अजय दुबे/सिंगरौली:जिले के बुधेला गांव में एक अनोखा स्कूल है.जहां बच्चे दोनों हाथ से लिखते हैं. जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित वीणावादिनी पब्लिक स्कूल है. जहां करीब डेढ़ सौ छात्र-छात्राएं अध्ययन करते हैं. इनमें से करीब 120 बच्चे दोनों हाथों से 6 भाषाओं में लिखते हैं. बता दें कि इन बच्चों का टैलेंट देख कर आपको 3 इडियट के वीरू सहस्त्रबुद्धे याद जाएंगे, जो एक साथ दोनों हाथों से लिख सकते थे.


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बच्चों का हाथ कंप्यूटर से भी तेज
वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल के शिक्षक ने बताया कि इन बच्चों का हाथ कंप्यूटर से भी तेज होता है क्योंकि लंबे समय से प्रैक्टिस के बाद ही बच्चे पूरी तरह से निपुण हो चुके हैं और दोनों हाथों से अच्छी तरह लिखते हैं. दोनों हाथों से लिखने की कला को लेकर अब इन बच्चों की चर्चा सिर्फ जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में जमकर हो रही है. बता दें कि ये सभी बच्चे हिंदी,अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, स्पेनिश, रोमन भाषा में लिखते हैं.


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1999 में हुई स्कूल की शुरुआत
दरअसल सिंगरौली जिले के बुधेला गांव में इस स्कूल की शुरुआत 1999 में की गई थी. स्कूल के शिक्षक ने बताया कि हम लोग बच्चों को पहली कक्षा से ही दोनों हाथों से लिखाने का अभ्यास शुरू कर देते हैं. जो बच्चा राइट हैंड से लिखता है,उसे राइट हैंड से लिखने दिया जाता है और जो लेफ्ट से लिखता है. उसे लेफ्ट से ही पहले साल लिखने दिया जाता है.जैसे ही छात्र दूसरी क्लास में जाता है तो उसे उसके विपरीत वाले हाथ ले लिखवाना शुरू करवाया जाता है. हालांकि  खास बात यह है कि सभी छात्रों की हैंडराइटिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है क्योंकि दोनों हाथों में एक जैसी हैंडराइटिंग हो तभी ही दोनों हाथों से कही भी लिखा जा सके.



 


सरकार किसी भी प्रकार की मदद नहीं की गई है
स्कूल के शिक्षक आशुतोष शर्मा (Ashutosh Sharma) ने बताया कि दोनों हाथों से लिखना 1 वर्ष में भी सीखा जा सकता है,लेकिन अच्छे से प्रैक्टिस और 1 मिनट में तीन सौ शब्दों को लिखने में निपुण होने में करीब 3 साल का वक्त लगता है.स्कूल में डेढ़ सौ बच्चे हैं.जिनमें से 120 बच्चे दोनों हाथों से 6 भाषाओं में लिखते हैं.उन्होंने बताया कि इसके बावजूद भी केंद्र और राज्य सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की मदद आज तक नहीं की गई है.