ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी: अप्रिय की जुगाली!

डियर जिंदगी: अप्रिय की जुगाली!

हम अप्रिय चीजों में ऐसे उलझे रहते हैं कि जीवन में तनाव, बुरी यादों का अनजाने में संग्रह करते रहते हैं. अप्रिय की जुगाली एक लत की तरह मन को अस्‍वस्‍थ, खोखला करती रहती है

 

दयाशंकर मिश्र | Dec 11, 2018, 08:31 AM IST
डियर जिंदगी: शुक्रिया 2.0 !

डियर जिंदगी: शुक्रिया 2.0 !

बॉलीवुड जिस तरह की चीजें रचता है, उसमें ऐसी रचना की गुंजाइश नहीं होती. तीनों ‘खान’, अमिताभ बच्‍चन में ऐसा ‘लोहा’ नहीं है, जिस पर पांच सौ करोड़ का दांव वह भी पर्यावरण पर आधारित कथा के लिए लगाया जा सके! 

दयाशंकर मिश्र | Dec 10, 2018, 08:07 AM IST

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डियर जिंदगी: अप्रिय की जुगाली!

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हम अप्रिय चीजों में ऐसे उलझे रहते हैं कि जीवन में तनाव, बुरी यादों का अनजाने में संग्रह करते रहते हैं. अप्रिय की जुगाली एक लत की तरह मन को अस्‍वस्‍थ, खोखला करती रहती है

 

दयाशंकर मिश्र | Dec 11, 2018, 08:31 AM IST
डियर जिंदगी: शुक्रिया 2.0 !

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बॉलीवुड जिस तरह की चीजें रचता है, उसमें ऐसी रचना की गुंजाइश नहीं होती. तीनों ‘खान’, अमिताभ बच्‍चन में ऐसा ‘लोहा’ नहीं है, जिस पर पांच सौ करोड़ का दांव वह भी पर्यावरण पर आधारित कथा के लिए लगाया जा सके! 

दयाशंकर मिश्र | Dec 10, 2018, 08:07 AM IST
सिविल सेवकों का जनसेवक बनने का बढ़ता रुझान

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प्रशासकों द्वारा राजनीति के क्षेत्र में पदार्पण करना कोई नई बात नहीं है. प्रसिद्ध प्रशासक टीएन शेषन स्वयं इसमें और पराजित तथा निराश होकर चुपचाप बैठ गए. भारतीय विदेश सेवा के मणिशंकर अय्यर ने काफी नाम कमाया. 

डॉ. विजय अग्रवाल | Dec 8, 2018, 03:38 PM IST
लोकतंत्र की पीठ पर शनि की साढ़ेसाती

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तेलंगाना और राजस्थान में मतदान के साथ ही विधानसभा चुनाव 2018 संपन्न हो गया. चुनाव खत्म होते ही सभी प्रत्याशी ज्योतिष के संपर्क में पहुंचने लगे हैं, हालांकि उनके तकदीर का फैसला 11 दिसंबर को होगा.

जयराम शुक्ल | Dec 7, 2018, 07:38 PM IST
डियर जिंदगी: आनंद, उल्‍लास, रोमांच का रूठना!

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तकनीक, इंटरनेट ने हमें आनंद सुलभ कराने में मदद जरूर की है, लेकिन स्‍मार्टफोन ने उस आनंद में ही सेंध लगा दी. हम आनंद में सुखी होने की जगह तकनीक में उलझ गए. 

दयाशंकर मिश्र | Dec 7, 2018, 09:15 AM IST
बाबा साहब मानते थे कि गैरबराबरी दूर करने के लिए राज्य को सख्त कदम उठाने चाहिए

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भारतीय समाज में सदियों से मानवीय गरिमा का हनन होता आया है, जहां मनुष्य ही मनुष्य से घृणा रखे हुए है. ऐसे में उनका मानना था कि सामाजिक और आर्थिक असमानता एक राष्ट्र के तौर पर भारत को सशक्त नहीं बनाती हैं. 

डियर जिंदगी: खुशहाली के ख्‍वाब और 'रेगिस्‍तान'!

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जिंदगी को सारा अंतर इससे पड़ता है कि आपका चीजों के प्रति नजरिया कैसा है! आपका दृष्टिकोण ही सब कुछ है. इसलिए, उसे सहेजिए, संभालिए.

दयाशंकर मिश्र | Dec 6, 2018, 08:50 AM IST
डियर जिंदगी: आपका किला!

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अक्‍सर हम जिन चीजों से सहमत नहीं होते, उन्‍हें अनदेखा करते जाते हैं, हम उनसे खुद को बहुत दूर मानते हैं, जबकि सच्‍चाई कुछ और होती है.

दयाशंकर मिश्र | Dec 5, 2018, 08:11 AM IST
दर्द का पैगाम देती सड़कें

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आपाधापी,जनसंख्या वृद्धि और नित्यप्रति बढ़ते वाहनों ने जिन्दगी की परिभाषा ही बदल दी है. आज सीधा-सादा जीवन मुश्किलों से भरा हो गया है, आवश्यकताएं बढ़ती जा रही हैं.

