नई दिल्ली: सब्जियों की तरह फल भी हमारे आम जीवन का हिस्सा हैं. अक्सर बाजार से आने वाली थैलियों में रंग-बिरंगे फल रखे होते हैं. लेकिन बीते कुछ समय से देखने को मिल रहा है कि बाजार में मिलने वाले फलों पर स्टिकर्स लगे होते हैं. लोग इस स्टीकर्स को हटाकर फल को खा लेते हैं. लेकिन इन स्टीकर्स को हटाने से पहले पढ़ लेना चाहिए. क्योंकि इसमें कुछ खास जानकारियां होती हैं. आइए जानते हैं...


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कैसे करता है ये काम 
इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर प्रोड्यूस स्टैंडर्स (IFPS) नाम की एक संस्था है, जो पूरी दुनिया में बिकने वाले फलों के लिए कोड्स का निर्धारण करती है. साल 2001 में बनी ये संस्था फल के अलावा सब्जियों के लिए भी स्टैंडर्स तय करती है. स्टैंडर्स तय करने के लिए एक स्पेशल कोड जारी किया जाता है, जिसे प्राइज लॉक अप नंबर्स (PLU) कहते हैं. दरअसल, फलों पर लगे स्टीकर्स के ऊपर भी प्राइज लॉक अप नंबर लिखे होते हैं.  अलग-अलग नंबर्स के अलग-अलग मतलब होते हैं.


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ऑर्गेनिक फलों की पहचान
ऐसे कोड वाले स्टीकर्स, जिनकी शुरुआत 9 नंबर के साथ हो, वो ऑर्गेनिक तरीके से उगाए गए होते हैं. 


पुराने तरीके से उगाए फल की पहचान
अगर PLU चार अंक का हो और उसकी शुरुआत किसी भी अंक के साथ हो रही हो, तो इसका मतलब है कि फल का उत्पादन पुराने तरीके से किया गया है. मतलब जैसे किसान पहले फल उगाया करते थे या जो उनकी फल उगाने की परंपरा है, उसका पालन किया गया है.


जेनेटिक मॉडिफाई​ किए गए अंक की पहचान 
अगर PLU पांच अंक का है. साथ में उसकी शुरुआत 8 नंबर के साथ हो, तो समझिए वह जेनेटिक मॉडिफाई फल है. मतलब वे फल जिनके डीएन में बदलाव किया गया. जिससे उनके बनावट और गुणों में भी बदलाव हो जाता है.


ऐसे अब जब भी आप फल खरीदने जाएं, तो एक बार स्टीकर्स पर लिखे नंबर्स को जरूर पढ़ें. साथ में ये भी समझिए कि उनके मतलब क्या हैं.