जयपुर न्यूज: सीएम अशोक गहलोत ने नवगठित जिलों के दौरे शुरू कर दिये हैं. नये जिलों में जाने के अभियान की शुरूआत में ही सीएम ने आगे भी और जिलों के गठन के संकेत दे दिए हैं. सीएम गहलोत का कहना है कि छोटे जिले एक प्रयोग हैं और अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में और जिलों की संभावनाओं को भी देखा जाएगा. सीएम के इस बयान के बाद कुछ लोगों को आस जगी है लेकिन सवाल यह है कि अगर नये जिले बनने की संभावना है तो फिर चुनाव के बाद ही क्यों. क्या इसे पहले नहीं किया जा सकता?


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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी प्रयोगधर्मिता दिखा रहे हैं. नये जिलों के दौरे पर निकले सीएम गहलोत ने छोटे जिलों को समय की जरूरत बताने के साथ ही अपना प्रयोग भी बता दिया.  सीएम ने कहा कि उन्होंने छोटे जिलों के लिए और दूदू के लिए अधिकारियों से भी बात की और रामलुभाया कमेटी को भी कन्वीन्स किया. गहलोत ने साफ कहा कि उन्होंने पहले ही कह दिया था.कि आप चाहे मुझे कैसी ही रिपोर्ट दो  छोटे जिले समय की जरूरत हैं और इसीलिए दूदू जिला बना.


राजस्थान में और नए जिले बनाने के सीएम ने दिए संकेत


इसके साथ ही सीएम गहलोत ने यह भी कह दिया कि राजस्थान में 50 जिले तो हो गए हैं. उन्होंने प्रदेश की जनता से यह भी कह दिया कि लोगों ने आशीर्वाद दिया और यह प्रयोग सफल रहा तो राजस्थान में और जिले बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि इससे प्रशासनिक काम भी जल्दी होते हैं और लोगों को सहूलियत भी मिलती है.



लेकिन मुख्यमंत्री के इस बयान के बीच भी प्रदेश में कई जगहों से नये जिलों की चर्चा जारी है. चूरू के सुजानगढ़ के साथ ही जयपुर ग्रामीण के फुलेरा, श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ और टोंक के मालपुरा समेत दूसरी जगहों से जिला बनाने की मांग उठ रही है. सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल को सीएम की बात में उम्मीद की किरण दिख रही है. वे कहते हैं कि कमेटी का कार्यकाल बढ़ाना भी सुखद संकेत है. हालांकि वे तो चुनाव से पहले ही सुजला ज़िला बनाने को लेकर आशान्वित हैं.


लेकिन सीएम के इस बयान पर सांभर-फुलेरा में प्रतिक्रिया दिख रही है. फुलेरा को जिला बनाने की मांग को लेकर आन्दोलन करने वाले जो लोग अपनी मांग रखने जयपुर आए थे. उनके प्रतिनिधि के रूप में बीजेपी नेता डीडी कुमावत कहते हैं कि सीएम की यह घोषणा चुनावी लॉलीपॉप है.. अगर सीएम को ज़िला बनाना ही है तो चुनाव से पहले क्यों नहीं बना देते?


सीएम गहलोत ने छोटे जिलों को अपना प्रयोग बताने के साथ ही नये जिलों की संभावना की बात तो कर दी है. लेकिन सवाल यह है? कि क्या जिलों की हाफ सेन्चुरी बनाने के बाद प्रदेश में और नये जिलों के गठन की गुंजाइश है? सवाल यह भी है? कि क्या वाकई सीएम नये जिले बनाना चाहते हैं... या अपनी सरकार वापस लाने के अभियान में लोगों का साथ लेने के लिए जनता की कोहनी पर गुड़ लगाने की कोशिश हो रही है?


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