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तार-तार हो चुके महागठबंधन को बचाने की कवायद, RJD, कांग्रेस नेताओं ने साधी चुप्पी

बिहार में महागठबंधन के बिखरने की खबरों के बीच कांग्रेस और आरजेडी में दोस्ती बनी रहे, इसको लेकर कोशिशें जारी हैं. 

तार-तार हो चुके महागठबंधन को बचाने की कवायद, RJD, कांग्रेस नेताओं ने साधी चुप्पी
कांग्रेस के साथ आरजेडी का पुराना गठबंधन रहा है. (फाइल फोटो)

पटना : तार-तार हो चुके महागठबंधन में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की दोस्ती को कायम रखने की कोशिशें तेज हो गई हैं. कल अलग-चुनाव लड़ने की बात कहने वाले कांग्रेस (Congress) नेताओं ने चुप्पी साध ली है. जो बोल रहे हैं, वो गठबंधन की हिमायत कर रहे हैं. वहीं, आरजेडी के नेता भी एक स्वर से कांग्रेस के साथ रहने की बात कह रहे हैं. चर्चा यह भी है कि कांग्रेस आलाकमान से आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं की बात हुई है.

बिहार में महागठबंधन (Mahagathbandhan) के बिखरने की खबरों के बीच कांग्रेस और आरजेडी में दोस्ती बनी रहे, इसको लेकर कोशिशें जारी हैं. बुधवार तक अलग उपचुनाव लड़ने की हिमायत करने वाले कांग्रेस नेताओं ने चुप्पी साध ली है. कह रहे हैं कि पार्टी के बड़े नेताओं की ओर से कुछ कहा जायेगा, जबकि जो नेता बोल रहे हैं, वो आरजेडी के साथ दो दशक पुरानी दोस्ती का हवाला दे रहे हैं. कह रहे हैं कि हम साथ-साथ ही अच्छे हैं.

किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा है कि आरजेडी के साथ हमारा लंबा साथ रहा है. हम चाहते हैं कि गठबंधन बना रहे. चुनाव के समय कुछ परेशानियां होती हैं, लेकिन उनको दूर कर लिया जायेगा. हमारी व्यक्तिगत राय भी यही है कि गठबंधन को साथ लड़ना चाहिये, क्योंकि हम लंबे समय से साथ रहे हैं और तमाम राजनीतिक उतार-चढ़ाव साथ देखें हैं.

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और आरजेडी नेता अब्दुल गफूर ने कहा है कि महागठबंधन कायम रहेगा, यह हमारा मानना है. कांग्रेस ने किशनगंज सीट जीती थी, हमने छोड़ दी. समस्तीपुर से कांग्रेस लड़ती रही है, वो सीट भी हमने उनके लिए छोड़ दी है. अन्य जिन चार सीटों पर हमने प्रत्याशी उतारे हैं, वहां से हमारे प्रत्याशी पहले जीतते रहे हैं.

कांग्रेस के साथ आरजेडी का पुराना गठबंधन रहा है. दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. हमें ऐसी उम्मीद है. कांग्रेस के नेताओं की ओर से भले ही कई बयान आए हैं, लेकिन वहां गठबंधन की बात आलाकमान से तय होती है. कांग्रेस आलाकमान की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं आया है. कांग्रेस और आरजेडी में सुलह की कोशिशों के बीच जेडीयू ने फिर से महागठबंधन पर वार किया है. प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि हमने पहले ही कहा था कि ये तितर-बितर हो जाने वाले हैं. सिर्फ विरोध के आधार पर एक हुये थे.

उन्होंने कहा कि महागठबंधन में शामिल दल इतने दिन साथ रहे, ये कम नहीं है. इनका कोई संघर्ष का साथ नहीं रहा है. ऐसी स्थिति तो होनी ही थी. अभी तो उपचुनाव है. तरह-तरह के लोग इकट्ठा हो गये. किस तरह के बयान आपस में दे रहे हैं.

लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही महागठबंधन के टूटने के कयास लगने लगे थे. उपचुनाव की घोषणा के साथ ये सामने आ गया. जिस तरह से हम और वीआईपी ने अलग रास्ता अख्तियार किया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में महागठबंधन की परेशानी और बढ़ेगी.