नई दिल्लीः संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर 25 सितंबर को होने वाली दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की बैठक रद्द हो गई है. दक्षिण एशिया के देशों के बीच आपसी सहयोग और साक्षेदारी को लेकर अहम संगठन की बैठक के आड़े पाकिस्तान आया.


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इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया कि सभी सदस्य देशों से सहमति के अभाव के चलते बैठक रद्द कर दी गई है.


अधिकतर देश विरोध में
दरअसल, शनिवार को होने वाली सार्क की बैठक को लेकर पाकिस्तान मांग कर रहा था कि इसमें तालिबान को शामिल किया जाए. सार्क में अफगानिस्तान का नेतृत्व वहां सत्ता में काबिज तालिबान करे. हालांकि, संगठन में शामिल अधिकतर देश इसके विरोध में थे. 


वहीं, पाकिस्तान का जोर इस बात पर भी था कि अशरफ गनी के नेतृत्व वाली अफगान सरकार के किसी भी प्रतिनिधि को सार्क विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए. 


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पाकिस्तान की मांग पर सभी सदस्य एकमत नहीं थे. ऐसे में सार्क विदेश मंत्रियों की होने वाली बैठक रद्द कर दी गई. 


भारत ने अभी नहीं दी है मान्यता
बता दें कि पिछले साल कोरोना महामारी के मद्देनजर सार्क देशों के मंत्रिपरिषद की बैठक ऑनलाइन आयोजित की गई थी. वहीं, भारत ने तालिबान को अब तक मान्यता नहीं दी है. दुनिया के अधिकतर देश भी तालिबानियों को मान्यता देने से बच रहे हैं. 
तालिबान के टॉप कैबिनेट मंत्रियों को संयुक्त राष्ट्र ने ब्लैक लिस्ट में डाला हुआ है. इसके बावजूद पाकिस्तान उसे बैठक में शामिल करने पर अड़ा हुआ था.


आपसी सहयोग है सार्क का उद्देश्य
सार्क (SAARC) दक्षिण एशिया के आठ देशों का संगठन है और इसका पूरा नाम है दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन. सार्क का गठन आठ दिसंबर 1985 को किया गया था. इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया में आपसी सहयोग से शांति और प्रगति हासिल करना है. अफगानिस्तान सार्क का सबसे नया सदस्य है. इस संगठन के अन्य सदस्यों में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव शामिल हैं.


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