ज़ी स्पेशल

आजादी के 71 साल: 'खड़िया के घेरे' में हैं इंसान की आजादी

आजादी के 71 साल: 'खड़िया के घेरे' में हैं इंसान की आजादी

हम अपनी आज़ादी की 71वीं वर्षगांठ मना रहे हैं लेकिन क्या हम वाकई में आजाद हैं. दरअसल सभ्यता के विकास से लेकर अब तक हम कभी आजाद हुए ही नहीं है. जिस तरह से लाश को श्मशान तक ले जाते वक्त कंधे बदले जाते हैं उसी तरह हमने बस गुलामी के कंधे बदले हैं. 

पंकज रामेंदु | Aug 15, 2018, 09:22 AM IST
अंग्रेजों से आजादी मिल गई, लेकिन 'इस' आजादी को बचाने की फिक्र भी कीजिए

अंग्रेजों से आजादी मिल गई, लेकिन 'इस' आजादी को बचाने की फिक्र भी कीजिए

15 अगस्त राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और ऐसे ही तमाम बंधनों से मुक्ति का पर्व है.

पंकज शुक्ला | Aug 15, 2018, 09:08 AM IST

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आजादी के 71 साल: 'खड़िया के घेरे' में हैं इंसान की आजादी

आजादी के 71 साल: 'खड़िया के घेरे' में हैं इंसान की आजादी

हम अपनी आज़ादी की 71वीं वर्षगांठ मना रहे हैं लेकिन क्या हम वाकई में आजाद हैं. दरअसल सभ्यता के विकास से लेकर अब तक हम कभी आजाद हुए ही नहीं है. जिस तरह से लाश को श्मशान तक ले जाते वक्त कंधे बदले जाते हैं उसी तरह हमने बस गुलामी के कंधे बदले हैं. 

पंकज रामेंदु | Aug 15, 2018, 09:22 AM IST
अंग्रेजों से आजादी मिल गई, लेकिन 'इस' आजादी को बचाने की फिक्र भी कीजिए

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15 अगस्त राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और ऐसे ही तमाम बंधनों से मुक्ति का पर्व है.

पंकज शुक्ला | Aug 15, 2018, 09:08 AM IST
आजादी के 71 साल: न हो कमीज तो पांवों से पेट ढंक लेंगे

आजादी के 71 साल: न हो कमीज तो पांवों से पेट ढंक लेंगे

पूंजीवाद का पुरखा अमेरिका है. यह तमगा अब ड्रैगन और लायनवाला एशिया छीनने जा रहा है. पूंजीवाद का रोड रोलर सबकुछ कुचलता, रौंदता हुआ चलता है- इच्छाएं, संवेदनाएं, आवाज़, अंदाज, समरसता, मनुष्यता.

जयराम शुक्ल | Aug 15, 2018, 08:47 AM IST
डियर जिंदगी: संकरी होती आत्‍मीयता की गली…

डियर जिंदगी: संकरी होती आत्‍मीयता की गली…

याद रखिए, प्रेम, आत्‍मीयता और स्‍नेह समाज से इसलिए कम हो रहे हैं, क्‍योंकि इनकी चिंता में घुलने वाले तो बहुत हैं, लेकिन इन्‍हें दूसरों तक पहुंचाने वाले बहुत कम हैं. और जिस चीज के समर्थन में कम लोग होते हैं, वह चीज धीरे-धीरे गायब होती जाती है.

दयाशंकर मिश्र | Aug 14, 2018, 07:56 AM IST
नेहरू की छवि मलिन कर हम अपना भविष्य धूमिल कर रहे हैं...

नेहरू की छवि मलिन कर हम अपना भविष्य धूमिल कर रहे हैं...

नेहरू ने तो पराक्रमी और महान जीवन जिया. आज का भारत उनके आधुनिक मन का ही विस्तार अपने सार्वजनिक जीवन की समस्त सकारात्मकताओं में समेटे हुए है.

