पटना: बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में 12वीं बार लालू प्रसाद यादव को निर्विरोध चुन लिया गया है. हालांकि 10 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में उनके इस पद पर निर्वाचित होने की विधिवत घोषणा की जाएगी. वर्ष 1997 को राजद की स्थापना के समय से ही पार्टी को कमान लालू के हाथ में है. इस बार लालू प्रसाद के स्वास्थ्य को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही थी कि तेजस्वी यादव को कमान सौंपी जा सकती है, लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने कमान लालू को हो सौंप दी.


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'राजद अभी लालू प्रसाद की छवि को खोना नहीं चाहती'
अब अस्वस्थ लालू को पार्टी की कमान सौंपने को लेकर मायने निकाले जाने लगे हैं. बिहार में एक बार फिर से सत्ता में लौटी राजद अभी लालू प्रसाद की छवि को खोना नहीं चाहती है. कहा जा रहा है कि भाजपा के खिलाफ देश भर के विपक्षी दलों को एकजुट करने के अभियान में लालू प्रसाद की बड़ी भूमिका है. ऐसे में लालू के लिए जरूरी है कि किसी पार्टी की कमान उनके हाथ हो. इसमें कोई शक नहीं कि एक प्रकार से राजद की पूरी कमान तेजस्वी यादव के हाथ में है. राजद के सारे बड़े निर्णय अब वहीं लेते हैं, लेकिन प्रत्यक्ष तौर पर लालू का नाम चलाते रहने की तैयारी है.


'इन दिनों लालू राजनीति में सक्रिय'
इस संबंध में राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि लालू प्रसाद राष्ट्रीय स्तर के नेता है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेतृत्व करने की क्षमता अद्वितीय है. राजद के लिए यह सौभाग्य की बात है कि राजद के पास लालू प्रसाद जैसा नेता है. वहीं, सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी पार्टी के सारे निर्णय ले जरूर रहे है, लेकिन पार्टी की सोच है कि तेजस्वी के किसी गलत फैसले पर लालू की छवि से उसे बांटा जा सकता है. ऐसे में लालू प्रसाद को फिर से पार्टी का नेतृत्व सौंपे जाने की रणनीति बनाई गई है.


वैसे, लालू इन दिनों राजनीति में सक्रिय भी नजर आ रहे है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम में भी लालू प्रसाद की उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है. 
(इनपुट-आईएएनएस)


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