कुलवंत सिंह/यमुनानगर: यमुनानगर में पिछले लंबे समय से किसानों के सब्सिडी वाले यूरिया का प्लाईवुड फैक्ट्री में इस्तेमाल होता रहा है. कृषि विभाग और अन्य विभागों द्वारा इस मामले में सख्ती की गई, जिसके बाद इसमें कुछ कमी आई, लेकिन पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार की विभिन्न टीमों द्वारा प्लाईवुड फैक्ट्रियों से टेक्निकल ग्रेड यूरिया के सैंपल लिए गए थे, जिनमें सैंपल रिपोर्ट में साबित हुआ कि इस टेक्निकल ग्रेड यूरिया में किसानों का यूरिया इस्तेमाल हुआ है. प्लाईवुड फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ इसको लेकर मुकदमे दर्ज करवाए गए, जिसके बाद प्लाईवुड फैक्ट्री मालिकों ने प्रशासन से गुहार लगाई थी. यह सैंपल बंद बैग में से लिए गए हैं. अगर उनकी रिपोर्ट में सैंपल फेल आया हैं तो कार्रवाई टेक्निकल ग्रेड यूरिया कंपनी के खिलाफ होनी चाहिए न कि प्लाईवुड निर्माताओं के खिलाफ. इसके बाद यमुनानगर के उपायुक्त ने मामले की जांच व कार्रवाई का आश्वासन दिया था.


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कृषि अधिकारी बालमुकंद का कहना है कि यमुनानगर में टेक्निकल ग्रेड यूरिया के जो भी गोदाम है. वहां से स्टॉक के सैंपल लिए गए हैं ताकि उन्हें पता चल सके कि इनमें एग्रीकल्चर यूरिया की मिलावट है या नहीं. अगर यह पाया जाता है तो इससे पता चलेगा कि इसमें किसानों के सब्सिडी वाले यूरिया का इस्तेमाल होता है.


इससे पहले केंद्र सरकार की टीमों द्वारा यमुनानगर की कई प्लाईवुड फैक्ट्रियों में छापेमारी करके यहां से टेक्निकल ग्रेड यूरिया के सैंपल लिए गए थे. जिनमें कुछ मामलों में रिपोर्ट में किसानों के यूरिया के अंश पाए गए थे. इसी के बाद इंडस्ट्री मालिकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए थे. अब इसलिए इनके गोदामों से ही सैंपल लिए जा रहे हैं ताकि उसमें अगर कोई किसानों का यूरिया पाया जाता है तो उसकी सप्लाई बंद की जाए.


किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला यूरिया सब्सिडी आधारित होता है, जिसका एक बैग 287 रुपये का मिलता है, जबकि प्लाईवुड फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाले टेक्निकल ग्रेड यूरिया के एक बैग की कीमत 4500 रुपये है. इसी के चलते कुछ प्लाईवुड फैक्ट्री मालिक टेक्निकल ग्रेड यूरिया की जगह किसानों के सब्सिडी वाले यूरिया का इस्तेमाल करते रहे हैं.