नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत हो चुकी है. पूरा देश मां की भक्ति में डूबा हुआ है. इस बीच हम आपको 9 दिनों से जुड़ी कुछ विशेष जानकारियों से रूबरू करवाते हैं. साथ ही यहां आपका ये भी जानना आवश्यक है कि नवरात्रि के व्रत में किन-किन बातों का खास ख्याल रखना अनिवार्य है. पहले आपको 9 दिनों के बारे में बता देते हैं.


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नवरात्रि के पहला दिन


इस दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है. माता शैलपुत्री को धन-धान्य-ऐश्वर्य, सौभाग्य-आरोग्य तथा मोक्ष देने वाली माता कहा जाता है.


नवरात्रि के दूसरा दिन


इस दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा का प्रावधान है. माता ब्रह्मचारिणी को संयम, तप, वैराग्य तथा विजय प्राप्ति की देवी माना जाता है.


नवरात्रि के तीसरा दिन


इस दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि माता चंद्रघंटा कष्टों से मुक्ति तथा मोक्ष प्राप्ति की देवी हैं.


नवरात्रि के चौथा दिन


इस दिन माता कुष्मांडा की पूजा का प्रावधान है. माता कुष्मांडा को रोग, दोष, शोक की निवृत्ति तथा यश, बल और आयु देने वाली माता कहा जाता है.


नवरात्रि के पांचवां दिन


इस दिन माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है. माता स्कंदमाता को सुख-शांति और मोक्ष की दायिनी के रूप में पूजा जाता है.


नवरात्रि के छठा दिन


इस दिन माता कात्यायनी की पूजा का प्रावधान है. माता कात्यायनी को भय, रोग, शोक-संतापों से मुक्ति देने वाली देवी कहा जाता है.


नवरात्रि के सातवां दिन


इस दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि माता कालरात्रि शत्रुओं का नाश, कृत्या बाधा दूर कर मोक्ष देती हैं.


नवरात्रि के आठवां दिन


इस दिन माता महागौरी की पूजा की जाती है. माता महागौरी को कहा जाता है कि संकट से रक्षा, असंभव भी संभव करती हैं.


नवरात्रि के नौवां दिन


इस दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा का प्रावधान है. माता सिद्धिदात्री को कहा जाता है कि अलौकिक सिद्धियां प्रदान करती हैं.


नवरात्रि के व्रत में इन बातों का रखें ध्यान


नवरात्रि में नौ दिन भी व्रत रख सकते हैं और दो दिन भी. जो लोग नौ दिन व्रत रखेंगे वो लोग दशमी को पारायण करेंगे और जो लोग प्रतिपदा और अष्टमी को व्रत रखेंगे वो लोग नवमी को पारायण करेंगे. व्रत के दौरान जल और फल का सेवन करें. ज्यादा तला भुना और गरिष्ठ आहार ग्रहण न करें.


नवरात्रि व्रत के नियम


अगर आप भी नवरात्री के व्रत रखने के इच्‍छुक हैं, तो व्रत रखन के लिए इन नियमों का पालन करना चाहिए.


- नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना कर नौ दिनों तक व्रत रखने का संकल्‍प लें.


- पूरी श्रद्धा भक्ति से मां की पूजा करें.


- दिन के समय आप फल और दूध ले सकते हैं.


- शाम के समय मां की आरती उतारें.


- सभी में प्रसाद बांटें और फिर खुद भी ग्रहण करें.


- फिर भोजन ग्रहण करें.


- हो सके तो इस दौरान अन्‍न न खाएं, सिर्फ फलाहार ग्रहण करें.


- अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं को भोजन कराएं. उन्हें उपहार और दक्षिणा दें.


- अगर संभव हो तो हवन के साथ नवमी के दिन व्रत का पारण करें.


खास बात ये भी समझ लिजिए कि पूजा स्थल को शुद्ध कर लेना चाहिए. लकड़ी का पटरा रखकर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं. इस कपड़े पर थोड़े चावल रखने चाहिए. चावल रखते हुए सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें. एक मिट्टी के पात्र में जौ बोना चाहिए. पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें. कलश पर रोली से स्वस्तिक या ऊं बनाए. कलश के मुख पर रक्षा सूत्र बांधें. कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखें.


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