक रहे हैं. एक बार भारत सरकार के मंत्री रह चुके हैं. और 5 बार सांसद भी रहे हैं. फारुक अब्दुल्ला अभी भी श्रीनगर से लोकसभा के सांसद हैं. जम्मू कश्मीर भारत में है और श्रीनगर भी भारत का हिस्सा है. फारुक अब्दुल्ला जिस संसद के सदस्य हैं वो भी भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है. लेकिन उनके इस बयान से ऐसा लगता है कि फारुक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान की सरकार Join कर ली है. ऐसा लगता है कि फारुक अब्दुल्ला पाकिस्तान सरकार के मंत्री बन चुके हैं. फारुक अब्दुल्ला भारत को पाकिस्तान के परमाणु बम की धमकी दे रहे हैं. फारुक अब्दुल्ला के बयानों पर आपने गौर किया हो तो वो पाकिस्तान के लोगों और वहां के फौजियों को अपना बता रहे हैं. एक तरफ वो अहिंसा का पाठ पढ़ा रहे हैं और दूसरी तरफ भारत को पाकिस्तान के परमाणु बम का नाम लेकर धमका भी रहे हैं. ऐसा लगता है जैसे अब्दुल्ला साहब मन से पूरी तरह पाकिस्तानी हो चुके हैं. 

फारुक अब्दुल्ला ने ये बयान कल जम्मू कश्मीर के उरी में दिया था. आजकल अब्दुल्ला साहब पूरे जम्मू कश्मीर का राजनीतिक भ्रमण कर रहे हैं. 2014 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद फारुक अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस चुनाव हार गई थी. और अब जम्मू कश्मीर में घूमना फारुक अब्दुल्ला की राजनीतिक मजबूरी है. क्योंकि जम्मू कश्मीर के Anti India Sentiments को भड़काकर वो अपनी राजनीतिक दुकान चलाना चाहते हैं. फारुक अब्दुल्ला को ये पता है कि जम्मू कश्मीर में जो भी नेता भारत के खिलाफ बयान उसे वोट मिलेंगे. 

अपने इस विश्लेषण में आगे बढ़ने से पहले हम फारुक अब्दुल्ला को जम्मू कश्मीर का ही एक वीडियो दिखाना चाहते हैं. इस वीडियो को देखने के बाद ये पता चलेगा कि फारुक अब्दुल्ला उस पाकिस्तान के लिए प्यार दिखा रहे हैं, जो जम्मू कश्मीर की नई पीढ़ी को आतंकवादी बनाना चाहता है. 

ये रोता-बिलखता परिवार जम्मू कश्मीर के अनंतनाग के रहने वाले माजिद इरशाद खान का है. माजिद इरशाद आतंकवादी बन गया और लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया. जब उसके घरवालों को ये पता चला तो उसके पिता को हार्ट अटैक आ गया . माजिद फुटबॉल का खिलाड़ी था. लेकिन जेहादियों के दुष्प्रचार से गुमराह होकर वो आतंकवादी बन गया. सवाल ये है कि क्या फारुक अब्दुल्ला को ये नज़र नहीं आ रहा है कि पाकिस्तान किस तरह से वहां के युवाओं को बरगला रहा है. और उन्हें आतंकवाद के रास्ते पर धकेल रहा है? 

फारुक अब्दुल्ला 1980 में पहली बार सांसद बने थे. और तब से वो लगातार सार्वजनिक जीवन में रहे हैं.  इसके बाद वो मुख्यमंत्री, विधायक, सांसद और केन्द्रीय मंत्री भी रहे हैँ. लेकिन इसके बावजूद फारुक अब्दुल्ला भारत के प्रति कभी ईमानदार नहीं हो पाए. उनके दिल में आज भी पाकिस्तान बसता है. फारुक अब्दुल्ला को ये भी नहीं भूलना चाहिए कि वो जिस श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं, वहां की सिर्फ 7% जनता ने ही उन्हें वोट दिया था. ये भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती ही है कि सिर्फ 7% वोट मिलने के बाद भी फारुक अब्दुल्ला जैसा कोई व्यक्ति सांसद भी बन सकता है. 

फारुक अब्दुल्ला एक सांसद के तौर पर लाखों रुपये की सुविधाएं, भारत सरकार से लेते हैं. हमारे और आपके टैक्स के पैसों से फारुक अब्दुल्ला ऐश करते हैं और फिर भारत विरोधी बयान भी देते हैं. आपने ये तो सुन लिया कि फारुक अब्दुल्ला के मन में पाकिस्तान के प्रति कितना सम्मान है. अब ज़रा ये भी जान लीजिए इन्हीं फारुक अब्दुल्ला को एक सांसद के तौर पर कितनी सुविधाएं और वेतन मिलता है. 

