नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी ताजा खबर ये है कि अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान (Taliban) ने अपनी सरकार का ऐलान कर दिया है. तालिबान की इस सरकार में Tragedy भी है, Comedy भी है और Surprise भी है. Surprise ये है कि तालिबान की इस सरकार में प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर नहीं मुल्ला हसन अखुंद होगा.


मुल्ला हसन अखुंद बना प्रधानमंत्री


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अब तक दुनिया भर के मीडिया में मुल्ला बरादर का नाम प्रधानमंत्री के तौर पर चल रहा था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. Tragedy ये है कि अफगानिस्तान का नया प्रधानमंत्री मुल्ला हसन अखुंद खुद एक अतंरराष्ट्रीय आतंकवादी है यानी तालिबान ने पूरी दुनिया को बता दिया है कि अब वो खुल्लम खुल्ला बन्दूक की नोक पर आतंकवादियों की सरकार चलाएगा. अफगानिस्तान में आतंकवादियों की ही सरकार चलेगी. ये दुनिया के लिए बहुत ख़तरनाक बात है.


Comedy ये है कि अब कुछ ही दिनों में आप अफ़ग़ानिस्तान (Afghanistan) के इन आतंकवादियों को White House में बैठ कर Joe Biden के साथ Joint प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए देखेंगे और पूरी दुनिया में अमन शांति और विकास की बातें कर रहे होंगे.


यानी अफगानिस्तान मे एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी प्रधानमंत्री बनेगा, जो बुर्का नहीं पहनने पर महिलाओं को कोड़े मारने की सज़ा देता है. सिराज़ुद्दीन हक्कानी जैसा आतंकवादी, जो Suicide Bombers तैयार करता है, वो गृह मंत्री बनेगा. दुनिया के साथ इससे बड़ा और भद्दा मज़ाक़ और क्या हो सकता है.


हमने तालिबान (Taliban) की सरकार बनाने वाले इन आतंकवादियों के Resume निकाले हैं. आपके इनके बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे. प्रधानमंत्री बनने वाले आतंकवादी का पूरा नाम मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद है.


शरिया कानून का कट्टर समर्थक है हसन अखुंद


इसका परिचय ये है कि ये तालिबान के संस्थापकों में से एक है. इसे इस्लाम धर्म का विद्वान माना जाता है और ये शरिया क़ानून का कट्टर समर्थक है. ये बम धमाकों से जेहाद फैलाने की ट्रेनिंग भी दे चुका है.


अनुभव की बात करें तो तो ये तालिबान (Taliban) की पहली सरकार में काम कर चुका है. इसके पास अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी होने का अनुभव है. ये संयुक्त राष्ट्र की घोषित आतंकवादियों की सूची में भी शामिल है. NATO देशों की सेनाओं पर जेहादी हमलों का नेतृत्व कर चुका है और हज़ारों आतंकवादियों को Suicide Bombers बनाने का अनुभव भी इसके पास है.


इसके अलावा तालिबान में सभी बड़े फ़ैसले लेने वाली Leadership Council ''रहबरी शूरा'' का ये प्रमुख है. इसकी Hobby बम धमाकों की योजना बनाना, सुन्नी इस्लाम की कट्टर मान्यताओं का प्रचार प्रसार करना और आतंकवाद के नाम पर दुनियाभर में जेहाद करना है.


इस वजह से पीएम बना मुल्ला अखुंद


इसका Objective यानी उद्देश्य अफगानिस्तान (Afghanistan) में शरिया क़ानून को फिर लागू करना और अफगानिस्तान के बाद कश्मीर, इराक, सीरिया और यमन जैसे देशों में जेहाद की नई लड़ाई शुरू करना है.


ये वो तमाम बातें हैं, जिनके आधार पर मुल्ला हसन को तालिबान (Taliban) सरकार में प्रधानमंत्री बनाया गया. दुनिया के साथ इससे बड़ा और भद्दा मज़ाक क्या हो सकता है. मुल्ला हसन की सरकार में मुल्ला बरादर को उप प्रधानमंत्री बनाया गया है. मुल्ला बरादर का पूरा नाम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर है.


ये भी तालिबान के संस्थापकों में से एक है और तालिबान (Taliban) की आतंकवादी गतिविधियों को राजनीतिक रूप से सही ठहराता है. वह पाकिस्तान की जेल में आठ साल बन्द रह चुका है. ये तालिबान की पहली सरकार में उप विदेश मंत्री रह चुका है. आत्मघाती हमले कराने में माहिर है. अब तक कई आतंकवादियों को Suicide Jackets पहना कर बड़े हमले करवा चुका है.


