खूंटी : खूंटी में मातृ शिशु अस्पताल तो बन गया पर मातृ शिशु अस्पताल में पूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. गर्भवती महिलाएं दूर दराज से किसी तरह यहां अपना इलाज कराने आती हैं लेकिन उन्हें मातृ शिशु अस्पताल से पर्ची कटाकर रक्त जांच कराने सदर अस्पताल आना पड़ता है.  कभी वहां बंद रहता है तो पर्ची सदर अस्पताल में ही कटवानी पड़ती है और इसके लिए उन्हें लगभग एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. 


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गर्भवती महिलाओं को फिर स्वास्थ्य जांच कराने एमसीएच जाना पड़ता है. जहां जांच के बाद दवा लेने सदर अस्पताल भेज दिया जाता है. इस प्रकार सदर अस्पताल से मातृ शिशु अस्पताल अलग व्यवस्था कर दिया जाना गर्भवती स्त्रियों और स्वास्थ्य सहायिकाओं के लिए समस्या बन गया है. लोगों का कहना है कि अस्पताल है तो पूरी व्यवस्था एक ही जगह होनी चाहिए थी पर ऐसी घोर अव्यवस्था के कारण गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. 


स्वास्थ्य सहायिका जयन्ती देवी ने बताया कि पहले सदर अस्पताल में सारी व्यवस्था थी पर मातृ शिशु अस्पताल अलग होने से गर्भवती महिलाओं को काफी दिक्कत होती है. पहले ओपीडी सदर अस्पताल में ही था. उस समय दिक्कत नहीं थी पर अब मातृ शिशु अस्पताल में पर्ची कटाकर रक्त जांच कराने सदर अस्पताल मरीज को लेकर आना पड़ता है. फिर एमसीएच में रजिस्टर्ड और जांच करायी जाती है और फिर उपचार कराकर दवा लेने सदर अस्पताल जाना होता है. ऐसे इतनी दूरी तय करने में गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. एक जगह पूरी व्यवस्था होती तो बेहतर होता. 


अड़की प्रखण्ड से उपचार कराने आयी गरीब गर्भवती महिला जौनी देवी ने बताया कि वह एचआईवी टेस्ट कराने आयी है. पहले एमसीएच गयी. फिर पर्चा कटाकर सदर अस्पताल आयी है. काफी दूर होने के कारण तीन बार आना जाना पड़ता है. पैसे का अभाव के कारण उसे पैदल ही एमसीएच जाना पड़ेगा. 


पिपराटोली की रुबिना ने बताया कि उसे ऑपरेशन कराना है. इसको लेकर प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सदर अस्पताल और एमसीएच के चक्कर लगाने पड़ते हैं. दोनों के बीच काफी दूरी होने से दिक्कत हो रही है. उसे ब्लड जांच कराने सदर अस्पताल भेजा गया है. एक जगह सारी व्यवस्था होती तो ठीक होता. साथ में एक बच्चा होने के कारण साधन लेना पड़ेगा.  जिसमें तीन बार का वाहन खर्च लगेगा. 


मातृ शिशु अस्पताल की जीएनएम और इंचार्ज गीता कुमारी ने बताया कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को इलाज कराने के लिए कई ऐसी व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हो पायी हैं जिसके चलते उन्हें कई बार सदर अस्पताल जाना पड़ जाता है. यहां जैसे लैब की व्यवस्था नहीं है, आईसीटीसी की जांच सदर अस्पताल में ही होती है तो इस कारण से ही सदर अस्पताल जाना पड़ता है. अगर यहीं इसकी व्यवस्था हो जाती तो मरीजों को सदर अस्पताल का नहीं जाना पड़ता. 


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