फारुक अब्दुल्ला की एक महीने की Salary 50 हज़ार रुपये है. उन्हें 2 हज़ार रुपये का Daily allowance मिलता है. हर महीने ऑफिस के खर्चे के लिए 45 हज़ार रुपये मिलते हैं. Constituency Allowance के लिए 45 हज़ार रुपये महीना मिलता है. इसके अलावा संसदीय कार्यकाल में एक बार Furniture के लिए 75 हज़ार रुपये भी मिलते हैं. 

सुविधाओं की बात की जाए तो फारुक अब्दुल्ला हर साल 34 मुफ्त हवाई यात्राएं कर सकते हैं. जबकि 8 मुफ्त हवाई यात्राएं वो अपनी पत्नी के साथ कर सकते हैं. एक सांसद के तौर पर उन्हें 4 हज़ार किलोलीटर पानी हर साल मुफ्त मिलता है.  फारुक अब्दुल्ला के लिए 50 हज़ार Units की बिजली भी मुफ्त है. इसके अलावा वो हर साल डेढ़ लाख मुफ्त Telephone Calls भी कर सकते हैं. 

और एक सांसद के तौर पर फारुक अब्दुल्ला को मुफ्त में घर भी मिलता है. वो दो बार केन्द्रीय मंत्री रहे हैं और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री भी रहे हैं. इसलिए फारुक अब्दुल्ला को सिर्फ Type - 8 बंगला ही Allot हो सकता है. आपको बता दें कि दिल्ली में Type - 8 का सरकारी बंगला 8 हज़ार वर्ग फीट एरिया में होता है. और जो बंगला फारुक अब्दुल्ला को मिलेगा, मार्केट रेट के हिसाब से उसका किराया 10 लाख रुपये के करीब है. 

लेकिन इन तमाम सुविधाओं के बावजूद फारुक अब्दुल्ला का राजनीतिक मन पाकिस्तान में विचरण कर रहा है. अभी फिलहाल फारुक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला के पास दिल्ली में कोई सरकारी आवास नहीं है. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि उमर अब्दुल्ला का परिवार दिल्ली के 7 अकबर रोड के बंगले में 17 वर्षों तक रहा. 

और 2016 में अदालत के आदेश के बाद उनका बंगला खाली हुआ था.  उमर अब्दुल्ला की पत्नी इस बंगले से हटने के लिए तैयार नहीं थीं. जिसके बाद सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट जाना पड़ा था. हमने आज फारुक अब्दुल्ला के सत्ता प्रेम पर गहरा रिसर्च किया है. फारुक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला... दोनों को सत्ता से बहुत ज्यादा प्रेम है. 

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उमर अब्दुल्ला विदेश राज्य मंत्री थे.  बीजेपी की उस सरकार को नेशनल कॉन्फ्रेंस ने समर्थन दिया था.  इसके बाद 2009 में UPA की सरकार जब एक बार फिर बनी तो फारुक अब्दुल्ला कैबिनेट मंत्री बने. 2009 में फारुक अब्दुल्ला देश के Renewable energy minister बने. इसके अलावा वो 1982, 1986 और 1996 में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री बने. 

लेकिन इस दौरान कभी भी उन्हें पाकिस्तान या PoK का ख्याल नहीं आया. इसीलिए हम ये बात कह रहे हैं कि जो व्यक्ति भारत सरकार का एक पूर्व मंत्री रहा हो, जो जम्मू कश्मीर जैसे राज्य का तीन तीन बार मुख्यमंत्री रहा हो, क्या उसे ऐसा पाकिस्तान प्रेम दिखाना चाहिए?  यहां हम आपको ये भी बताना चाहते हैं कि फारुक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला दोनों को Z plus सिक्योरिटी मिली हुई है. Z Plus सिक्योरिटी में कुल 55 जवान शामिल होते हैं. और इसका एक महीने का खर्चा 30 लाख रुपये है. 

यानी फारुक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला पर भारत सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है. लेकिन इसके बावजूद वो भारत को पाकिस्तान के Atom बम की धमकी दे रहे हैं. अगर फारुक अब्दुल्ला को भारत से इतनी समस्या है तो उन्हें सबसे पहले अपनी संसद सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए. उन्हें भारत सरकार की तरफ से दी जा रहीं सुविधाओं को छोड़ना चाहिए, अपनी Security छोड़नी चाहिए और पाकिस्तान में जाकर चुनाव लड़ना चाहिए . 

आज जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री का ऐसा बयान सुनकर अलगाववादियों और आतंकवादियों की छाती चौड़ी हो गई होगी.. और उनका मनोबल बढ़ गया होगा. ज़ाहिर है कि आतंकवादी ऐसी ही सोच वाले नेताओं को मुख्यमंत्री बनते हुए देखना चाहते हैं... क्योंकि ये नेता आतंकवादियों को Unlimited आज़ादी देने की वकालत करते हैं. 

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