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रांची : एक दशक बीत जाने के बाद भी नहीं मिला पीड़ित परिवार को मुआवजा, 5 की गई थी जान

13 जून साल 2007 का वह काला दिन था, जिसने कई मां के गोद को सुना कर दिया. दरअसल इस दिन नामकुम थाना क्षेत्र के रामपुर स्थित ग्रीन गार्डन स्कूल के पास आकाशीय बिजली गिरने से पांच छात्रों की मौत हो गई थी. 

रांची : एक दशक बीत जाने के बाद भी नहीं मिला पीड़ित परिवार को मुआवजा, 5 की गई थी जान
पीड़ित परिवार को दिया गया था नौकरी देने का भरोसा.

रांची : 13 जून साल 2007 का वह काला दिन था, जिसने कई मां के गोद को सुना कर दिया. दरअसल इस दिन नामकुम थाना क्षेत्र के रामपुर स्थित ग्रीन गार्डन स्कूल के पास आकाशीय बिजली गिरने से पांच छात्रों की मौत हो गई थी. घटना के लगभग 12 साल बीत जाने के बाद हम स्थिति जानने के लिए उसी गांव पहुंचे.

सड़क किनारे सुनसान घर और दरवाजे पर मानों आज भी विनीता की मां अपनी लाडली का इंतजार कर रही हैं. घटना के 12 साल बीत जाने के बाद आज भी बूढ़ी मां की आंखें अपनी बेटी की राह ताक रही है.

उन्होंने बताया कि आए दिन विनीता सपनों में आकर हाथ हिलाती है, लेकिन वह उन्हें रोक नहीं पाती. इस मां की चंद अल्फाज़ों से पूरा शरीर सिहर गया. बावजूद हमने उनके दर्द को जानने की कोशिश की. सबसे चौकाने वाली बात यह थी कि इन्हें मुआवज़े के नाम पर महज 50 किलो चावल मिले थे.

हमारी टीम टुंबागुटु करमटोली गांव पहुंची, जहां अनूप टोप्पो उस हादसे में घायल छात्रों को बचाने के लिए गाड़ी लाने गए, लेकिन बिजली की चपेट में आ गए. दूसरे की जान बचाने की कोशिश करने वाले अनूप खुद मौत के आगोश में चला गए. अनूप तो आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका पूरा परिवार आज भी उस बिखराव से संभलने की नाकामयाब कोशिश कर रहा है.

अनूप की बहन बताती हैं कि जनवरी 2007 में उसके पिता की आपसी रंजिश में हत्या हो गई. इसके बाद वह टूट से गए. लेकिन जब बड़े भाई का साया भी सिर से उठ गया तो स्थिति और खराब हो गई. बहन को आज भी लगता है कि शायद अनूप आकर अपनी बहन से प्यार करेगा और उसकी जिम्मेदारी को कम करेगा. वहीं सबसे ज्यादा चिंता इस बहन की यह है कि अब इसकी शादी की उम्र हो चली है, लेकिन घर में किसी जिम्मेदार का साया नहीं है. इसलिए उनके हाथों में मेहंदी कौन रचवाएगा. साथ ही अनूप की बहन को नौकरी का आश्वासन दिया गया, लेकिन आज वह पाई-पाई को मोहताज है. हादसे का एक दशक से ज़्यादा गुज़र जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों की दर्द भरी दास्तान कायम है.