....ओ सूरज दादा और कितना जलाओगे!

गर्मी का मौसम है तो ज़ाहिर सी बात है गर्मी होगी ही और होनी भी चाहिए क्योंकि कहा भी जाता है कि मौसम को मोटे तौर पर जाड़ा गर्मी बरसात के खानों में बांटा गया है और हर मौसम का अपना मज़ा और नुकसान दोनों

टिटिलागढ़: 'अंगारों' सी तपती जमीन पर शांति और सुकून के पल टिटिलागढ़: 'अंगारों' सी तपती जमीन पर शांति और सुकून के पल

गर्म धूप निकली सभी सुगबुगाए, हटा दो रजाई ,चलो धूप खाए। एक कविता का ये हिस्सा जाड़े के मौसम के लिए मुफीद बैठता है। सूरज से निकल रही गुनगुनी धूप जाड़े के दिनों में सुकून देती है जबकि गर्मी में सितम ढाने और जलाने का काम करती है। और इस मौके पर ‘गर्मी ने बेदम किया, मुख से निकले आग, वन-उपवन जलने लगे ऐसी बरसी आग। मौसम करवट ले रहा, निकल रही है जान, जल-जंगल जलने लगे, पिघल रहा इंसान’ ये पंक्तिया गर्मी की दशा और दिशा से बखूबी साक्षात्कार कराती है। इस बार देश के कई हिस्सों में जो गर्मी मई और जून के महीने में पड़ा करती थी वह अप्रैल के महीने में ही आसमान से आग बरसा रही थी। ओडिशा के 18 जिले सूरज की दहकती गर्मी से धधक रहे हैं। गर्मी और तपिश का हाल कुछ ऐसा कि जिसने जिंदगी की दिनचर्या को तहस-नहस करके रख दिया हो।

मेरे लिए हर किरदार जिंदगी और मौत का सवाल होता है: मनोज बाजपेयी मेरे लिए हर किरदार जिंदगी और मौत का सवाल होता है: मनोज बाजपेयी

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कुछ चुनिंदा एक्टर्स ऐसे हैं जो अपने अभिनय से जादूगरी जगाना जानते हैं और उनमें से एक हैं अभिनेता मनोज बाजपेयी। मनोज बाजपेयी ने थिएटर से टीवी और टीवी से फिल

जगन्नाथ पुरी: भाव और भक्ति के सर्वोत्तम नाथ जगन्नाथ पुरी: भाव और भक्ति के सर्वोत्तम नाथ

पुरी के जगन्नाथ मंदिर जाने और उनके अद्भुत स्वरूप के दर्शन करने की इच्छा बचपन से बलवती थी। एक बार भुवनेश्वर जाने का मौका भी मिला था। लेकिन हालात इस कदर अनुकूल नहीं थे और मैं चाहकर भी वहां जा नहीं पा

गौरैया के आशियाने को मिली नई 'उड़ान' गौरैया के आशियाने को मिली नई 'उड़ान'

एक जानेमाने शायर से किसी ने पूछा। सबसे ज्यादा मजा कैसी शायरी को लिखने में आता है। उन्होंने जवाब दिया- 'जिंदगी के फलसफे को लेकर लिखी गई शायरी'। फिर उनसे पूछा गया। वैसे मसले पर शायरी जिसपर उन्हें दिक

पानी ने बनाया एक शहर 'बंधक' पानी ने बनाया एक शहर 'बंधक'

क्या पानी किसी शहर को बंधक बना सकता है? क्या पानी को लेकर दंगा होने के डर की वजह से किसी शहर में धारा 144 लगाई जा सकती है? क्या किसी शहर के लोग तमाम कामकाज छोड़ कर दिन रात 24 धंटे सिर्फ पानी के बारे में सोच सकते है? आज के वक्त में जब देश के छोटे से छोटे दूर दराज इलाके में भी मिनरल वॉटर की बोतल मिलती हो तो हज़ारो लोग पीने के पानी के लिए तरस सकते हैं।

'बोफोर्स घोटाले की आंच से मैंने अमिताभ बच्चन को बचाया' 'बोफोर्स घोटाले की आंच से मैंने अमिताभ बच्चन को बचाया'

कभी अभिनेता अमिताभ बच्‍चन के बेहद नजदीकी रहे राजनेता अमर सिंह ने एक बार फिर उन पर निशाना साधा है। न्‍यूज़ चैनल इंडिया 24×7 के एडिटर वासिंद

असम में मिशन-84 का तीन तिकड़म असम में मिशन-84 का तीन तिकड़म

असम में 126 विधानसभा सीटों के महासंग्राम में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने के लिए 'मिशन 84' का तीन तिकड़म चरम पर है। भाजपा महीनों से इस मिशन पर काम कर रही है और यहां

