Rampur Upchunav Winner Candidate Akash Saxena: उत्तर प्रदेश में उपचुनाव संपन्न हो गए हैं. रामपुर में मतगणना हो चुकी है. आजम का गढ़ कहे जाने वाले रामपुर में आकाश सक्सेना ने सेंध लगा दी है. आकाश सक्सेना वही हैं, जिन्होंने सपा के दिग्गज नेता आजम खान के लिए मुश्किलें खड़ी कीं. आजम को सलाखों के पीछे भिजवाने में भी उनका बड़ा हाथ रहा है. ऐतिहासिक जीत के बाद आकाश सक्सेना ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि रामपुर से 50 साल पुराना अंधेरा छट गया है. रामपुर के जनता और मुस्लिम भाइयों ने योगी सरकार पर विश्वास जताया है. इसके लिए मैं रामपुर के लोगों का आभारी हूं. 



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पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना के बड़े बेटे हैं आकाश 
आजम खान की विधायकी में संकट उत्पन्न करने में आकाश सक्सेना का अहम योगदान माना जाता है. आकाश पेशे से व्यवसायी है और पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना के बेटे हैं. उन्होंने ही आजम के खिलाफ केस दर्ज करवाया था. जिसका फैसला आने के बाद आजम की सदस्यता को समाप्त कर दिया गया. आकाश अब्दुल्ला आजम की फर्जी डिग्री केस में उनकी विधानसभा सदस्यता को समाप्त करवाने में भी बड़ी भूमिका निभा चुके हैं. आकाश छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे और उसके बाद कारोबार में सक्रिय हुए. वह आईआईए के लंबे समय तक चेयरमैन भी रहे हैं. भाजपा ने उन्हें पश्चिमी यूपी के लघु उद्योग प्रकोष्ठ का संयोजक भी बनाया था.


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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आकाश आजम और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज 43 मुकदमों में सीधे पक्षकार हैं. आकाश सक्सेना की आजम परिवार से लड़ाई 2018 में अब्दुल्ला के फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट मामले से शुरू हुई थी, जो आजम की विधायकी जाने तक जारी है. उनके पिता शिव बहादुर सक्सेना रामपुर की स्वार टांडा विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट से चार बार विधायक रह चुके हैं. वह कल्याण सिंह सरकार में मंत्री भी थे. उनका कल्याण सिंह, अटल बिहारी वाजपेई और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे बीजेपी नेताओं से अच्छे रिश्ते थे. 


विधानसभा चुनाव 2022 में भी आकाश सक्सेना बीजेपी से थे उम्मीदवार
गौरतलब है कि बीजेपी ने आकाश सक्सेना को बीते विधानसभा चुनाव में रामपुर से टिकट दिया था. आकाश आजम खान के खिलाफ चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. आजम खान ने जेल में रहते हुए रामपुर सीट से चुनाव जीता था. 


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70 साल में पहली बार रामपुर से जीता हिंदू प्रत्याशी 
आपको बता दें कि आजम खान की सदस्यता जाने के बाद ये सीट खाली हुई थी. रामपुर विधानसभा सीट पर दूसरी बार उपचुनाव हुआ. पहली बार उपचुनाव 2019 में हुआ था. उस वक्त आजम खान ने विधायक रहते हुए लोकसभा का चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ था, जिसमें आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा ने जीत हासिल की थी. आजम ने सांसद रहते हुए इस सीट पर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की. पिछले 70 साल से इस सीट पर कोई हिंदू प्रत्याशी नहीं जीता था. 1952 से लेकर साल 2022 तक इस पर मुस्लिम उम्मीदवारों का दबदबा रहा है. बता दें कि सपा नेता आजम खान रामपुर सीट से 10 बार विधायक चुने गए हैं.