नई दिल्ली: कर्नाटक के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों (Karnataka Local Body Election) में कांग्रेस पार्टी (Congress) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. गुरुवार को जारी हुए नतीजों में कांग्रेस ने 1,184 सीटों में से 498 सीटें जीत कर बड़ी कामयाबी हासिल की. आपको बता दें कि 58 शहरी स्थानीय निकायों में 1,184 वार्ड शामिल थे, जिनमें मतदान हुआ था. कुल 1,184 सीटों पर चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस ने 498 सीटें जीतीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 437, जनता दल (सेक्युलर) ने 45 और अन्य ने 204 सीटें जीतीं.


कांग्रेस को मिले 42 फीसदी वोट


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राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस को 42.06 फीसदी वोट वहीं बीजेपी को 36.90 फीसदी, जेडीएस को 3.8 फीसदी और अन्य को 17.22 फीसदी वोट मिले. हालांकि सिटी नगर पालिका परिषदों में बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं. नगर पालिका परिषद के 166 वार्डों में से कांग्रेस ने 61, भाजपा ने 67, जेडीएस को 12 जबकि अन्य ने 26 सीटें जीती हैं.


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पंचायत चुनावों में भी कांग्रेस आगे


वहीं टाउन नगर पालिका परिषदों में कांग्रेस को सर्वाधिक सीटें मिलीं. आंकड़ों के मुताबिक, नगर पालिका परिषद के 441 वार्डों में से कांग्रेस को 201, बीजेपी को 176 और जेडीएस को 21 वार्ड मिले हैं. इसके अलावा, पंचायत के 588 वार्डों में से कांग्रेस ने 236, भाजपा ने 194 और जेडीएस ने 12 जबकि अन्य ने 135 वार्डों में जीत हासिल की.


'कर्नाटक में कांग्रेस की लहर का संकेत'


कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने राज्य के लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि ये परिणाम कांग्रेस की विचारधारा और इसे मानने वाले लोगों की लोकप्रियता की पुष्टि करते हैं. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि 'हाल के दिनों में चुनाव परिणामों ने राज्य में कांग्रेस की लहर का संकेत दिया है और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम इसकी पुष्टि करते हैं. निस्संदेह, कांग्रेस 2023 विधानसभा चुनाव जीतेगी और मैं अपने मतदाताओं को उनके भारी समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूं जिसने हमारे उत्साह को जगाया है.


'जन-समर्थक विचारधारा की हुई जीत'


कांग्रेस नेता ने कहा कि 'हालांकि शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के परिणाम भविष्य के चुनावों के लिए एक पैमाना नहीं हो सकते हैं, ये परिणाम कांग्रेस की विचारधारा और इसे मानने वाले हमारे लोगों की लोकप्रियता की पुष्टि करते हैं. उन्होंने भाजपा के इस अनुमान को बिगाड़ दिया है कि वो पैसे से जीत सकते हैं. जन-समर्थक विचारधारा की जीत हुई है. 


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गौरतलब है कि यह परिणाम 2023 में होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण है.


(इनपुट- एएनआई)


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