New Web Series On OTT: हाल के वर्षों में सिनेमा और ओटीटी पर एक विषय जिसने अपने लिए दर्शक जुटाए हैं, वह जासूसी थ्रिलर है. लेकिन यह शर्त जरूर है कि कंटेंट अच्छा हो. ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर आज रिलीज हुई वेब सीरीज मुखबिर-द स्टोरी ऑफ अ स्पाई एंटरनेटमेंट की कसौटियों पर खरी उतरती है. इस कहानी का थ्रिल बांधे रहता है और एक्टरों ने बढ़िया काम किया है. सीरीज 1965 के दौर में ले जाती है और निर्देशक जोड़ी शिवम नायर तथा जयप्रद देसाई ने अपना काम बखूबी किया है. उन्होंने पूरी कोशिश की कि कहानी में दोहराव न हो, घटनाएं तेज रफ्तार से बढ़ती रहें और उनका रहस्य अंत तक स्क्रीन पर बरकरार रहे. कहानी की मेकिंग इस तरह की है कि इसे देखते हुए आपको 1960 के दशक का एहसास बना रहता है. पटकथा में निरंतरता और उतार-चढ़ाव हैं.


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युद्ध के पीछे की कहानी
मुखबिर-द स्टोरी ऑफ अ स्पाई मूल रूप से कामरान बख्श (जेन खान दुर्रानी) की कहानी है, जिसे भारतीय खुफिया एजेंसी के अधिकारी हरफन बशीर बनाकर पाकिस्तान भेजते हैं. 1960 के शुरुआती बरसों में चीन के हाथों भारत की मात के बाद पाकिस्तानी सत्ताधीश, सेना और आईएसआई मानते हैं कि वह इस मौके का फायदा उठा सकते हैं. भारत की स्थिति कमजोर है और उसके विरुद्ध युद्ध छेड़कर कश्मीर और गुजरात हड़प सकते हैं. 1964-65 के वर्षों की यह कहानी बताती है कि कामरान बख्श एक साधारण व्यक्ति की तरह पाकिस्तान में प्रवेश करता है और धीरे-धीरे आईएसआई तथा पाक सेना की तैयारियों की खबर भारतीय अफसरों को भेजता है. उसके भेजे पाकिस्तानी सेना द्वारा तैयार नक्शों से पता चलता है कि पड़ोसी देश कहां-किधर-कैसे हमला करने वाला है. पाकिस्तान हमला करता है. इधर, भारतीय सेना तैयार है. 17 दिनों तक युद्ध चलता है और पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ती है. वह संयुक्त राष्ट्र में गुहार लगाता है कि भारत से युद्ध रोकने को कहा जाए, जबकि प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भारतीय सेना को लाहौर तक घुस जाने की हरी झंडी दिखा दी है.



जेन करते हैं इंप्रेस
कामरान बख्श के किरदार को इस सीरीज में अच्छे ढंग से गढ़ा गया है. उसके पाकिस्तान जाने और वहां धीरे-धीरे अपने करिश्माई व्यक्तित्व से जासूसी करने के एपिसोड अच्छे से निकलकर आए हैं. जेन खान दुर्रानी कश्मीरी हैं और उन्होंने कामरान के किरदार को अच्छे ढंग से निभाया है. वह पर्दे पर ऐसे व्यक्ति के रूप में नजर आते हैं, जिसे अपनी फिक्र नहीं और जो हर परिस्थिति के लिए तैयार है. पाकिस्तानी अखबार के एडिटर की बेटी बनी जोया अफरोज और लाहौर रेडियो स्टेशन की गायिका बेगम अनार बनी बरखा बिष्ट सेनगुप्ता के साथ अपने रिश्तों के रोल को भी जेन ने अच्छे से निभाया है. अफरोज और बरखा भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में काफी संतुलित हैं और दर्शक को आकर्षित करती हैं.


मेजर और कर्नल की छाप
इस सीरीज में एक्टरों ने कमाल किया है और अपने-अपने रोल शिद्दत से निभाए हैं. वे याद रह जाते हैं. खुफिया अधिकारी के रूप में जासूसों का जाल तैयार करने वाले एसकेएस मूर्ति बने प्रकाश राज कम बोलते हैं लेकिन मनोरंजक हैं, मगर जो कलाकार खास तौर पर उभरते हैं, वे पाकिस्तानी किरदारों में हैं. मेजर जनरल आगा खान के रूप में हर्ष छाया असर छोड़ते हैं और आईएसआई में कर्नल जैदी बनकर सामने आने वाले दिलीप शंकर चौंकाते हैं. दुबली-पतली के बावजूद वह कर्नल के रूप में अपने चेहरे और आंखों के हाव-भाव से अभिनय करते हुए डर पैदा करते हैं. सत्यदीप मिश्रा ने अपनी भूमिका अच्छे ढंग से निभाई है. हालांकि उनके लिए यहां करने को बहुत खास कुछ नहीं था.


सीरीज में रोमांच बरकरार
मुखबिर-द स्टोरी ऑफ अ स्पाई एक व्यवस्थित ढंग से बनाई गई सीरीज है, जो अपने विषय के साथ न्याय करती है. निर्देशक शिवम नायर इस तरह की कहानियां पहले भी पर्दे पर ला चुके हैं और उन्होंने अपने काम को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है. जबकि जयप्रद देसाई ने 2022 की सबसे ओटीटी फिल्म कौन प्रवीण तांबे से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था. शिवम नायर और जयप्रद देसाई मिलकर मुखबिर की कहानी को अपने नियंत्रण में रखते हैं. बीच में इक्का-दुक्का मौकों पर जरूर लगता है कि कुछ दृश्य या प्रसंग लंबे हो रहे हैं परंतु तभी वे एक नया किरदार या नई घटना ले आते हैं और कहानी में कुछ नई बातें जोड़ देते हैं. इस तरह सीरीज में रोमांच बना रहता है. मुखबिर-द स्टोरी ऑफ अ स्पाई के आठ एपिसोड हैं और हरेक की लंबाई औसतन 40 मिनिट के करीब है. वीकेंड में आपके पास समय है तो इसे देख सकते हैं.


निर्देशकः शिवम नायर, जयप्रद देसाई
सितारेः जेन खान दुर्रानी, प्रकाश राज, हर्ष छाया, बरखा बिष्ट सेनगुप्ता, दिलीप शंकर, सत्यदीप मिश्रा, जोया अफरोज
रेटिंग ***1/2


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