Zafaryab Jilani Death: वरिष्ठ अधिवक्ता और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सचिव जफरयाब जिलानी का बुधवार, 17 मई 2023 को सुबह निधन हो गया. उन्होंने लखनऊ में अंतिम सांस ली. सिर में चोट लगने के बाद जफरयाब जिलानी लंबे समय से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. जफरयाब जिलानी भले ही हमारे बीच अब नहीं रहे लेकिन, जब भी अयोध्या राम मंदिर और बाबरी मस्जिदका जिक्र होगा तो उन्हें जरूर याद किया जाएगा.


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वरिष्ठ अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने अयोध्या के राम जन्मभूमि मामले में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का प्रतिनिधित्व किया था. उन्होंने इस मामले में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी की तरफ से पैरवी की थी. इससे पहले वे उत्तर प्रदेश के एडिशनल एडीजी के तौर पर भी काम कर चुके थे.


मई 2021 में वकील जफरयाब जिलानी के सिर में चोट लग गई थी. सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उनका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा था. हालांकि उस वक्त उनकी हालत गंभीर बताई गई थी, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में रखा गया था. सिर में चोट लगने के कारण उनके दिमाग में खून का थक्का जम गया था और उन्हें ब्रेन हैमरेज भी हो गया था. हालांकि, सफल सर्जरी के बाद उनके खून के थक्के को हटा दिया गयाथा. कुछ दिनों के बाद वह धीरे-धीरे ठीक होने लगे थे. पिछले कुछ दिनों में उन्हें कम से कम दो बार स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हुई थीं. बुधवार को लखनऊ के निशांतगंज अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. उनके निधन पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने दुख जताया है.


जफरयाब जिलानी 1990 के दशक से सुर्खियों में हैं. उन्होंने अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था. जफरयाब जिलानी को बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (BMAC) का अध्यक्ष बनाया गया था. 5 जनवरी, 1955 को उत्तर प्रदेश, भारत में जन्मे जिलानी ने अपना करियर कानूनी वकालत और विभिन्न हाई-प्रोफाइल मामलों में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व को समर्पित कर दिया. 


जिलानी ने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि भूमि विवाद मामले में अपनी भूमिका के लिए काफी ध्यान आकर्षित किया. BMAC के संयोजक के रूप में, उन्होंने मुस्लिम पक्षों का प्रतिनिधित्व किया और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपनी दलीलें पेश कीं. 2019 में अदालत के फैसले ने हिंदुओं को भगवान राम की जन्मभूमि पर एक भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए स्थल प्रदान किया, जबकि मस्जिद के निर्माण के लिए मुसलमानों को वैकल्पिक पांच एकड़ जमीन प्रदान की गई.


इस मामले के अलावा जिलानी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और तथाकथित धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित मामलों सहित तथाकथित अल्पसंख्यक अधिकारों से संबंधित अन्य कानूनी लड़ाइयों में सक्रिय रूप से शामिल थे.