विश्व तंबाकू निषेध दिवस: तंबाकू सेवन और उसके परिणामों के आंकड़े बेहद भयावह, जानिए रिसर्च रिपोर्ट
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विश्व तंबाकू निषेध दिवस: तंबाकू सेवन और उसके परिणामों के आंकड़े बेहद भयावह, जानिए रिसर्च रिपोर्ट

विश्व तंबाकू निषेध दिवस:  तंबाकू सेवन और उसके परिणामों के आंकड़े बेहद भयावह हैं. आखिर कब राजस्थान में तंबाकू पर बैन लगेगा ये बड़ा सवाल बना हुआ है.राजस्थान में एक करोड़ इक्कीस लाख तंबाकू सेवन करने वाले हैं.

विश्व तंबाकू निषेध दिवस:  तंबाकू सेवन और उसके परिणामों के आंकड़े बेहद भयावह, जानिए रिसर्च रिपोर्ट

Jaipur:  राजस्थान के युवाओं और किशोरों में तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों की लत का बढ़ना राज्य के लिए चिंता का गंभीर विषय है. प्रदेश में करीब 80 हजार लोगों की तंबाकू व अन्य धम्रपान उत्पादों के सेवन से होने वाली बीमारियों से अकारण मौत हो जाती है. आज वर्ल्ड नो टोबेको डे हैं और चिंता की बात यह है कि तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल किशोर और युवाओं में तेजी से बढ़ रहा हैं.

राजस्थान में सालभर में बाइस हजार करोड़ की तंबाकू खाई जा रही है. राज्य में तंबाकू निषेध हो इसके लिए काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं का दावा तो यह तक है कि राज्य में करीब चौबीस प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन कर रहे हैं. तंबाकू छोड़ने के प्रयासों और जागरूकता के बाद भी शहर से लेकर गांव तक कैंसर फैलाने वाले इस नशे के इस्तेमाल या बिक्री पर कोई अंकुश नहीं है.

राजधानी जयपुर के साथ ही कोटा और सीकर जैसे एजुकेशनल हब में युवाओं तंबाकू के नशे की लत बढ रही हैं. तंबाकू मुक्त अभियान चला रहे राजन चौधरी बताते है कि जितना सरकार का राजस्व नहीं है उससे पांच गुना अधिक खर्च लोगों द्वारा तंबाकू से   रोग ग्रस्त होने के बाद इलाज में खर्चा हो जाता हैं.तम्बाकू के सेवन और धूम्रपान का असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है. 

इसके कारण कई बीमारियां और जटिलताएं हो सकती हैं. धूम्रपान का असर पूरे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर पड़ता है. जिसमें दिल, खून, रक्त वाहिकाएं शामिल हैं. धूम्रपान कैंसर तथा फेफड़ों की बीमारियों जैसे क्रोनिक आब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी रोगों, दिल की बीमारियों को जन्म देता हैं. धूम्रपान की वजह से रक्त, ब्लैडर, सर्विक्स, फेफड़ों, लिवर, गुर्दे, ग्रसनी, पैनक्रियाज़, मुंह, गले, लेरिंक्स, किडनी, कोलन, रेक्टम, पेट का कैंसर भी हो सकता है. फेफड़ों में होने वाले 10 प्रकार के कैंसर में से 9 प्रकार के कैंसर धूम्रपान की वजह से ही होते हैं. धुएं रहित तम्बाकू जैसे तम्बाकू चबाने से ग्रसनी, मुंह और गले का कैंसर हो सकता है. भारत में मुंह के कैंसर के 90 फीसदी मामले धुंएरहित तम्बाकू की वजह से होते हैं. डॉक्टरों के पास आने वाले मरीजों में हाई बीपी और सांस की बीमारियों के मामले देखे जाते हैं. 

प्रतिदिन तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के सेवन में खर्च होने वाली राशि से आसानी से पौष्टिकता से भरपूर भोजन आसानी से किया जा सकता है.जिस तरह से हर इंसान को अपना जीवन चलाने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत आवश्यकता होती है. उसी तरह से तंबाकू को न चुनकर पोष्टिक भोजन को मूलभूत प्राथमिकता में शामिल करने की जरुरत है. एक अनुमान के हिसाब से प्रतिदिन तंबाकू व धम्रपान उत्पादों का सेवन करने वाला 5 गुटखा सेवन कर लेता है और सिगरेट व बीड़ी पीने वाले इसी मात्रा में उपभोग करता है. जिसका अनुमानित खर्च 40 से 50 रुपये आता है. इतनी ही राशि से दो समय का भोजन किया जात सकता है, जोकि पूरी तरह से पोष्टिकता से भरपूर होता है. खासतौर पर राजस्थान सरकार की इंदिरा रसोई इसका अच्छा उदाहरण साबित हो सकती है.

