Rahu Dosh: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में जब एक ही भाव में मंगल ग्रह के साथ राहु व केतु ग्रह आ जाते हैं तो अंगारक दोष का निर्माण होता है. इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन आने लगता है. व्यक्ति के मस्तिष्क में गुस्से का भाव कुछ ज्यादा ही हो जाता है. इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है, राहु अन्य ग्रहों के साथ मिल कर भी इस दोष का निर्माण करता है तो व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की व्याधियों का सामना करना पड़ता है. 


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राहु के साथ दूसरे ग्रहों की युति


- राहु और मंगल की युति से बनने वाले अंगारक योग की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को खून से संबंधित परेशानियां बढ़ जाती हैं. यह योग प्रभावित व्यक्ति के भाई के लिए भी अशुभ होता है. 


कुंडली में राहु के साथ दूसरे ग्रहों की युति से बनते हैं कई दोष, करना पड़ता है इन बीमारियों का सामनाजब कुंडली में राहु और सूर्य का योग बनता है तब इस योग का प्रभाव नकारात्मक ही रहता है. सूर्य और राहु की युति पिता व पुत्र के बीच विवाद पैदा कराने का कार्य करती है. 


राहु और चंद्रमा की युति में व्यक्ति को मानसिक परेशानियां आने लगती हैं. जिन लोगों की कुंडली में राहु के साथ एक ही भाव में चंद्रमा आ जाता है तो व्यक्ति को किसी न किसी तरह की उलझन बनी रहती है. 


राहु के साथ बुध की युति में व्यक्ति को सिर से संबंधित बीमारियां जैसे माइग्रेन आदि की समस्या हो सकती है. 


राहु और शुक्र ग्रह की युति होने पर शुक्र ग्रह के शुभ प्रभाव व्यक्ति के जीवन में नहीं रहते हैं यानी राहु के कारण शुक्र के लाभ समाप्त हो जाते हैं. राहु और गुरु का योग शुभ और अशुभ दोनों ही तरह का रहता है. 


जब भी राहु और गुरु की युति बनती है ऐसे व्यक्तियों की आयु तो लंबी होती है किंतु छोटी मोटी परेशानियां बनी रहती हैं. 


राहु और शनि की युति की स्थिति में व्यक्ति रहस्यमयी हो जाता है, जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहु और शनि की युति बन जाती है दब ऐसा व्यक्ति गलत तरीके से पैसे कमाना शुरु कर देता.


 


(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)