Captain Reena Varughese: कैप्टन रीना वर्गीज और उनकी टीम गढ़चिरौली से 100 किलोमीटर दूर माओवादी गढ़ बीते सोमवार को एक घायल सी-60 कमांडो को नक्सलियों के चंगुल से बचा लाई. उन्होंने यह जोखिम भरा कारनामा 13-सीटर डॉफिन-एन पवन हंस हेलीकॉप्टर से किया. इसके बाद से रीना की बहादुरी की हर तरफ हो चर्चे हो रहे हैं. चलिए जानते हैं कि इस डेरिंग हेलीकॉप्टर पायलट ने कहां से पढ़ाई की हैं. इसके साथ ही यह भी जानेंगे कि कैप्टन रीना वर्गीज जैसी बहादुर पायलट बनने के लिए कौन-सी पढ़ाई करनी पड़ती है...


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क्यों हो रही कैप्टन रीना की चर्चा? 
सबसे पहले तो हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों रीना इस समय सुर्खियों में हैं. हेलीकॉप्टर पायलट कैप्टन रीना वर्गीज ने जिस इलाके से घायल कमांडों का रेस्क्यू किया वह उच्च जोखिम वाले इलाकों में है, जहां जिसमें माओवादियों में घेराबंदी कर रखी थी. रीना य ह अच्छी तरह से जानती थीं कि चट्टानी और जंगली इलाके में उतरना उनके लिए असंभव है, जिसके बाद उन्होंने अपने अद्भुत साहस का प्रदर्श किया.


रीना ने अपने को पायलट को हेलीकॉप्टर की कमान दी और धूल के गुबार के बीच जमीन से 11 फीट ऊपर हेलिकॉप्टर से छलांग लगा दी. माओवादियों के लिए हेलीकॉप्टर एक आसान शिकार था, लेकिन वर्गीज और उनकी टीम ने वह कर दिखाया जो असंभव लग रहा था. उन्होंने घायल सी-60 कमांडो को सुरक्षित निकाला.


इंजीनियरिंग में किया है ग्रेजुएशन
कैप्टन रीना वर्गीज ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है. रीना की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने नेहरू कॉलेज ऑफ एयरोनॉटिकल एंड अप्लाईड साइंसेस से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद रीना ने संयुक्त राष्ट्र स्थित हवाई के हेलीकॉप्टर एकेडमी, फ्लोरिडा एंड मौना लोआ हेलीकॉप्टर से कमर्शियल हेलीकॉप्टर पायलट का लाइसेंस हासिल किया है. जानकारी के मुताबिक कैप्टन रीना वर्गीज ने 2009 में एक नए पायलट के रूप में शुरुआत की थी.


करना पड़ता है ये कोर्स
हेलीकॉप्टर पायलट बनने के लिए आपको साइंस से 12वीं पास होना जरूरी है. इसके बाद एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग या संबंधित क्षेत्र में पढ़ाई करनी पड़ती है. इसके बाद पायलट लाइसेंस के लिए प्राइवेट ट्रेंनिंग लेनी पड़ती है. इसके लिए देश-विदेश में कई मान्यता प्राप्त फ्लाइट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट्स हैं, जहां से आप ट्रेंनिंग पूरी करके लाइसेंस हासिल कर सकते हैं. कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए लगभग 200-250 घंटे की उड़ान का अनुभव जरूरी होता है. इसमें सिम्युलेटर और रियल फ्लाइट शामिल होती हैं. पायलट बनने के लिए मेडिकल टेस्ट पास करना जरूरी है.