सियासत में आह्वाहन की भूमिका सियासत में आह्वाहन की भूमिका

एकजुटता और अखंडता को दर्शाता है- आह्वाहन। श्रेष्ठ नेतागण या किसी समुदाय विशेष को दिशा निर्देशित करने वाले व्यक्ति किसी विशेष कार्य के लिए लोगों के एकजुट होकर कदम से कदम मिलाकर चलने का आह्वाहन करते हैं। महात्मा गांधी ने आह्वाहन किया था उन बिखरे लोगों का जो आजके बने भारत में तो थे पर उनमें मिलकर चलने की असल भावना गांधीजी ने ही जगायी। लाल बहादुर शास्त्री जी ने देशवासियों का आह्वान् किया था कि देशवासी कुछ दिनों के लिए एक वक्त का भोजन छोड़ दें। ताकि ग्रामीण इलाकों में चल रही भूखमरी की समस्या से कुछ हद तक निज़ाद मिल सके।

सपनों के 'बजट' में घुमड़ता किसान सपनों के 'बजट' में घुमड़ता किसान

वित्त वर्ष 2016-17 के लिए संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट में मोदी सरकार ने अगले पांच वर्षों में किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आज पेश किए गए बजट

अपनी पहली फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड और नर्वस हूं : शमीन मनन अपनी पहली फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड और नर्वस हूं : शमीन मनन

मौजूदा समय में कई बॉलीवुड सितारे हैं जो फिल्मों से पहले टीवी पर अपनी चमक बिखेर रहे थे। टीवी ने हमें शाहरुख खान, इरफान खान, सुशांत सिंह राजपूत जैसे कई बड़े सितारे द

मोदी सरकार ! इकबाल जरुरी है...। मोदी सरकार ! इकबाल जरुरी है...।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से बीजेपी 'मिशन यूपी ' की शुरुआत कर रही है... कही से भी करे ये पार्टी का मामला है ,लेकिन बलरामपुर क्यों ?

मुश्किलों में महानगर, बचाइये वरना... मुश्किलों में महानगर, बचाइये वरना...

तेजी से बढ़ रही जनसंख्या और महानगरों की ओर हो रहे पलायन दोनों कई बड़ी समस्याओं की जड़ है। बीते दिनों, दिल्ली सरकार ने प्रदूषण और ट्रैफिक जाम के समाधान के लिये सम-विषम नंबर का ऐसा फॉर्मूला लागू किया

सेकेंडों में लहसुन के छिलके हटाने के शानदार टिप्स, देखें वीडियो सेकेंडों में लहसुन के छिलके हटाने के शानदार टिप्स, देखें वीडियो

लहसुन आपके खाने को ना सिर्फ स्वादिस्ट बनता है बल्कि आपके लिए स्वास्थ्य के भी लाभदायक है। भारतीय घरों में किचन के लिए लहसुन एक लोकप्रिय मसाला है। इसके छिलके हटाने में काफी वक्त लगता है लेकिन आप इस वीडियो को देखकर सेकेंडों में लहसुन के छिलके को हटा सकते हैं।

सात्विकता और निर्मलता का महापर्व: बसंत पंचमी सात्विकता और निर्मलता का महापर्व: बसंत पंचमी

देश में हम हर साल तीन मौसम से रूबरू होते है। गर्मी, जाड़ा और बरसात। गर्मी से ठीक पहले एक अद्भुत ऋतु का आगाज होता है। एक ऐसी ऋतु जो प्रकृति के अद्भुत स्वरूप को हमारे सामने परोसती और उसमें भिगोती है।

जम्मू कश्मीर : सरकार गठन में उलझन कहां? जम्मू कश्मीर : सरकार गठन में उलझन कहां?

जम्मू कश्मीर में राजनीतिक हलचल आसमान छू रही है। दस महीने तक रहे मंत्रियों के दिल की धड़कन ऊफान पर है। सत्ता को ना छोड़ने की तमन्ना के बीच बैठकों का दौर भी जारी है। पीडीपी कहती है हम गठबंधन तो चाहते

पीडीपी-बीजेपी: असमंजस और सियासी खींचतान पीडीपी-बीजेपी: असमंजस और सियासी खींचतान

मरहूम मुफ्ती साहब कश्मीर की सियासत में एकबार फिर याद किये जाने लगे है। सन 2002 में जब पहली बार पीडीपी की सरकार कश्मीर में बनी तो लोग मेहबूबा की जगह मुफ़्ती साहब को बजीरे आला देखकर हैरान थे क्योंकि क

राजनीतिक जीवन के चौराहे पर मेहबूबा! राजनीतिक जीवन के चौराहे पर मेहबूबा!

करीब दो दशक पहले अपना राजनीतिक जीवन शुरू करने वाली जम्मू कश्मीर की सबसे ताकतवर महिला नेता मेहबूबा मुफ़्ती को वक्त ने राजनीतिक जीवन के चौराहे पर खड़ा कर दिया है। यह उनके जीवन का अच्छा और बुरा दोनों

सुरक्षा और खुफिया तंत्र इतना लचर क्यों? सुरक्षा और खुफिया तंत्र इतना लचर क्यों?

पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हमारे सुरक्षा और खुफिया तंत्र के वास्तविक हालातों को उजागर करती है। नापाक इरादों वाले पाकिस्तानी आतंकियों का हमला इस बार किसी भीड़ भरे बाजार पर नहीं बल्कि हमारे वजूद और



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