धर्मगुरुओं ने की ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम’ बनाने की पहल

धर्म के नाम पर लोगों को भ्रमित करने, कन्या भ्रूण हत्या, सोशल मीडिया के दुरूपयोग तथा समाज में कड़वाहट पैदा करने वाले मुद्दों एवं सामाजिक कुरीतियों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने को महत्व प्रदान करते हुए विभिन्न धर्मगुरुओं ने इन विषयों को शामिल करते हुए ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम’ बनाने की पहल की है।

नई दिल्ली : धर्म के नाम पर लोगों को भ्रमित करने, कन्या भ्रूण हत्या, सोशल मीडिया के दुरूपयोग तथा समाज में कड़वाहट पैदा करने वाले मुद्दों एवं सामाजिक कुरीतियों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने को महत्व प्रदान करते हुए विभिन्न धर्मगुरुओं ने इन विषयों को शामिल करते हुए ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम’ बनाने की पहल की है।

‘सर्व धर्म संवाद’ की पहल के तहत पिछले सप्ताह आयोजित परिचर्चा में किंग अब्दुल्ला सेंटर फार डायलाग, सेंटर फार मीडिया स्टडीज, स्वामी अग्निवेश, मौलाना वहीदुद्दीन खान, आरिफ मोहम्मद खान समेत विभिन्न क्षेत्रों के अग्रणी व्यक्तित्व शामिल हुए। इस बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि समाज में मौजूद कुरीतियों के प्रति जागरूकता फैलाना धर्मगुरुओं का भी दायित्व है और राजनीतिक दलों की तरह ही धर्मगुरुओं को न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार करके उसपर प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।

इस विचार मंच के अध्यक्ष मनु सिंह ने बताया कि 2008 में इस पहल की शुरूआत ‘सर्व धर्म संसद’ के जरिये हुई थी। इसी पहल को आगे बढ़ाया गया है, जिसके तहत धर्म के नाम पर लोगों को भ्रमित करने से लेकर सामाजिक कुरीतियों, पर्यावरण संरक्षण, समाज के विभिन्न वर्गों में वैमनस्य पैदा करने वाले मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के लिए ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम’ तैयार करने की पहल की है।

सर्व धर्म संवाद में शामिल धार्मिक नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि सोशल नेटवकि’ग साइटों के जरिये कुछ सकारात्मक बातें हो रही हैं लेकिन इसके जरिए लोगों के बीच वैमनस्य फैलाने और लोगों में गलत बातों का दुष्प्रचार करके लोगों को बांटने का काम भी किया जा रहा है। इस स्थिति के निराकण की जरूरत है। यूनेस्को ने मीडिया कार्यक्रम तैयार किया है, जिसके तहत धार्मिक नेताओं के लिए दिल्ली में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

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