यूपी के तीन और जिलों में अब कमिश्नर सिस्टम, योगी कैबिनेट की बैठक में लगी मुहर
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यूपी के तीन और जिलों में अब कमिश्नर सिस्टम, योगी कैबिनेट की बैठक में लगी मुहर

इससे पहले साल 2020 में यूपी के तीन जिलों नोएडा, कानपुर और लखनऊ में कमिश्नर सिस्टम लागू किया गया था. चुनाव से पहले योगी सरकार की ये सबसे बड़ी प्रशासनिक तैयारी है. आने वाले समय में यूपी में निकाय चुनाव होने हैं.

यूपी के तीन और जिलों में अब कमिश्नर सिस्टम, योगी कैबिनेट की बैठक में लगी मुहर

नई दिल्ली: यूपी की योगी सरकार ने तीन और जिलों में कमिश्नरेट सिस्टम लागू कर दिया है. आगरा, गाजियाबाद और प्रयागराज में अब कमिश्नर बैठेंगे. योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में पुलिस कमिश्नर प्रणाली के विस्तार को मंजूरी मिली है. इन तीनों जिलों पर पुलिस कमिश्नरों की तैनाती की जाएगी. 13 जनवरी 2020 को यूपी में सबसे पहले कानपुर, लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हुई थी. कैबिनेट बैठक में कुल डेढ़ दर्जन प्रस्ताव पास हुए हैं.

प्रयागराज, आगरा और गाजियाबाद में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने पर कैबिनेट ने मुहर लगाई है. तीनों जगहों पर पुलिस कमिश्नर तैनात होंगे. कैबिनेट की बैठक में कुल डेढ़ दर्जन प्रस्तावों पर मुहर लगी. तीसरे चरण में 3 महानगरों में पुलिस कमिश्नरी लागू की गई है.

अब तक प्रदेश के 7 जिलों में कमिश्नर सिस्टम
सबसे पहले 13 जनवरी 2020 को यूपी में सबसे पहले लखनऊ और नोएडा में लागू पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई थी. लखनऊ में सुजीत पांडे और नोएडा में आलोक सिंह पुलिस कमिश्नर बनाया गया था. 26 मार्च 2021 को दूसरे चरण में कानपुर और वाराणसी में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई थी. कानपुर में विजय सिंह मीणा और वाराणसी में ए सतीश गणेश को पुलिस कमिश्नर बनाया गया था. अब योगी सरकार ने तीसरे चरण में प्रदेश के 3 जिलों आगरा, गाजियाबाद और प्रयागराज में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू किया है. उत्तर प्रदेश में 7 महानगरों अब पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है.

क्या-क्या मिलेंगे कमिश्नर को अधिकार
आपको बता दें कि पुलिस कमिश्नरी प्रणाली में  ADG रैंक का अधिकारी पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) होता है. आईजी रैंक के अफसर को ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (Joint Police Commissioner) बनाया जाता है. जबकि डीआईजी रैंक के पुलिस अधिकारी अपर पुलिस आयुक्त (Additional Commissioner of Police) बनाए जाते हैं. जिले की कानून-व्यवस्था की आवश्यकता, क्षेत्रफल और आबादी के हिसाब से पद सृजित किए जाते हैं. धारा 144 लागू करने, क्राइम पर ज्यादा सख्ती, कम वक्त में फैसला, कई मामले में डीएम की परमिशन की जरूरत नहीं होगी. इन पर कमिश्नर ही फैसला ले सकेंगे.

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