भारत और अमेरिका मिलकर करेंगे आतंकवाद का खात्मा, US ने भारत को बताया 'बड़ा रक्षा साझेदार'

अमेरिका ने वर्ष 2016 में भारत को ‘बड़ा रक्षा साझेदार’ घोषित किया था जो रक्षा मामलों खासतौर से रक्षा व्यापार और तकनीक पर सहयोग बढ़ाने के रास्ते खोलता है.

भारत और अमेरिका मिलकर करेंगे आतंकवाद का खात्मा, US ने भारत को बताया 'बड़ा रक्षा साझेदार'
भारत और अमेरिका राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा मामलों में सहज साझेदार हैं.(फाइल फोटो)
Play

वॉशिंगटन: पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत को ‘‘बड़ा रक्षा साझेदार’’ घोषित करने से परस्पर सहयोग के रास्ते खुलते हैं क्योंकि भारत और अमेरिका के नौवहन सुरक्षा, डोमेन संबंधी जागरूकता और आतंकवाद से निपटने जैसे कई मुद्दों पर साझा हित हैं. अमेरिका ने वर्ष 2016 में भारत को ‘‘बड़े रक्षा साझीदार’’ के रूप में मान्यता दी थी. यह दर्जा मिलने के बाद भारत, अमेरिका से अत्याधुनिक और संवेदनशील प्रौद्योगिकियां खरीद सकता है. रक्षा, एशिया और प्रशांत सुरक्षा मामलों के सहायक मंत्री रैंडल श्राइवर ने सीनेट की विदेश संबंधों की समिति की एक उपसमिति के समक्ष कहा कि भारत और अमेरिका राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा मामलों में सहज साझेदार हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका ने वर्ष 2016 में भारत को ‘बड़ा रक्षा साझेदार’ घोषित किया था जो रक्षा मामलों खासतौर से रक्षा व्यापार और तकनीक पर सहयोग बढ़ाने के रास्ते खोलता है.’’ उन्होंने कहा कि वैश्विक स्थिरता और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए समर्थन की साझा इच्छा के साथ भारत और अमेरिका के नौवहन सुरक्षा, डोमेन संबंधी जागरूकता, आतंकवाद विरोध, मानवीय सहायता और प्राकृतिक आपदाओं तथा अंतराष्ट्रीय खतरों की समन्वित प्रतिक्रिया देने पर साझा हित हैं. 

डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को बताया बेहतर दोस्त, कहा था- साथ में काम करना खुशी देता है
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत, रूस और चीन जैसे देशों के साथ काम करना अच्छी बात है ना कि बुरी. वह रूस के साथ संबंध सुधारने की अपनी इच्छा को लेकर हो रही आलोचना पर प्रतिक्रिया दे रहे थे. उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग के साथ व्हाइट हाउस में संयुक्त रूप से संवाददाता सम्मेलन के संबोधित करेत हुए कहा, ‘‘रूस या चीन या भारत या किसी भी अन्य देशों के साथ काम करना बहुत अच्छी बात है.  यह बुरी बात नहीं है. ’’ ट्रंप ने कहा कि उनकी नजर सेना को मजबूत बनाने, बड़ी मात्रा में तेल और गैस तथा ऊर्जा का भंडार करने पर है लेकिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यह पसंद नहीं आ सकता.

उन्होंने कहा कि यह बहुत ही बेहतर होगा कि उत्तर कोरिया से निपटा जाए जहां पर अमेरिका को अभी दिक्कत है. उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरी दिक्कत नहीं होनी चाहिए थी.  इसे वर्षों पहले ही हल किया जाना चाहिए था जब यह कम खतरनाक थी.  लेकिन यह समस्या मुझे दी गई. ’’ट्रंप ने पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उन्होंने सेना को मजबूत नहीं बनाया.

इनपुट भाषा से भी 

 

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close