ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी : साथ रहते हुए स्‍वतंत्र होना!

डियर जिंदगी : साथ रहते हुए स्‍वतंत्र होना!

जहां भाव से अधिक ‘समझ’ जमा हो जाती है, वहां रिश्‍तों में दरार की गुंजाइश बढ़ जाती है. रिश्‍तों के नाम भले वही हों, लेकिन उनके मिजाज, व्‍यवहार में जो ‘ताजी’ हवा आई है, उसके अनुकूल स्‍वयं को तैयार करना होगा.

दयाशंकर मिश्र | Oct 17, 2018, 10:19 AM IST
यानी बुनियादी सवाल पर मिला इस बार अर्थशास्त्र का नोबेल

यानी बुनियादी सवाल पर मिला इस बार अर्थशास्त्र का नोबेल

इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर. विलियम डी नोर्डहाउस और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल रोमर को साझेतौर पर मिला है. 

सुविज्ञा जैन | Oct 16, 2018, 10:43 PM IST

अन्य ज़ी स्पेशल

डियर जिंदगी : साथ रहते हुए स्‍वतंत्र होना!

डियर जिंदगी : साथ रहते हुए स्‍वतंत्र होना!

जहां भाव से अधिक ‘समझ’ जमा हो जाती है, वहां रिश्‍तों में दरार की गुंजाइश बढ़ जाती है. रिश्‍तों के नाम भले वही हों, लेकिन उनके मिजाज, व्‍यवहार में जो ‘ताजी’ हवा आई है, उसके अनुकूल स्‍वयं को तैयार करना होगा.

दयाशंकर मिश्र | Oct 17, 2018, 10:19 AM IST
यानी बुनियादी सवाल पर मिला इस बार अर्थशास्त्र का नोबेल

यानी बुनियादी सवाल पर मिला इस बार अर्थशास्त्र का नोबेल

इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर. विलियम डी नोर्डहाउस और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल रोमर को साझेतौर पर मिला है. 

सुविज्ञा जैन | Oct 16, 2018, 10:43 PM IST
विश्व खाद्य दिवस: क्या पेट भर राशन मिलना अब भी मुश्किल है

विश्व खाद्य दिवस: क्या पेट भर राशन मिलना अब भी मुश्किल है

रोजगार और आजीविका के संकट से जूझते समाज के लिए यह राशन कितना महत्वपूर्ण है. 

डियर जिंदगी : ‘आईना, मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे...’

डियर जिंदगी : ‘आईना, मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे...’

हम दो कदम आगे बढ़ते हैं, तो पीछे के उजालों को भूलने लगते हैं. यह पीछे छूटते उजाले धीरे-धीरे हमारी सूरत बदलने लगते हैं. एक दिन होता यह है कि आईना, हमारी हमारी शक्‍ल भूलने लगता है. पहली सी सूरत मांगने लगता है!

दयाशंकर मिश्र | Oct 16, 2018, 10:01 AM IST
श्रद्धांजलि अन्नपूर्णा देवी: मैहर के सुरबहार का यूं खामोश हो जाना

श्रद्धांजलि अन्नपूर्णा देवी: मैहर के सुरबहार का यूं खामोश हो जाना

अन्नपूर्णा देवी बाबा की बेटी से ज्यादा मां शारदा की वरद् पुत्री थीं. संगीत जगत में उनकी ख्याति सुरबहार की साधक के रूप में हुआ.

जयराम शुक्ल | Oct 15, 2018, 07:40 PM IST
यह कहानी पढ़िए और जनका के हौसले को करिए सलाम

यह कहानी पढ़िए और जनका के हौसले को करिए सलाम

आज 'इंटरनेशनल डे आफ रूरल वुमन' है. यूनाइटेड नेशन्स की ओर से यह दिन 2008 से हर साल ग्रामीण महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है. चलिए यही सही, इस बहाने कम से कम हम देश में ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष को याद तो कर ही लेते हैं.

