Goncha Festival: बस्तर में गोंचा महापर्व की तैयारी हुई शुरू, इतने दिनों तक नहीं होंगे भगवान जगन्नाथ के दर्शन
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Goncha Festival: बस्तर में गोंचा महापर्व की तैयारी हुई शुरू, इतने दिनों तक नहीं होंगे भगवान जगन्नाथ के दर्शन

Goncha Rath Yatra: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दशहरा पर्व के बाद मनाए जाने वाले दूसरे सबसे बड़े गोंचा महापर्व की शुरुआत हो गई है. 27 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में अद्भुत रस्मों की अदायगी की जाती है जिसे देखने सिर्फ प्रदेश से ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक बस्तर पहुंचते हैं.

Goncha Festival: बस्तर में गोंचा महापर्व की तैयारी हुई शुरू, इतने दिनों तक नहीं होंगे भगवान जगन्नाथ के दर्शन

अनूप अवस्थी/जगदलपुरः छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर (Bastar)संभाग मुख्यालय जगदलपुर में गोंचा महापर्व की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. जगन्नाथ मंदिर में इन दिनों भगवान जगन्नाथ सुभद्रा और बलभद्र अनसर काल में चल रहे हैं. ऐसे में जगन्नाथ मंदिर में विग्रहों के दर्शन श्रद्धालुओं को नहीं हो रहे.

बता दें कि बस्तर में गोंचा महापर्व को लेकर उत्साह देखा जाता है. दशहरा पर्व में होने वाली रथ परिक्रमा की तरह जगदलपुर में भगवान जगन्नाथ की रथ परिक्रमा का बेहद महत्व माना जाता है. सैकड़ों वर्षों से जगदलपुर में रथ परिक्रमा की परंपरा चली आ रही है. 

600 वर्षो से चली आ रही परंपरा
पूरी की तरह ही बस्तर में गोंचा पर्व मनाने की परंपरा 600 से अधिक वर्षों से यहां चली आ रही है. ऐतिहासिक रियासत कालीन परंपरा अनुसार 360 घर आरण्य ब्राह्मण समाज द्वारा समस्त पूजा विधान यहां किए जा रहे हैं. समाज और मंदिर समिति से जुड़े सदस्यों ने बताया भगवान का अनसर काल प्रारंभ हो गया, जो कि 18 जून तक जारी रहेगा.

भगवान की औषधीय युक्त विशेष भोग के अर्पण के साथ सेवा होगी, 19 जून को नेत्रोत्सव पूजा विधान के साथ भगवान जगन्नाथ स्वामी, माता सुभद्रा और बलभद्र का दर्शन लाभ श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भगृह के बाहर होंगे. जिसके बाद रथ परिक्रमा होगी.

जानिए क्या बोले कारीगर
भगवान जगन्नाथ का रथ निर्माण कर रहे कारीगर हरदेवराम यादव बताते हैं कि उनके द्वारा बीते 20 सालों से रथ बनाने की परंपरा निभाई जा रही है. 20 जून को नव निर्मित रथ में सवार होकर भगवान जगन्नाथ माता सुभद्रा और बलभद्र के साथ गोल बाजार की परिक्रमा करेंगे. इस दौरान बस्तर के लोग तुपकी चलाकर भगवान जगन्नाथ को सम्मान देंगे.

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