Deoghar: देवघर के ग्रामीण इलाकों में कभी पत्ते से बने पत्तल का कारोबार खूब हुआ करता था, बाद के दिनों में पत्तल की जगह थर्मोकोल की प्लेट ने ले ली, लेकिन अब जिला प्रशासन की पहल से एक बार फिर जिले में पत्ते से बने पत्तल की परंपरा को वापस लौटाने की कवायद शुरू की गयी है. 


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परंपरा, पवित्रता और पर्यावरण का प्रतीक रहे पत्तल व्यवसाय को थर्मोकोल की प्लेट ने हाशिये पर ढकेल दिया था, लेकिन अब बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में जिला प्रशासन एक बार फिर पत्तल व्यवसाय को पुनर्जीवित करने की कोशिश में जुटा है. खुद जिले के उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री ग्रामीणों की आय बढ़ाने और पत्तल व्यवसाय को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हैं. उपायुक्त पैदल गांव-गांव जाकर पत्तलों के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हैं. इसी कड़ी में वह खोरी पानन गांव पहुंचे, जहां उन्होंने पेड़ की छांव के नीचे पत्तल पर खाना खाया और गांव की महिलाओं से संवाद भी किया. 


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उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के मुताबिक लघु और कुटीर उद्योग के रुप में जाना जाने वाला पत्तल व्यवसाय हाल के दिनों में पूरी तरह से लोगों के पहुंच से दूर हो चुका था, ऐसे में इसकी पुरानी पहचान को लौटाने के लिए लोगों की भागीदारी को बढ़ाया जा रहा है.



उपायुक्त, पत्तल व्यवसाय से महिलाओं को जोड़ कर उन्हें उनके घर में ही रोजगार मुहैया कराने की कोशिश भी कर रहे है, ताकि महिलाओ की आय में बढ़ोतरी हो सके. चाहे पत्तल की सिलाई हो, पत्तल बनाने के लिए मशीन दिलवाना हो या भी इनके लिए सुगम बाजार की व्यवस्था करनी हो, हर चीज पर उपायुक्त की नजर है.


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देवघर जिला अपनी परंपरा और पवित्रता के समावेश के लिए जाना जाता है, लेकिन अब पत्तल व्यवसाय को प्रमोट कर, शहर को पर्यावरण के लिहाज से भी खास पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है. उम्मीद है बहुत जल्द देवघर थर्मोकोल और प्लास्टिक मुक्त धाम के रुप में अपनी पहचान स्थापित कर लेगा.


(इनपुट: चंदन)