डियर जिंदगी: अपेक्षा का कैक्टस और स्नेह का जंगल

डियर जिंदगी: अपेक्षा का कैक्टस और स्नेह का जंगल

बच्चों को होशियार, चतुर, 'चांद' पर जाने लायक बनाने की कोशिश में हम स्नेह की चूक कर रहे हैं, जो एक हरे-भरे, लहलहाते जीवन को सुखद आत्मीयता की जगह कहीं अधिक कैक्टस और कंटीली झाड़ियों से भर रही है.

दयाशंकर मिश्र | Oct 15, 2018, 09:11 AM IST
लोकतंत्र में बच्चों की आवाज सुना जाना सबसे जरूरी

लोकतंत्र में बच्चों की आवाज सुना जाना सबसे जरूरी

देश के चार राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं. इनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है. मध्यप्रदेश में इस चुनाव के संदर्भ में बच्चों की आवाज शामिल करने की एक साझा कोशिश की जा रही है. प्रदेश के तकरीबन 27 जिलों के पांच हजार बच्चों ने मिलकर अपना एक जनघोषणापत्र बनाया है और इसे सभी राजनैतिक दलों को सौंपा है.

युवा बिहारी आंत्रप्रेन्योर ही बिहार को बदलेंगे...

युवा बिहारी आंत्रप्रेन्योर ही बिहार को बदलेंगे...

हम जब तक बिहार की शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं करते हैं ये ठीक नहीं हो सकता है. काफी सारे लोग जॉब के लिए बाहर चले गए, क्योंकि उनके ज्ञान का यहां कोई इस्तेमाल नहीं था

राहुल कुमार | Oct 12, 2018, 05:36 PM IST
स्वामी साणंद: गंगा को तमाशा न बनाइए, खुद तमाशबीन न बनिए, प्रण लीजिए...

स्वामी साणंद: गंगा को तमाशा न बनाइए, खुद तमाशबीन न बनिए, प्रण लीजिए...

प्रोफेसर कहते थे कि उनके जीवन का मूल्य नहीं है, मूल्य गंगा का है. प्रोफेसर अब नहीं हैं, लेकिन गंगा अभी भी हैं. उन्हें अभी भी बचाया जा सकता है. वो नहीं बचीं, तो हम भी नहीं बचेंगे.

अजय पाण्डेय | Oct 12, 2018, 04:00 PM IST
स्वामी साणंद जैसे समर्पित लोगों का बलिदान ज़ाया नहीं जाना चाहिए

स्वामी साणंद जैसे समर्पित लोगों का बलिदान ज़ाया नहीं जाना चाहिए

जब स्वामी ज्ञानस्वरूप साणंद की मौत की खबर सुनी तो उनके यही वाक्य मेरे कान में गूंज गए जो उन्होंने उस दौरान हमसे कहे थे कि अब वो चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी बस प्राण निकलें.

पंकज रामेंदु | Oct 12, 2018, 03:15 PM IST
डियर जिंदगी : परवरिश की परीक्षा!

डियर जिंदगी : परवरिश की परीक्षा!

भारत में हर 13 में से एक व्यक्ति मानसिक बीमारी से पीड़ित है. अगले पांच बरस में यह अनुपात हर पांच में से एक व्यक्ति तक पहुंच सकता है.

दयाशंकर मिश्र | Oct 12, 2018, 09:41 AM IST
स्वामी साणंद किसके लिए मरे, हमारे लिए ही न...

स्वामी साणंद किसके लिए मरे, हमारे लिए ही न...

इस समय सारे पंच महाभूत क्षित, जल पावक, गगन और समीर संकट में हैं. स्वामी जी तो इनमें से सिर्फ एक, यानी जल यानी गंगा को बचाने में शहीद हो गए. आगे चलकर हम देखेंगे कि इस देश में बाकी पंच महाभूत को बचाने के भी आंदोलन होंगे. जो लोग ये आंदोलन करेंगे, वे हमारे दुश्मन नहीं, हमारे सबसे बड़े हितैषी होंगे.

