Chanakya Niti: पूरे देश और दुनिया में आचार्य चाणक्य की नीतियों को सबसे ज्यादा प्रासंगिक माना जाता है. चाणक्य के नीति शास्त्र के सिद्धांत लोग, 0परिवार, समाज, राज्य, देश और दुनिया के लिए दिए गए हैं और इन सिद्धांतों पर सबसे ज्यादा अमल किया जा रहा है. चाणक्य की इन नीतियों को युवा से लेकर वयस्क तक सभी पढ़ते और सुनते हैं. चाणक्य की नीतियां इंसान की सफलता का रास्ता खोलते हैं. 


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चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र के सिद्धांत में ऐसी चीजें बताई हैं जिसे जीवन में उतारकर आप उन्नति के पथ पर अग्रसर हो सकते हैं. चाणक्य के नीति शास्त्र के सिद्धांतों को रिसर्च का विषय बनाया जाता रहा है. आचार्य चाणक्य देश के श्रेष्ठतम विद्वानों में से एक हैं और उन्होंने नीति शास्त्र के साथ समाज शास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र के सिद्धांत भी दिए हैं जो आज भी प्रासंगिक हैं.  


चाणक्य ने इंसान की सफलता के साथ एक और चीज बताई कि किसी को कैसे धन अर्जित करना चाहिए, चाणक्य ने बताया कि अगर आप इस तरह से धन अर्जित नहीं करते तो धन की देवी लक्ष्मी आपसे रूठ जाती हैं. ऐसे में चाणक्य ने बताया कि किसी व्यक्ति को किस तरह से धन अर्जित नहीं करना चाहिए... 
अन्यायोपार्जितं वित्तं दशवर्षाणि तिष्ठति ।
प्राप्ते चैकादशे वर्षे समूलं तद् विनश्यति ।।


सभी जानते हैं कि धन की देवी लक्ष्मी चंचला होती है और विद्या की देवी सरस्वती शांत, सौम्य और स्थिर. ऐसे में लक्ष्मी और सरस्वती कम ही मौकों पर एक साथ किसी के साथ रहती हैं. लक्ष्मी हमेशा किसी के द्वार पर नहीं रहतीं ऐसे में उन्हें रोकने के लिए आपको अपने विचार, व्यवहार और सोच में कई परिवर्तन लाने पड़ेंगे. आपको बता दें कि जिस व्यक्ति को चोरी, जुआ अन्याय या धोखा देकर धन कमाने की आदत होती है,  उनके पास धन अधिक समय तक नहीं टिकता है. ऐसा में वह व्यक्ति जल्दी निर्घन हो जाता है. 


चाणक्य भी कहते हैं कि धन गतिमान होता है. उसकी प्रवृति स्थिर रहने की नहीं है. ऐसे में घर में व्याप्त लक्ष्मी का सम्मान करने की जरूरत है. ऐसे में गलत तरीके से कमाया गया धन आपको जीवन में कभी सफलता नहीं देता है. ऐसे में किसी भी व्यक्ति को धन कमाने के लिए सच्चे और सन्मार्ग के रास्ते को चुनने की जरूरत है. आपको बता दें कि धन की तीन गतियां हैं दान, भोग और नाश. ऐसे में धन को उपभोग भी करना चाहिए और उसके दान भी अगर ऐसा नहीं करें तो उसकी तीसरी गति होती है और वह नाश की गति है. 


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