PM Modi in Saharanpur: लोकसभा चुनाव 2024 के लिहाज से पूर्वी उत्तर प्रदेश हो या पश्चिमी यूपी पीएम मोदी की एक-एक सीट पर पैनी नजर है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी शनिवार सुबह उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगे, जबकि गाजियाबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार के समर्थन में रोड शो में भाग लेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सहारनपुर से बीजेपी उम्मीदवार राघव लखनपाल और कैराना से पार्टी कैंडीडेट प्रदीप चौधरी के समर्थन में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित करेंगे. इस रैली में मुख्यमंत्री योगी भी मौजूद रहेंगे.


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सहारनपुर में रैली क्यों?


जाटलैंड की जंग जीतने के लिए बीजेपी ने इस बार पश्चिमी यूपी से रालोद के साथ गठबंधन किया. किसानों के मसीहा और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया. इस बार सहारनपुर इसलिए भी खास है क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर सीट से बीजेपी को बीएसपी कैंडिडेट हाजी फजलुर्रहमान से हार का सामना करना पड़ा था. इस बार लक्ष्य बड़ा है और मुकाबला कड़ा है. ऐसे में बीजेपी (BJP) इस बार कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ रही है. यही वजह है कि जाटलैंड की इन सीटों पर खुद पीएम मोदी ने मोर्चा संभाला है.


कैराना का इतिहास संगीत घराना


शामली जिले के अंतर्गत आने वाले कैराना का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा है. कैराना अपनी सियासत के लिए नहीं बल्कि हिंदुस्तानी क्लासिकल संगीत के लिए मशहूर है. गीत संगीत के लिए मशहूर किराना घराने की शुरुआत इसी कैराना से हुई थी. संगीत जगत की कई बड़ी मशहूर हस्तियां इस घराने से जुड़ी हुई हैं.


कैराना घराना को जानिए


कैराना से ही किराना घराना शब्‍द की उत्‍पत्ति हुई है. कैराना के बड़े बुजुर्गों के मुताबिक उन्होंने अपने पुरखों से सुना था कि मुगल बादशाह जहांगीर के दौर में आई भीषण बाढ़ के कारण उनके दरबार के कई संगीतकारों, गायकों और कलाकारों की घर नष्‍ट हो गए. जिसके बाद उन्होंने उन लोगों को इसी जगह बसाया था, जिसे आज कैराना नाम से जाना जाता है. ये घराना भारतीय शास्‍त्रीय संगीत और हिंदुस्‍तानी ख्‍याल गायकी परंपरा से जुड़ा है.


सियासत से पहले यहां की सुरमई शाम और संगीत लोगों की रूह को देता था सुकून


इसी कैराना ने संगीत की दुनिया खासकर शास्त्रीय संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई. अमेरिका और यूरोप से लेकर चीन तक का सफर कर चुके किराना घराने के संस्थापक अब्दुल करीम खां राग गाने में मशहूर रहे. उनके कई गीतों के म्यूजिक कंपनी HMV ने ग्रामोफोन रिकॉर्ड बनवाए जो हर मायने में सुपर-डुपर हिट रहे. 


ये इलाका उस्‍ताद अब्‍दुल करीम खां (1872-1937) की जन्‍म स्‍थली भी है. उस्ताद करीम खां साहब को ही इस घराने का वास्‍तविक संस्‍थापक माना जाता है. वो इस परंपरा और घराने के सबसे अहम हिस्सा रहे हैं. उनकी संगीत की समझ बेमिसाल थी. उन्होंने अपने भतीजे अब्‍दुल वाहिद खान के साथ किराना घराना गायकी को नई पहचान दिलाई. उस्‍ताद अब्‍दुल वाहिद खान ने ख्‍याल गायकी में अति-विलंबित लय का परिचय दुनिया को कराया. इसी घराना में ठुमरी गायन का विशेष महत्व रहा. आगे चलकर यही घराना यहां से विस्थापित होकर कर्नाटक और बंगाल में बस गया. 


कैराना और मन्ना डे का वो अनसुना किस्सा


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मशहूर संगीतकार मन्ना डे एकबार किसी काम से कैराना आए थे. उस सफर में कैराना की सीमा शुरू होने से पहले ही उन्होंने अपने जूते उतार कर हाथों में ले लिए. उनके साथ मौजूद लोग ये देखकर हैरान रह गए. वजह पूछी गई तो महान संगीतकार मन्ना डे ने कहा ये धरती महान संगीतकारों की है इस पर मैं जूतों के साथ नहीं चल सकता. कैराना वासियों ने मन्ना डे को उनके सम्मान का उत्तर सम्मान से ही दिया. मन्ना डे की याद में कैराना वालों ने छड़ियान मैदान के जिस स्टेज पर उनका कार्यक्रम हुआ था, उस जगह को 'मन्ना डे स्टेज' का नाम दे दिया. जो आज भी प्रचलित है.


कैरान का सियासी समीकरण


आज कैराना की सियासत में से संगीत के सुर गायब हैं. यहां की राजनीति में जात-बिरादरी से ज्यादा धर्म का रोल हो गया है. कैराना का जिक्र होने पर हिंदू-मुस्लिम चर्चा होने लगती है. 2024 में बीजेपी-एसपी और बीएसपी के बीच मुकाबला है. बीजेपी ने इस सीट से वर्तमान सांसद प्रदीप चौधरी को टिकट दिया है. SP ने इकरा हसन को वहीं बीएसपी ने ठाकुर समुदाय के नेता श्रीपाल राना को टिकट दिया है, जिससे यहां त्रिशंकु मुकाबला हो गया है. बता दें कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार प्रदीप चौधरी ने करीब 75000 वोटों से जीत हासिल की थी.