राजस्थान में 24.7 प्रतिशत तंबाकू यूजर

राजस्थान में वर्तमान में 24.7 प्रतिशत लोग (5 में से 2 पुरुष, 10 में से 1 महिला यूजर) किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का उपभोग करते है. जिसमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान के रूप में तंबाकू का सेवन करते है, जिसमें 22.0 प्रतिशत पुरुष, 3.7 प्रतिशत महिलाएं शामिल है. यहां पर 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का प्रयोग करते है, जिसमें 22.0 प्रतिशत पुरुष व 5.8 प्रतिशत महिलाएं शामिल है. डा.सिंघल ने बताया कि युवाओं को इससे बचाने के लिए तंबाकू उद्योगों द्वारा अपने उत्पादों के प्रति आकर्षित करने के प्रयास पर प्रभावी अंकुश, बच्चों व युवाओं के निरंतर तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभाव के प्रति निरंतर जागरूक करने तथा तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों के साथ इसकी बिक्री पर भी रोक लगाने की जरूरत है.

जेजे एक्ट व कोटपा की हो प्रभावी पालना
राजस्थान में किशोरों व युवाओं को तंबाकू की पहुंच से दूर रखने के लिए तंबाकू नियंत्रण अधिनियम 2003 (कोटपा) तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 77 (जेजे एक्ट) की प्रभावी अनुपालना कराने की जरूरत है. वहीं सिगरेट की खुली बिक्री पर प्रतिबंध है लेकिन इसकी भी पालना नही होने के कारण आपको ये सभी उत्पाद आसानी से मिल रहें है. खुली सिगरेट खरीदना युवाओं के लिए सुगम है, इसलिए खुली सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध को प्रभावी बनाये जाने की जरूरत है.सार्वजनिक स्थल, शिक्षण संस्थानों आस पास, किराना स्टोर, पान शॉप इत्यादि स्थानों पर तंबाकू व धूम्रपान उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाकर भी तंबाकू यूजर की संख्या में कमी लाई जा सकती है.

तंबाकू उत्पादों की बढ़ती खपत सभी के लिए नुकसानदायक

प्रदेश में तंबाकू उत्पादों की बढ़ती खपत हम सभी के लिए नुकसानदायक है. इससे जहां जनमानस को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक भार झेलना पड़ता है वहीं सरकार को भी आथर््िाक भार वहन करना पड़ता है. इसलिए तंबाकू पर टैक्स बढ़ाने की नीति को निरतर बनाए रखना चाहिए या फिर इस पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए. राजस्थान सरकार ने जनमानस के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए देश में सबसे अधिक टैक्स की श्रेणी में रखा. जिसके चलते प्रदेश में तंबाकू का उपभोग में कमी आई.

हर पांच मौतों में से एक मौत तंबाकू की वजह से

एक्सपर्ट्स ने बताया कि दुनियाभर में होने वाली हर पांच मौतों में से एक मौत तंबाकू की वजह से होती है तथा हर छह सेकेंड में होने वाली एक मौत तंबाकू और तंबाकू जनित उत्पादों के सेवन से होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि सन 2050 तक 2-2 अरब लोग तंबाकू या तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे होंगे.

स्वस्थ जीवन जीने के लिए ये जरूरी

सामान्य इंसान को जीवन जीने के लिए प्रतिदिन 2500 कैलोरी की आवश्यकता होती है. जिसमें महिलाओं को 2000 कैलोरी की जरुरत पड़ती है. तभी वे स्वस्थ जीवनयापन कर सकते है.राजस्थान के ईएनटी चिकित्सकों, सुखम फाउंडेशन ने ‘‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर गंभीर चिंता जताई है. इसके लिए प्रदेशभर में कोटपा व जेजे एक्ट में कार्रवाई को लेकर पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन दिया गया.जिसमें बताया गया कि राजस्थान में तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों की रोकथाम के लिए राज्य के सभी जिलों व संभाग मुख्यालयों पर कोटपा व जेजे एक्ट में प्रभावी कार्रवाई की जाए तो तंबाकू यूजर को हत्तोसाहित किया जा सकेगा.

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