नई दिल्ली: टीम इंडिया (Team India) 2007 वर्ल्ड कप में पहले ही दौर से बाहर हो गई थी, जिसके बाद जो हुआ उसे शायद ही कोई याद करना चाहेगा. इस टूर्नामेंट में राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) टीम इंडिया (Team India) की कप्तानी कर रहे थे. अपने ग्रुप में टीम इंडिया (Team India) बांग्लादेश और श्रीलंका से हारकर 2007 वर्ल्ड कप से बाहर हो गया, जिसे क्रिकेट फैंस बर्दाश्त नहीं कर पाए. 


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पुलिस वैन में सवार हुए थे धोनी


क्रिकेट फैंस ने हिंसक और आक्रामक रवैये के साथ भारतीय क्रिकेटरों के प्रति अपना विरोध प्रदर्शन किया. लोग सड़कों पर उतर गए और भारतीय खिलाड़ियों के पुतले जलाने लगे. हालात इतने बेकाबू हो गए कि क्रिकेटरों की सुरक्षा बढ़ानी पड़ गई. उस दौरान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) को दिल्ली एयरपोर्ट से पुलिस वैन में ले जाया गया. खुद धोनी ने एक बार एक इवेंट में बताया था कि वह उस समय आतंकवादी की तरह महसूस कर रहे थे. धोनी ने कहा कि 2007 वर्ल्ड कप में भारत के बाहर होने के बाद जिस तरह की प्रतिक्रिया हुई, उससे उन्हें किसी 'हत्यारे और आतंकी' जैसा महसूस हुआ.


धोनी बोले क्रिमिनल जैसा महसूस हुआ 


माही ने बताया कि एयरपोर्ट से उन्हें पुलिस वैन में ले जाया गया और जिस तरह से मीडिया उनका पीछा कर रहा थी, उसके चलते उनके अंदर ऐसी भावना आ रही थी, कि जैसे वह कोई आतंकी या हत्यारे हों. धोनी ने बताया था कि किस तरह टीम जब वेस्ट इंडीज से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी थी और मीडिया की भारी भीड़ के बीच से उन्हें हाई सिक्यॉरिटी में बाहर ले जाया गया था.


भारतीय टीम का प्रदर्शन खराब रहा


वेस्टइंडीज में हुए 2007 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का प्रदर्शन खराब रहा. भारत केवल बरमूडा को हराने में कामयाब रहा जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका से ग्रुप मुकाबले हार गया. यहां तक कि धोनी के रांची स्थित घर पर भी पत्थरबाजी हुई जबकि तब वो मकान बनने के क्रम में था. 


धोनी ने सुनाई आपबीती 


धोनी ने बताया था कि 'जब हम दिल्ली में उतरे हमें पुलिस वैन में ले जाया गया. मैं वीरू पाजी के ठीक बगल में बैठा था. वो शाम या रात का वक्त था. हम 60-70 की स्पीड से जा रहे थे. यह भारत में संकरी सड़कों पर एक सामान्य स्पीड है और आप जानते हैं, मीडिया की कारें अपने कैमरों और ऊपर लगे बड़े कैमरों के साथ हमारे साथ चल रही थीं. हमें ये लगने लगा कि हमने कोई बड़ा अपराध किया है. शायद कुछ कुछ आतंकी घटना या कत्ल जैसी वारदात को अंजाम देने जैसा. वास्तव में वो हमारा पीछा कर रहे थे. कुछ समय के बाद, हम एक पुलिस स्टेशन में पहुंचे. हम अंदर गए, कुछ देर तक वहां बैठे और फिर 15-20 मिनट के बाद अपनी गाड़ी में बैठ कर वहां से निकले.'