बरादर की छिन गई कुर्सी


इसकी Hobby एक नेता जैसा दिखने की है. ये दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में से एक है. इसका उद्देश्य भी दुनिया में इस्लाम के राज को स्थापित करना है. पहले खबरें ये थीं कि मुल्ला हसन की जगह इसे प्रधानमंत्री बनाया जाएगा. लेकिन दो वजहों से ऐसा नहीं हो पाया. पहली वजह ये रही कि तालिबान में उसे लेकर ये धारणा बन गई है कि वो अमेरिका का करीबी है. दूसरी वजह इसके पीछे पाकिस्तान है. 


एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान चाहता था कि तालिबान (Taliban) सरकार का नेतृत्व ऐसे नेता के पास हो. जिसे किसी ने ना देखा हो और जो अंतरराष्ट्रीय  दबाव में भी ना आए. मुल्ला बरादर इन दोनों शर्तों पर ही खरा नहीं उतरता और शायद इसी वजह से उसे प्रमुख नहीं बनाया गया है.


मुल्ला अब्दुल सलाम हनाफी बनेगा डिप्टी पीएम


मुल्ला बरादर के अलावा मुल्ला अब्दुल सलाम हनाफी भी अफगानिस्तान (Afghanistan) में उप प्रधानमंत्री होगा. यानी सरकार में दो उप प्रधानमंत्री होंगे. मुल्ला अब्दुल सलाम हनाफी पिछले साल अमेरिका और तालिबान के बीच हुए दोहा शांति समझौते में शामिल था. उसने सोमवार सुबह ही अफगानिस्तान में चीन के राजदूत से मुलाकात की है. इससे आप तालिबान की इस सरकार में चीन के प्रभाव को भी समझ सकते हैं. 


हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख सिराज़ुद्दीन हक्कानी को तालिबान (Taliban) सरकार में गृह मंत्री बनाया गया है. गृह मंत्री का काम देश में आतंरिक शांति को स्थापित करना होता है. वहीं सिराजुद्दीन हक्कानी पिछले लगभग 25 वर्षों से अफगानिस्तान में आंतरिक अशांति का सबसे बड़ा कारण रहा है. इसलिए हक्कानी को गृह मंत्री बनाना किसी Comedy से कम नहीं है.


हक्कानी पर 38 करोड़ रुपये का इनाम


सिराज़ुद्दीन हक्कानी अमेरिका की ओर से घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी भी है. उस पर अमेरिका ने 5 Million Dollars यानी 38 करोड़ रुपये का इनाम रखा है. आपने ऐसा खूंखार गृह मंत्री दुनिया में कहीं नहीं देखा होगा. हक्कानी the new York Time में लेख भी लिख चुका है.


मुल्ला याकूब अफगानिस्तान (Afghanistan) का नया रक्षा मंत्री होगा. मुल्ला याकूब, मुल्ला उमर का बेटा है. जो तालिबान की पहली सरकार का प्रमुख था और मुख्य संस्थापक भी था. ये भी अफगानिस्तान का एक बहुत बड़ा आतंकवादी है.


आमिर खान मुत्ताकी विदेश मंत्री होगा. मुत्ताकी को तालिबान (Taliban) के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में गिना जाता है. सोचिए अब अफगानिस्तान के विदेश मामलों को एक आतंकवादी देखेगा. दुनिया टेबल पर बैठ कर इस आतंकवादी के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर करेगी.


खैरुल्लाह खैरख्वाह सूचना प्रसारण मंत्री होगा. ये आतंकवादी अमेरिका की जेल में 12 साल रह चुका है. अब ये White House में बैठ कर अमेरिकी राष्ट्रपति Joe Biden के साथ Joint प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा.


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कट्टरपंथी अब्दुल हकीम होगा न्यायमंत्री


आतंकवादी अब्दुल हकीम न्याय मंत्री होगा. अब्दुल हकीम अब तक लाखों लोगों को कट्टरपंथी बना चुका है. इसे शरिया क़ानून का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है. सोचिए जब ऐसे आतंकवादी न्याय मंत्री होंगे तो अफगानिसस्तान में लोगों के साथ कैसे न्याय होगा.


मुल्ला हिदायत बदरी को वित्त मंत्री बनाया गया है, जो तालिबान (Taliban) की फंडिंग का हिसाब किताब रख चुका है. इसे हथियारों की ख़रीद फरोख्त के लिए जाना जाता है.


स्टेनकजई बनेगा उप विदेश मंत्री


शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई उप विदेश मंत्री होगा. वो 1982 में देहरादून की Millitary Academy में ट्रेनिंग ले चुका है और उसके पास मुजाहिदीन संगठनों के साथ तालिबान में भी काम करने का लम्बा अनुभव है. पिछले दिनों दोहा में भारतीय दूतावास से स्टेनकजई ने मुलाकात की थी.


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