ज़ी हेल्पलाइन की बदौलत रिटायर्ड रीडर को बकाया राशी मिलना तय

अररिया के राधा रमन चौधरी (70) ने 1968 में मगध यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडल के साथ एमए की डिग्री हासिल की। दस साल तक प्राइवेट कॉलेजों में पढ़ाने के बाद 1978 में राधा रमन को अररिया कॉलेज में मैथिली विभाग में लेक्चरर की नौकरी मिली।

ज़ी हेल्पलाइन की बदौलत पेंशन हुई चालू

सांगली की ऊषा शिरगुप्पे (70), सांगली बैंक लिमिटेड में कैशियर क्लर्क 32 साल की नौकरी कर 2002 में रिटायर हो गयीं। सांगली बैंक इंडियन नेशनल बैंक एसोसिएशन का सदस्य था, जहां 1995 में कर्मचारी पेंशन योजना लागू हुई थी। रिटायरमेंट के बाद ऊषा को सभी बक़ाया मिल गया।

ज़ी हेल्पलाइन की बदौलत बुजुर्ग महिला को मिलेगा 9 लाख का एरियर

दिल्ली की शैल कुमारी (68) विकासपुरी में रहती हैं। 1982 में उन्हें दिल्ली नगर निगम में प्राइमरी स्कूल सहायक टीचर की नौकरी मिली। इससे पहले शैल ने 1978 में बीएड करने के बाद हरियाणा में चार साल तक अस्थायी टीचर की नौकरी भी की थी।

ज़ी हेल्पलाइन की बदौलत बकाये वेतन का 70 फीसदी शासन ने किया जारी

रुड़की की प्रेम प्रभा सैनी (68), किंडर गार्डन, श्री गांधी बाल निकेतन, रूड़की से प्रिंसिपल की पद से 2005 में रिटायर हुईं। उन्होंने 30 साल तक मेहनत और ईमानदारी से नौकरी की। इससे पहले 1987 में उन्हें प्रमोशन मिला। हालांकि शिक्षा विभाग के भ्रष्ट बाबुओं की वजह से उन्हें प्रिंसिपल का पे-स्केल पाने में भी ख़ासी दिक्कतें झेलनी पड़ीं।