धोखेबाज ड्रैगन को काशी के बुनकरों का जवाब, बनारसी साड़ी में नहीं करेंगे चीनी रेशम का इस्तेमाल

बुनकरों ने चीन के रेशम की जगह भारतीय रेशम के इस्तेमाल का फैसला लिया है.  

धोखेबाज ड्रैगन को काशी के बुनकरों का जवाब, बनारसी साड़ी में नहीं करेंगे चीनी रेशम का इस्तेमाल
भारतीय रेशम बढ़ाएगा बनारसी साड़ियों की चमक

वाराणसी: प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बुनकरों ने चीन से आयात होने वाले रेशम के बहिष्कार का फैसला किया है. बनारसी साड़ियों के लिए बड़े पैमाने पर चीन से आने वाले रेशम को अब बुनकर इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं. बुनकरों ने चीन के रेशम की जगह भारतीय रेशम के इस्तेमाल का फैसला लिया है.

चीन की नापाक हरकत से गुस्साए बुनकरों ने दो टूक शब्दों में कहा, ''हम चीन का रेशम खपाते हैं और वो हमी को आंख दिखा रहा है, इसलिए हम उसके रेशम का बहिष्कार करते हैं.'' बुनकरों ने कहा कि चीन ने इतना खराब काम किया है कि अब जी नहीं चाहता की उसके सामान का उपयोग करें.

भारतीय रेशम बढ़ाएगा बनारसी साड़ियों की चमक 
LAC पर ड्रैगन की हिमाकत से देश गुस्से में है, ऐसे में बुनकारों ने मांग की है कि कर्नाटक में तैयार होने वाले रेशम की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए, जिससे भारतीय रेशम से ही बनारसी साड़ियों की चमक बढ़े. उन्होंने कहा कि हम देश के साथ खड़े हैं, चीन ने गद्दारी की है.

एक आंकडे के मुताबिक, देश में एक महीने में दो हजार टन रेशम का आयात चीन से होता है. अकेले वाराणसी में रोजाना 5 से 7 टन रेशम की खपत होती है. लेकिन बीते वक्त में LAC पर चीनी सैनिकों की नापाक हरकत से पूरे देश में गुस्सा है. हर कोने से चीन निर्मित सामान के विरोध में आवाज उठ रही हैं.

देश में सबसे ज्यादा रेशम कर्नाटक में तैयार होता है, लेकिन बुनकरों की मानें तो कर्नाटक में तैयार होने वाले रेशम की क्वालिटी ज्यादा अच्छी नहीं होती. बुनकरों की मांग है कि सरकार को भारत में तैयार होने वाले रेशम की क्वालिटी को बेहतर करने के लिए कदम उठाने चाहिए ताकि उन्हें रेशम के लिए चीन या फिर किसी दूसरे देश के रेशम पर निर्भर न होना पड़े.