कैग ऑडिट में खुली ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की पोल, SP-BSP शासनकाल में खूब हुई जमीनों की बंदरबांट

ग्रेनो अथॉरिटी की कैग ऑडिट में कई अनियमितताएं सामने आई हैं. कैग ने इन मामलों को लेकर आपत्ति उठाई है और रिपोर्ट भी तैयार कर ली है. अब इस रिपोर्ट को विधानमंडल के पटल पर रखे जाने की तैयारी है. 

कैग ऑडिट में खुली ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की पोल, SP-BSP शासनकाल में खूब हुई जमीनों की बंदरबांट
सांकेतिक तस्वीर.

ग्रेटर नोएडा: सपा-बसपा कार्यकाल के दौरान ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में तैनात रहे कई अफसरों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. दरअसल, ग्रेनो अथॉरिटी की कैग ऑडिट में कई अनियमितताएं सामने आई हैं. कैग ने इन मामलों को लेकर आपत्ति उठाई है और रिपोर्ट भी तैयार कर ली है. अब इस रिपोर्ट को विधानमंडल के पटल पर रखे जाने की तैयारी है. जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि सपा-बसपा शासनकाल के दौरान अधिकारियों ने कुल कीमत की सिर्फ 5 फीसदी रकम लेकर जमीनें आवंटित कर दीं और बाद में बकाया रा​शि फंस गई. 

उद्योगों के लिए निर्धारित जमीन बिल्डरों के हवाले कर दी गई
इतना ही नहीं अधिकारियों के द्वारा उद्योगों के हिस्से की जमीन भी बिल्डरों को बेचने का मामला कैग ऑडिट में सामने आया है. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सूत्रों के मुताबिक कैग ने पहले चरण की ऑडिट प्रक्रिया पूरी कर ली है. इसमें कई मुद्दों पर कैग ने अपनी आपत्ति जताई है, जिसमें सबसे बड़ा मामला लैंड यूज का है. मास्टर प्लान 2011 के मुताबिक ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का कुल क्षेत्रफल 13750 हेक्टेयर था, इसमें करीब 22 फीसदी हिस्सा रिहायशी था, जबकि 20 प्रतिशत हिस्सा उद्योगों के लिए तय था. कैग ऑडिट के मुताबिक उस समय सिर्फ 12 फीसदी जमीन उद्योगों को आवंटित हुई, जबकि बाकी बचे 8 फीसदी भूमि बिल्डरों के हिस्से में चली गई.

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एसईजेड और परिवहन व्यवस्था के लिए जमीन बची ही नहीं
कैग ऑडिट में यह बात भी सामने आई ​है कि प्राधिकरण ने व्यावसायिक एवं शिक्षण संस्थानों को अधिक जमीनें आवंटित की गईं. इस अनियमितता के कारण उद्योग धंधे तो कम लगे ही, एसईजेड और परिवहन व्यवस्था के लिए भूमि बची ही नहीं. वर्ष 2007 से 2012 के बीच यानी मायावती के शासनकाल में बिल्डरों को सर्वाधिक जमीन आवंटित हुई. ग्रेटर नोएडा वेस्ट की जमीन भी बिल्डरों को इसी समयावधि में आवंटित की गई. कुल कीमत की सिर्फ 5 फीसदी रकम लेकर ये जमीनें बिल्डरों को आवंटित कर दी गईं, बाद में इनकी किस्तें आनी बंद हो गईं.

वर्तमान में बिल्डरों पर अथॉरिटी का 8000 करोड़ बकाया है
नतीजा ये हुआ कि वर्तमान में बिल्डरों पर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का ब्याज मिलाकर कुल 8000 करोड़ रुपए बकाया है. अथॉरिटी इस समय आर्थिक तंगी से गुजर रही है. योगी सरकार ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में सपा और बसपा शासनकाल के दौरान आवंटित हुई जमीनों का कैग ऑडिट कराने का फैसला लिया था. सूत्रों की मानें तो कैग की आपत्ति दर्ज कराने के बाद प्राधिकरण ने अपना जवाब दाखिल किया है. लेकिन कैग इससे संतुष्ट नहीं है. इस प्रकरण में उस समय अथॉरिटी में तैनात कुछ अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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जानिए किस मद में लैंड यूज निर्धारित था, कहां आवंटन हुआ?
कैग ऑडिट में सामने आया है कि अथॉरिटी के कुल क्षेत्रफल का 39 प्रतिशत रिहायश के लिए आवंटित हुआ है, जबकि निर्धारित क्षेत्र 22.10 प्रतिशत ही था. इसी तरह उद्योग धंधों के लिए निर्धारित 19.16 प्रतिशत हिस्से का सिर्फ 12 फीसदी ही इस मद में आवंटित हुआ है, ग्रीन एरिया 22.10 फीसदी था जो 22 फीसदी है. इंस्टीट्यूशनल एरिया 14.52 फीसदी था, जो वर्तमान में 14 फीसदी है. ट्रांसपोर्टेशन के लिए 9.43 फीसदी लैंड यूज निर्धारित था, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 5 फीसदी जमीन इस मद में इस्तेमाल हुई है. इसी तरह एसईजेड के लिए निर्धारित 7.32 फीसदी जमीन में सिर्फ 2 फीसदी इस मद में इस्तेमाल हुआ है. कॉमर्शियल लैंड यूज 5.30 फीसदी होना था जो 6 प्रतिशत के करीब हुआ है. 

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