Karnataka News: कर्नाटक के लिए कांग्रेस ने फाइनल फॉर्मूला दे दिया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री को लेकर चला आ रहा सस्पेंस भी लगभग खत्म हो गया है. सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनेंगे. जबकि डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री का पदभार संभालेंगे. डीके शिवकुमार साल 2024 तक कर्नाटक में पार्टी के अध्यक्ष रहेंगे और उनको एक अहम विभाग भी दिए जाएंगे. सूत्रों के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह 18 मई को हो सकता है. हालांकि इस बीच बेंगलुरु में जिस होटल में विधायक दल की बैठक हो रही है, उसके बाहर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के समर्थकों की नारेबाजी जारी है. दोनों के बीच तकरार साफ देखने को मिल रही है.


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डीके शिवकुमार के समर्थकों की मांग है कि उनको मुख्यमंत्री बनाया जाए. सूत्रों का दावा है कि डीके शिवकुमार के पास 70-75 विधायकों का समर्थन है. इतना ही नहीं उन्होंंने बगावत के संकेत भी दे दिए हैं.


दरअसल कांग्रेस ने तय किया कि 2024 को देखते हुए ओबीसी के कुरुबा समाज से आने वाले सिद्धारमैया सीएम बनें. उनके साथ वोक्कालिगा समाज के डीके शिवकुमार डिप्टी सीएम हों. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस किसी दिग्गज नेता को नाराज नहीं करना चाहती. सिद्धारमैया लोकप्रियता में भले ही बीस बैठ रहे हों लेकिन ज्यादा विधायकों का समर्थन डी के शिवकुमार को हासिल है.


कहा जा रहा है कि डी के शिवकुमार के पास 70 से 75 विधायक हैं. अब कांग्रेस डीके शिवकुमार से कह रही है कि 2024 तक उसका प्रस्ताव मानिए क्योंकि उनके खिलाफ ईडी के मामले हैं, जिनको बीजेपी मुद्दा बना सकती है. हालांकि कहा जा रहा है कि डीके शिवकुमार तैयार तो हैं लेकिन वो कोई दूसरा डिप्टी सीएम नहीं चाहते. अब कांग्रेस आलाकमान को यही पेच सुलझाना है.


कौन हैं सिद्धारमैया?


  • कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद ही मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सिद्धारमैया की चर्चा शुरू हो गई थी. एक गरीब परिवार में जन्म लेने वाले 75 साल के सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

  • 12 अगस्त 1948 को मैसूर जिले के सिद्दरामनहुंडी गांव में सिद्धारमैया का जन्म हुआ.

  • किसान परिवार में जन्म लेने वाले सिद्धारमैया 10 साल की उम्र तक औपचारिक पढ़ाई शुरू नहीं कर पाए. लेकिन बाद में उन्होंने पढ़ाई शुरू की और मैसूर विश्वविद्यालय से विज्ञान में ग्रेजुएट किया और फिर यहीं  से कानून की शिक्षा भी हासिल की.

  • 1980 के दशक से 2005 तक जनता परिवार के सदस्य रहे सिद्धारमैया कांग्रेस के धुर विरोधी थे. 

  • लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की जनता दल (एस) से उन्हें निकाला गया तो वो कांग्रेस में शामिल हो गए. 1983 में पहली बार विधायक बने सिद्धारमैया 1985 में कर्नाटक सरकार में मंत्री बने. 2004 में कांग्रेस-जनता दल (एस) सरकार में वो पहली बार उप मुख्यमंत्री बने.

  • कुरुबा समुदाय के बड़े नेता के तौर पर उभरने के बाद 2013 से 2018 तक वो राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे.  नास्तिक होने की वजह से उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ भगवान के बजाय सच्चाई के नाम पर ली.