रेखा गर्ग | Dec 4, 2018, 11:06 PM IST
विराट कोहली पर रहेगा टीम इंडिया का दारोमदार, ‘स्टार्क एंड कंपनी’ लेगी कड़ी परीक्षा

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विकेटकीपर व विस्फोटक बल्लेबाज ऋषभ पंत परिस्थितियों से घबराते नहीं हैं और खेल को दुश्मन की गली तक ले जाने के लिए मशहूर हैं. 

सुशील दोषी | Dec 4, 2018, 05:17 PM IST
डियर जिंदगी: पापा की चिट्ठी!

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हम बच्‍चों को उतनी आजादी भी नहीं दे रहे जो हमें अपने माता-पिता से विरासत में मिली थी. हमारी अपेक्षा का बोझ उनके कोमल मन को हर दिन कठोर, रूखा बना रहा है!

दयाशंकर मिश्र | Dec 4, 2018, 08:04 AM IST
गांधी@150: गांधी जी का राम मंदिर उनके मन में ही था

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आजकल ‘‘राम’’ चर्चा में हैं. राम नाम नहीं, बल्कि राम मंदिर की वजह से. क्या इसे राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ने की कोई जरूरत है? वैसे राम जन्मभूमि विवाद गांधीजी के समय भी जारी था. परन्तु उन्होंने कभी इस विषय पर टिप्पणी की हो ऐसा कोई प्रमाण संभवतः नहीं है. हां, वे बेझिझक रामराज्य की बात करते रहे और स्वराज की अपनी परिकल्पना को रामराज्य से ही परिभाषित भी करते रहे.

चिन्मय मिश्र | Dec 3, 2018, 05:09 PM IST
घने जंगलों के बीच भारत की तीसरी सबसे प्रदूषित दुनिया

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इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि क्या अब सिंगरौली पर और नए उद्योग लगाए जाने चाहिए, क्या यहां का पर्यावरण उसे बर्दाश्त कर सकता है.

पंकज रामेंदु | Dec 3, 2018, 05:00 PM IST
भोपाल गैस त्रासदी: आंसू सूख गए, पर न्याय नहीं मिला

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गैस कांड की बरसी अब केवल रस्म अदायगी भर हो गई है. हक और न्याय की आवाजें अब थकी हुई, निराशा से भरी नजर आती हैं.

डियर जिंदगी: स्थगित आत्‍महत्‍या की कहानी!

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आत्‍महत्‍या का विचार हमेशा स्‍थगित करने योग्‍य है . जीवन कितना भी मुश्किल क्‍यों न हो, वह हमेशा अद्भुत संभावना है. ऐसी यात्रा का संकेत, जिसका एक छोर तक हमारी नजर से दूर है! 

दयाशंकर मिश्र | Dec 3, 2018, 08:16 AM IST
प्रतीकों में पूज्य और धरातल पर धकियाया जाता पशु जगत

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वानर, गाय, सांप, हाथी और अन्य जानवरों की पूजा करने वाली सांस्कृतिक परम्परा और शहरी समाज के बेरूखे आचरण का विरोधाभास कब खत्म होगा.

विराग गुप्ता | Nov 30, 2018, 07:08 PM IST
मध्य प्रदेश चुनाव 2018: इस बार किसी ने नहीं कहा- 'एमपी में लहर है'

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पांच राज्यों में से तीन में जहां मतदान हो चुके हैं क्या कोई लहर थी? अब तक किसी भी मीडिया रिपोर्ट में या नेताओं के श्रीमुख से सुनने को नहीं मिला कि मध्यप्रदेश में कोई लहर थी. मतदाता खामोश है. कशमकश हर सीट में है. माई के लाल नाराज हैं. कुलजमा यही सुनने को मिला. 

जयराम शुक्ल | Nov 30, 2018, 09:10 AM IST
 डियर जिंदगी: सबके साथ होने का भ्रम!

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सबसे मिलना-जुलना, गप्‍पे हांकना सब मोबाइल की कोठरी में कैद हो गया है! सोशल मीडिया पर दूसरों के साथ होने का भ्रम धीरे-धीरे मनोरोग में बदल गया है.

दयाशंकर मिश्र | Nov 30, 2018, 07:52 AM IST
डियर जिंदगी: आत्‍महत्‍या से कुछ नहीं बदलता!

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घुटन के बुलबुले जो पहले आसानी से पकड़ में आ जाते थे, अब तभी नजर में आते हैं, जब उसकी 'खराश' दिल को छलनी कर देती है.

दयाशंकर मिश्र | Nov 29, 2018, 07:39 AM IST
हिमांशु जोशी: ऐसे भी किसी के मन को भला क्या छूना...

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हिमांशु जोशी के आज न रहने पर, जब मैं उनके बारे में सोच रहा हूं, तो बार-बार मेरा मन मुझसे एक ही सवाल कर रहा है, 'कहीं ऐसा तो नहीं कि एक लड़की की इस अनदेखे लेखक के प्रति दीवानगी ने ही तुम्हें लेखक बनने के लिए उकसाया था?'

डॉ. विजय अग्रवाल | Nov 28, 2018, 12:22 PM IST

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