संत, संयम और संन्यास

Last Updated: Friday, August 23, 2013 - 14:19

वासिंद्र मिश्र
आसाराम बापू पर लगे आरोपों के बाद एक बार फिर पूरे संत और कथावाचक समाज पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल ये कि आखिर ये कथित संत अपने गृहस्थ जीवन को छोड़कर संन्यास की ओर जाते ही क्यों हैं? समाज के दूसरे लोगों को चरित्र निर्माण और संयम की दीक्षा देने वाले ये लोग आखिर खुद मानसिक और यौन विकृतियों का शिकार हो रहे हैं? अगर उन्हें खुद इन बातों का अहसास नहीं है तो फिर क्यों नहीं तुलसीदास और ओशो रजनीश की जीवनशैली से सबक ले लेते।
गोस्वामी तुलसीदास बनने से पहले अगर तुलसीदास के बारे में चर्चित कहानियों पर भरोसा करें तो भगवान राम के प्रति उनकी अगाध आसक्ति के पीछे उनकी पत्नी का हाथ बताया जाता है। कहते हैं कि शादी के कुछ दिन बाद जब उनकी पत्नी अपने मायके चली गईं थीं तो तुलसीदास पत्नी वियोग नहीं झेल पाए और रात में एक शव के सहारे गंगा तैरते हुए अपनी पत्नी से मिलने अपनी ससुराल पहुंच गए। इस पर उनकी पत्नी ने ताना मारते हुए कहा कि जितना प्यार आप मेरे हाड़-मांस के इस शरीर से करते हैं उसका कुछ हिस्सा भी अगर भगवान से करेंगे तो इंसान बन जाएंगे। अपनी पत्नी के मुंह से ये शब्द सुनकर गोस्वामी तुलसीदास की जीवनचर्या ही बदल गई और उसके बाद क्या हुआ ये सब जानते हैं।

आधुनिक दुनिया के सबसे विवादास्पद और तार्किक धर्मशास्त्री आचार्य ओशो रजनीश की तो पूरी फिलॉसॉफी ही संभोग से समाधि तक पर आधारित है। अगर हमारे इन संतों, कथावाचकों और धर्मगुरुओं को सचमुच अनुशासन, मर्यादा और आत्मसंयम का रास्ता रास नहीं आ रहा तो उनके लिए दोहरी, पाखंड से भरी जिंदगी जीने से बेहतर है कि वो गृहस्थ जिंदगी में वापस चले जाएं और पहले अपनी दबी इच्छा पूरी कर लें, उसके बाद ही परमात्मा से ‘राब्ता’ कायम करने की कोशिश करें।
आसाराम बापू लगभग 500 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं, देश विदेश में इनके तकरीबन 400 आश्रम हैं। ऐसा नहीं है कि 72 साल के आसाराम बापू के साथ पहली बार कोई विवाद जुड़ा हो, पिछले कई साल से तथाकथित संत हमेशा विवादों की वजह से ही चर्चा में आए हैं। सालाना इनकी आमदनी सैकड़ों करोड़ है। इनकी चर्चा अक्सर इनके बयान और इनके कर्मों की वजह से ही होती है। कभी इनके गुरुकुल में हुए बच्चों की रहस्यमयी मौत का मामला तो कभी रतलाम में ज़मीन हथियाने का मामला आसाराम बापू को सुर्खियों में लाता रहा है।
ऐसे ही एक धर्माचार्य हैं आचार्य कृपालु महाराज। 91 साल के कथित धर्माचार्य कृपालु जी महाराज पर भी कई संगीन आरोप लगते रहे हैं। लड़कियों का अपहरण और रेप के आरोप में कृपालु जी महाराज जेल भी जा चुके हैं। दुनिया में कई जगहों पर आश्रम खोल लोगों को संयम का पाठ पढ़ाने वाले कृपालु महाराज को अमेरिकी अदालत ने भी नाबालिग के यौन शोषण का दोषी पाया। अमेरिका में ये गिरफ्तार भी किए गए।

ऐसे ही तथाकथित गुरुओं की चर्चा के दौरान कोई स्वामी नित्यानंद को कैसे भूल सकता है। स्वामी नित्यानंद इस बार कुंभ मेले में महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर भी बना दिए गए लेकिन उनका असली चेहरा भला कौन भूल पाया है। चाहे वो दक्षिण भारतीय अभिनेत्री के साथ की उनकी तस्वीरें हों या फिर एक एनआरआई महिला की तरफ से लगाए गए यौन शोषण के आरोप। इतना ही एक पुरुष अनुयायी भी इस स्वामी पर यौन शोषण का आरोप लगा चुका है। यानि एक धर्मगुरु पुलिस के रिकॉर्ड में रेपिस्ट है।
इन लोगों के कृत्यों को देखकर सवाल उठते हैं कि क्या ये दोबारा देवदासी परंपरा को जिंदा करना चाहते हैं। वैसे भी पिछले कुछ साल में जिस तरह से असीमानंद, भीमानंद जैसे तथाकथित साधु संतों का नाम हर तरह के अपराध से जुड़ा है उसने ये साबित कर दिया है कि कई लोग साधु का कवच पहनकर समाज को बिगाड़ने चल पड़े हैं।
(लेखक ज़ी मीडिया रीजनल चैनल्स के संपादक हैं)



First Published: Friday, August 23, 2013 - 14:18


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