नई दिल्ली: कहते हैं कि रिश्ते अटूट होते हैं, और वो जितने पुराने होते हैं, उतने ही ज्यादा मजबूत होते हैं. हालांकि कई बार हम रिश्तों की अहमियत को भूल जाते हैं और कई बार साथ रहते-रहते रिश्तों पर एक परत सी जमने लगती है. इसलिए हमें रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए. हम आपको 26 साल पुराने उसी रिश्ते की याद दिलाना चाहते हैं. ये रिश्ता है आपके और Zee News के बीच का.


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आज की पीढ़ी को याद भी नहीं होगा कि Zee News के साथ उनके परिवार का रिश्ता कितना पुराना है. ज़ी न्यूज़ भारत का पहला प्राइवेट न्यूज चैनल है. मार्च 1995 में हमने भारत को पहला प्राइवेट न्यूज बुलेटिन (India's First Private News Bulletin) दिया था, जो उस जमाने में Zee TV पर हर रात दस बजे प्रसारित होता था. धीरे-धीरे आपका और हमारा रिश्ता गहरा होता गया और आधे घंटे का न्यूज बुलेटिन 24 घंटे के न्यूज चैनल में बदल गया. 


ZEE NEWS ने कराया TV NEWS से परिचय


टीवी न्यूज से आपको पहला परिचय Zee News ने ही कराया था. मार्च 1995 में Zee News ने जब आधे घंटे का न्यूज बुलेटिन शुरू किया, उस समय उसकी भाषा ऐसी थी, जिसे आसानी से समझा जा सके. इसे आप आम बोलचाल में संवाद की भाषा भी कह सकते हैं, जिसमें हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी का भी मिश्रण होता था. तब हमारी कोशिश थी कि चाहे हिंदी समझने वाले दर्शक हों या अंग्रेजी जानने वाले, खबर सबकी समझ में आनी चाहिए. 



ZEE NEWS ने समझा- 'परिवर्तन ही निरंतर है'


बहुत सी चीजें ऐसी होती हैं जो समय के साथ विलुप्त होती चली जाती हैं. कई रिश्ते ऐसे होते हैं जो टूट जाते हैं. कई प्रोडक्ट ऐसे होते हैं जो समय के साथ-साथ धूमिल होते जाते हैं. लेकिन Zee News लगातार अपने आपको बदलता रहा. परिवर्तन के दौर में हमने ना सिर्फ खुद को बदला बल्कि ये भी बताया कि पत्रकारिता वो होती है जो देश के प्रति समर्पित हो. इसलिए आज आप Zee News देखकर ये समझ सकते हैं कि परिवर्तन ही निरंतर है. इस दौरान हम अपने नए रंग, नए रूप, नई टेक्नोलॉजी और नए-नए फॉर्मेट के जरिए आपको खबरें देते रहे, जो आज भी जारी है.


नैना साहनी केस


आपके और Zee News के इस 26 वर्ष पुराने रिश्ते में कई पड़ाव आए और वर्ष 1995 इसकी नींव बना. तब 2 और 3 जुलाई की रात दिल्ली में कांग्रेस के नेता सुशील शर्मा (Sushil Sharma) ने नैना साहनी की हत्या (Naina Sahni's Murder Case) करके उसके शव को तंदूर में जला दिया था. Zee News के माध्यम से देश ने इस खबर को टीवी पर देखा और नैना साहनी को इंसाफ दिलाने की आवाज उठी. नैना साहनी का मामला निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सुशील शर्मा को सेशंस कोर्ट और हाई कोर्ट से फांसी की सजा हुई, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उम्र कैद में बदल दिया. हालांकि 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुशील शर्मा को रिहा करने का आदेश दे दिया क्योंकि वो 23 साल जेल में बिता चुका था.



चरखी-दादरी विमान हादसे की कहानी


12 नवंबर 1996 की शाम अचानक न्यूज एजेंसी पीटीआई पर खबर आई कि हरियाणा के चरखी-दादरी के पास आसमान में दो विमान टकरा गए हैं. शुरुआत में बस इतनी ही खबर थी. उस वक्‍त Zee News के रिपोर्टर के रूप में सुधीर चौधरी उसी वक्‍त दिल्ली से करीब 100 किलोमीटर दूर चरखी-दादरी के लिए निकल गए और वहां जो तस्वीरें देखीं वो आज भी याद है. वो सबसे भयानक विमान हादसों में से एक था, ये उस साल की सबसे बड़ी दुर्घटना थी, जिसमें 349 लोग मारे गए थे और ये खबर उस वक्त लोगों ने सिर्फ Zee News पर देखी थी.


ZEE NEWS ने की स्वतंत्र पत्रकारिता


अब हम आपको उस जमाने की याद दिलाना चाहते हैं, जब देश में स्वतंत्र पत्रकारिता होती ही नहीं थी. वो गोदी मीडिया का जमाना था. जब असली गोदी मीडिया था. तब नए-नए लोग उभर रहे थे. नेता जो बोलना चाहते थे, उनसे वैसे ही सवाल पूछे जाते थे. उस जमाने में Zee News के मंच पर बड़े-बड़े लोग आते थे और Zee News पर उनसे खुलकर सवाल पूछे जाते थे. चाहे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) हों या फिर अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) , पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) हों या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi). पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर तो Zee News पर दिशा संवाद नाम से शो करते थे. तो चाहे विचारधारा हो या उस वक्त की ब्रेकिंग न्यूज वो सब Zee News ने आपको दिखाई, बिना किसी दबाव के.



1999 में पहली बार लोगों ने देखी लाइव कवरेज


आज आप जब भी पाकिस्तान में छिपे आतंकवादी मसूद अजहर की तस्वीर देखते हैं तो कंधार हाईजैक याद आता है. 24 दिसंबर 1999 को काठमांडू से दिल्ली जा रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया था. Zee News ने तब इस हाइजैक की रिपोर्टिंग की थी. ये पहली ऐसी घटना थी जिसे लगातार 24 घंटे Zee News ने दिखाया और लोगों ने पहली बार टीवी पर किसी घटना की इस तरह लाइव कवरेज देखी.


कारगिल युद्ध का हर अपडेट लोगों तक पहुंचाया


मई 1999 को भारत और पाकिस्तान के बीच करगिल युद्ध हुआ था. भारत के लोगों ने पहली बार टेलीविजिन पर युद्ध देखा और उस युद्ध के मैदान में भी Zee News मौजूद था. ये लड़ाई करीब तीन महीने चली और देश ने Zee News के जरिए इस युद्ध को देखा.


उभरते हुए नेताओं को Zee News ने दिया बड़ा मंच


ममता बनर्जी आजकल खबरों के केंद्र में हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव होने हैं. लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि ममता बनर्जी को वर्ष 2000 में Zee News ने मंच दिया था और उसके बाद से ही भारतीय राजनीति की जमीन पर ममता बनर्जी ने धीरे-धीरे अपनी जड़ों को मजबूत किया और पिछले 10 वर्षों से वो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं. ममता बनर्जी की तरह उस वक्त के उभरते हुए नेताओं के लिए Zee News सबसे बड़ा मंच था. हमने उन्हें आवाज दी और आज वो जिस मुकाम पर हैं, उसमें Zee News का भी योगदान है. Zee News के 26 वर्षों के इस सफर की कहानियां अभी जारी रहेंगी.


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