IAS Dr S Sidhharth: देश में सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी को क्रैक कर जब युवा आईएसएस और आईपीएस ऑफिसर बनते हैं तो उनमें एक अलग ही चमक होती है.  कई बार आपने सीनियर आईएएस ऑफिसर्स को देखा होगा जो पूरे लाव-लश्कर के साथ घर से निकलते हैं. ज्यादातर आईएएस, आईपीएस ऑफिसर्स का रवैया आम लोगों के प्रति बहुत अच्छा नहीं होता.


COMMERCIAL BREAK
SCROLL TO CONTINUE READING

वहीं, आज हम बिहार के सीनियर आईएएस ऑफिसर डॉक्टर एस सिद्धार्थ के बारे में बात करेंगे, जिनकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. यह अपनी पावर से ज्यादा अपनी सिपलिसिटी को लेकर जाने जाते हैं. जानें इन दिनों क्यों सुर्खियों में हैं यह ऑफिसर... 


बिना किसी तामझाम के निकल पड़ते हैं सड़क पर जायजा लेने 


दरअसल, वह बीते बुधवार को भगवान बुद्ध की पावन धरती पहुंचे. आईएएस अधिकारी एस सिद्धार्थ की जब पब्लिक के बीच एक आम इंसान की तरह नजर आए तो लोग इस सीनियर ऑफिसर को अपने बीच पाकर गदगद हो गए. बिहार कैडर के 1991 बैच के सीनियर आईएएस अधिकारी डॉक्टर एस सिद्धार्थ अभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रधान सचिव हैं.


साथ ही इनके पास कैबिनेट सेक्रेटरी और वित्त विभाग की भी जिम्मेदारी है. इन दिनों सुर्खियों में इसलिए हैं, क्योंकि डॉक्टर एस सिद्धार्थ बुधवार की अहले सुबह गया कि सड़कों पर आम लोगों के बीच पहुंच गए. यहां उन्होंने सबसे पहले शहर की साफ-सफाई का कर रहे नगर निगम के गाड़ी चालक का हालचाल लिया.


लोग भी रह गए हैरान


इसके बाद रिक्शा वाले से बातचीत की, फिर वहीं लगे ठेले पर लिट्टी और छोले का आनंद लिया और एक आम व्यक्ति की तरह ही उस जग से पानी पिया, जो लोगों के इस्तेमाल के लिए रखा था. उन्हें जग से सड़क के किनारे पानी पीते देखने और यह सुनने वाले लोग भी हैरान रह गए. इसके बाद उन्होंने भगवान बुद्ध के दर्शन कर शांति पाठ किया और दोपहर सर्किट हाउस में नगर निगम कमिश्नर और जिलाधिकारी से मीटिंग की. 


ईमानदार आईएएस अधिकारी


वह जनता की समस्या पर हमेशा गौर करते हैं. असहाय लोगों की मदद करने और उनकी समस्या जानकर उसका जल्द से जल्द निपटारा करने के लिए जाने जाते हैं.


आईएएस सिद्धार्थ कहते हैं, "सिविल सेवा का अर्थ केवल राष्ट्र की सेवा करना और इसके प्रशासन में मदद करना नहीं है. आम लोगों के प्रति उत्तरदायी और संवेदनशील होना भी हर सिविल सेवक का कर्तव्य है."