आलोक श्रीवास्तव | Aug 13, 2018, 07:55 PM IST
शहरों की प्लानिंग में ही खिंचा है आपदा का नक्शा

शहरों की प्लानिंग में ही खिंचा है आपदा का नक्शा

चौमासा बीतने में अभी डेढ़ महीना बाकी है और देश में 774 लोग बाढ़ और बारिश से मारे जा चुके हैं

पीयूष बबेले | Aug 13, 2018, 06:38 PM IST
डियर जिंदगी : जिंदगी को निर्णय की ‘धूप’ में खिलने दीजिए

डियर जिंदगी : जिंदगी को निर्णय की ‘धूप’ में खिलने दीजिए

'अलग’ हो जाना या ठीक कर लेना, देखने में यह अलग-अलग बातें दिखती हैं, लेकिन असल में यह ‘एक’ ही हैं.

दयाशंकर मिश्र | Aug 13, 2018, 08:58 AM IST
लॉर्ड्स टेस्ट: फटाफट क्रिकेट का असर तो नहीं है ये

लॉर्ड्स टेस्ट: फटाफट क्रिकेट का असर तो नहीं है ये

अगर विश्व रैंकिग में नंबर एक टीम के विश्व रैंकिग में नंबर एक खिलाड़ी को 57 गेंदें रक्षात्मक तरीके से खेलने में लगातार दिक्कत आई हो तो हमें यह मान लेना चाहिए कि फटाफट क्रिकेट ने टेस्ट मैच के लिए जरूरी माने जाने वाले धैर्य को चलता कर दिया है.

सुविज्ञा जैन | Aug 11, 2018, 10:48 PM IST
डियर जिंदगी : 'क्‍या गम है, जो मुझसे छुपा रहे हो…'

डियर जिंदगी : 'क्‍या गम है, जो मुझसे छुपा रहे हो…'

एक-दूसरे से खुलकर दिल की बातें कहने का हुनर अभी हम नहीं सीख पाएं हैं. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि हम खुलकर आसानी से अपने दिल का ‘हाल’ एक-दूसरे से बयां नहीं करते.

दयाशंकर मिश्र | Aug 10, 2018, 08:19 AM IST
डियर जिंदगी: किसी के साथ होने का अर्थ...

डियर जिंदगी: किसी के साथ होने का अर्थ...

अगर हम अपने कहे पर कायम हैं, तो यह बात अंतत: हमारे पक्ष में ही जाती है, क्‍योंकि ऐसा करके हम अपने समीप एक ऐसी दुनिया रच रहे हैं, तो एक-दूसरे के प्रति कृतज्ञ  है.

दयाशंकर मिश्र | Aug 9, 2018, 07:39 AM IST
डियर जिंदगी : यादों का डस्‍टबिन!

डियर जिंदगी : यादों का डस्‍टबिन!

हर बरस की अगर पांच-पांच बातें भी दिमाग में जमी रह गईं और आपकी उम्र कम से कम तीस-चालीस बरस है तो सोचिए कितनी यादें दिल, दिमाग और चेतन-अवचेतन मन पर अमरबेल की तरह पसरी हैं.

दयाशंकर मिश्र | Aug 8, 2018, 08:27 AM IST
नारियों के नरक निकेतन

नारियों के नरक निकेतन

जरूरत इस बात की है नारी निकतनों को जाल न बनाया जाए, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का आश्रय बनाया जाए. 

पीयूष बबेले | Aug 7, 2018, 05:03 PM IST
महिलाएं और ओपन जेल : तिहाड़ से उम्मीद की एक किरण

महिलाएं और ओपन जेल : तिहाड़ से उम्मीद की एक किरण

भारत की जेलों में इस समय करीब 17,000 महिलाएं कैद हैं. इनमें से करीब 6000 आजीवन कारावास पर हैं. देश में महिलाओं के लिए कुल 18 जेलें हैं और सिर्फ 4 जेलें खुली जेलें हैं.

