Jaipur News: दो बेरोजगार युवकों को जब कहीं नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने पैसा कमाने के लिए अपराध का रास्ता चुन लिया और फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बन मेडिकल शॉप संचालकों को धमकाकर राशि ऐंठने लगे. फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बन दवा विक्रेताओं को धमकाकर राशि ऐंठने का यह खेल ज्यादा दिन तक नहीं चल सका और आखिरकार पुलिस ने दोनों शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया.


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गिरफ्त में आए आरोपियों से जब पूछताछ की गई तो इस बात का खुलता हुआ कि गिरोह में शामिल एक बदमाश ने नर्सिंग का कोर्स कर रखा है. जिसके चलते उसको दवाओं के बारे में कुछ जानकारी है और उसी का फायदा उठाकर उसने फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बन मेडिकल शॉप संचालकों को धमका कर उनसे राशि ऐंठने का खेल शुरू किया.


राजधानी की गलता गेट थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बन रुपए ऐंठने वाले दो शातिर बदमाश चेतन शर्मा उर्फ सोनू और अरुण शर्मा उर्फ सुनील को गिरफ्तार किया है. दोनों बदमाश कई दिनों से फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बनकर मेडिकल शॉप संचालकों से रुपए ऐंठ रहे थे और कार्रवाई के भय से किसी भी मेडिकल शॉप संचालक ने इनकी शिकायत पुलिस में नहीं की. 


हालांकि बजरंग पट्टी स्थित एक मेडिकल शॉप संचालक ने हिम्मत जताकर इसकी शिकायत पुलिस में की. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्त में आए दोनों बदमाश काफी शातिर हैं जो की पूरी प्लानिंग के तहत मेडिकल शॉप संचालकों को डरा धमकाकर और कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे राशि ऐंठ रहे थे.


गिरोह के सदस्य घर से बन ठन के निकलते जिसमें से एक सदस्य टी–शर्ट, जींस और स्पोर्ट्स शूज़ पहन कर तो वहीं दूसरा सदस्य फॉर्मल शूज, शर्ट और पैंट पहनकर एक ड्रग इंस्पेक्टर की तरह तैयार होकर निकलता. रास्ते में किसी भी एक मेडिकल शॉप को चिन्हित करने के बाद टी-शर्ट पहना हुआ व्यक्ति दुकान पर जाकर अबॉर्शन में काम आने वाली एमटीपी किट मांगता. जब दुकानदार उसे किट की राशि बताता और पेमेंट करने के लिए कहता तो इस वक्त गिरोह का सदस्य इशारा कर दूसरे सदस्य को दुकान पर बुलाता. दूसरा सदस्य दुकान पर जाने के बाद सख्ती से पेश आता और खुद को ड्रग इंस्पेक्टर बता गैर कानूनी तरीके से एमटीपी किट बेचने पर मेडिकल शॉप संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का भय दिखाता.


मेडिकल शॉप संचालक को गिरफ्तार करवाने और दुकान को सीज करने का भय दिखा कर उससे राशि की डिमांड की जाती है. कार्रवाई के भय से मेडिकल शॉप संचालक बदमाशों द्वारा मांगे जाने वाली 25–30 हजार रुपए की राशि उन्हें दे देता और जो संचालक राशि नहीं देता उसको अपनी गाड़ी में बिठाकर गिरोह के दोनों सदस्य पुलिस थाने ले जाने का भय दिखाकर आसपास के इलाकों में घुमाते. डर के मारे मेडिकल शॉप संचालक रास्ते में उन्हें राशि दे देता, इसके बाद दोनों बदमाश मेडिकल शॉप संचालक को रास्ते में ही उतार कर फरार हो जाते.


हालांकि गिरोह के सदस्यों के हौसले और बुलंद होते इससे पहले ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को दबोच लिया. अब पुलिस गिरफ्त में आए दोनों आरोपियों से पूछताछ कर यह जानकारी जुटा रही है कि उन्होंने कितने मेडिकल शॉप संचालकों को अपना शिकार बनाया है. अपराधी चाहे अपराध के किसी भी रास्ते पर चलें आखिर में उनका अंजाम सलाखों के पीछे रहना ही होता है.