वर्तिका नंदा | Aug 7, 2018, 02:09 PM IST
Opinion: बालिका गृह की लड़कियो, तुम्हारा 'वजूद' ही नहीं है...

Opinion: बालिका गृह की लड़कियो, तुम्हारा 'वजूद' ही नहीं है...

बालिका गृह में जिंदगी बिता रहीं लड़कियां, घर से भागी हुईं ये लड़कियां, किसी नशे में गिरफ्त ये लड़कियां या किसी की भूल समझे जाने पर यूं ही सड़क पर छोड़ दी गईं ये लड़कियां आसान शिकार इसलिए भी हैं, क्योंकि समाज में इनका कोई अस्तित्व नहीं है.

पंकज रामेंदु | Aug 7, 2018, 01:27 PM IST
डियर जिंदगी : सुखी होने को क्‍या चाहिए…

डियर जिंदगी : सुखी होने को क्‍या चाहिए…

भारत का सबसे बड़ा रोग यही है, ‘लोग क्‍या कहेंगे.’ जबकि लोग अक्‍सर कुछ नहीं कहते. जिसके पास आपके दुख में खड़े होने की शक्ति नहीं, उसके कहने से हम इतना क्‍यों डरते हैं.

दयाशंकर मिश्र | Aug 7, 2018, 07:46 AM IST
एससी/एसटी कानून- सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर संसद के यू-टर्न से संकट

एससी/एसटी कानून- सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर संसद के यू-टर्न से संकट

एससी/एसटी और तीन तलाक जैसे मामलों में कानून बनाने की तेजी दिखाने वाले राजनेता गर्वनेंस से जुड़े मुद्दों पर कानूनी बदलाव में टाल-मटोल करते रहते हैं.

विराग गुप्ता | Aug 6, 2018, 07:00 PM IST
भारत की निरंतरता और स्थिरता का नेहरू दर्शन नहीं समझ पाए नामवर

भारत की निरंतरता और स्थिरता का नेहरू दर्शन नहीं समझ पाए नामवर

प्राचीन विदेशी यात्रियों की किताबों में लिखे वर्णन शायद अतिरंजित और कल्पना पर आधारित ही अधिक लगते, अगर भारत की धरती से सदियों बाद उनके पुरातात्विक ढांचे न निकल आए होते, उन विवरणों से हूबहू मिलते.

आलोक श्रीवास्तव | Aug 6, 2018, 02:07 PM IST
डियर जिंदगी : ‘मैं' ही सही हूं!

डियर जिंदगी : ‘मैं' ही सही हूं!

कठोर होना है तो अपने प्रति होइए. उदार होना है तो दूसरों के प्रति. सारी समस्‍या की जड़ इस सरल नियम का उल्‍टा होते जाना है.

दयाशंकर मिश्र | Aug 6, 2018, 08:11 AM IST
शिवमंगल सिंह सुमन: कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

शिवमंगल सिंह सुमन: कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

सुमनजी लिखते तो अद्भुत थे ही, उससे अच्छा प्रस्तुत करते थे..उनकी भाषणकला बेहतर थी या लेखन कला तय कर पाना मुश्किल. दिखने में तो शुभ्रवस्त्रावृता थे ही साक्षात् वाणी पुत्र लगते थे. उनकी स्मृति को नमन...

जयराम शुक्ल | Aug 5, 2018, 03:46 PM IST
बिना राग की रग-रग जाने, अपनी ही राह बनाने वाले किशोर कुमार

बिना राग की रग-रग जाने, अपनी ही राह बनाने वाले किशोर कुमार

हर साल उनके जन्मदिन पर उनके गानों और उनके निजी जीवन के कई पलों की बात होती है. उनके मसखरेपन और उनके सनक वाले किस्से खूब सुनने को मिलते हैं. लेकिन किशोर कुमार का वह पहलू हमेशा पीछे छिप जाता है, जिसने उन्हें सिनेमा के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचा दिया.

रवि भदौरिया | Aug 4, 2018, 12:46 PM IST

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