पीयूष बबेले | Oct 11, 2018, 07:10 PM IST
 #MeToo: एमजे अकबर कब छोड़ेंगे सिंहासन...

#MeToo: एमजे अकबर कब छोड़ेंगे सिंहासन...

मेनका गांधी के मंत्रालय ने कानून मंत्रालय को लिखा है कि यौन उत्पीड़न की शिकायत किसी भी समय दर्ज कराने की व्यवस्था होनी चाहिए. केन्द्र सरकार के एक मंत्री के सख्त बयानों के बावजूद मी टू के आरोपी मंत्री एम.जे. अकबर की कुर्सी पर आंच क्यों नहीं आ रही?

विराग गुप्ता | Oct 11, 2018, 04:26 PM IST
‘बधाई हो गणेश हुआ है’

‘बधाई हो गणेश हुआ है’

कभी किसी घऱ में लड़के के पैदा होने पर ‘बधाई हो गणेश’ हुआ है सुनने का नहीं मिला. वहां बधाई हो लड़का हुआ है ही बोला जाता है. 

पंकज रामेंदु | Oct 11, 2018, 03:10 PM IST
डियर जिंदगी : कितने उदार हैं, हम!

डियर जिंदगी : कितने उदार हैं, हम!

अपने बच्चों के ही मन की बात को समझ पाना. उनके सपनों को पढ़ सकना, अरमां की गहराई तक जा पाना जो आप पर निर्भर हैं, मुश्किल काम नहीं, बस अपनी ख्‍वाहिश उन पर थोपने से मुक्‍त हो जाइए.

दयाशंकर मिश्र | Oct 11, 2018, 10:20 AM IST
#Gandhi150: गांधी जी को संसदीय लोकतंत्र तो चाहिए था, लेकिन सत्य और अहिंसा की कीमत पर नहीं

#Gandhi150: गांधी जी को संसदीय लोकतंत्र तो चाहिए था, लेकिन सत्य और अहिंसा की कीमत पर नहीं

 संसदीय लोकतंत्र की शुद्धि के लिए गांधी जी का शस्त्र अप्रतिम एवं बेहद मारक है. वे आजादी पूर्व जिस तरह से तंत्र से निपटने का रास्ता बता रहे थे, वह आज भी उनका ही सार्थक है.

चिन्मय मिश्र | Oct 10, 2018, 06:57 PM IST
शेखर कपूर: पानी चंद मुट्ठियों में सिमट गया है...

शेखर कपूर: पानी चंद मुट्ठियों में सिमट गया है...

घर के पास साफ पानी के न होने से महिलाओं और लड़कियों की जिंदगी पर बुरी तरह असर पड़ता है जिनमें से कई तो लंबी दूरी और प्रदूषित स्रोत से पानी लाने के बोझ तले दबती चली जाती हैं.

शेखर कपूर | Oct 10, 2018, 06:29 PM IST
'मंटो' के बहाने आज की कुछ बातें

'मंटो' के बहाने आज की कुछ बातें

पिछले एक दशक से बायोपिक फिल्मों की जैसे बाढ़-सी आ गई है. 'डर्टी पिक्चर' से शुरूआत हुई यह यात्रा बहुत तेजी के साथ गतिशील है. यह बात अलग है कि इसके लिए जिन लोगों की जीवनी को आधार बनाया जा रहा है, उसमें अभी खिलाड़ियों की जीवनियां नम्बर वन पर हैं. 

डॉ. विजय अग्रवाल | Oct 10, 2018, 06:16 PM IST
डियर जिंदगी : दुख रास्‍ता है, रुकने की जगह नहीं…

डियर जिंदगी : दुख रास्‍ता है, रुकने की जगह नहीं…

आंसू तो एक प्रकार की सफाई हैं. वह मन में जमे दुख के मैल को आसानी से डिटर्जेंट की तरह निकाल देते हैं. इसलिए आंसुओं से नहीं डरना है, बल्कि इसकी चिंता करनी हैं कि कहीं आंसू निकलने बंद ही न हो जाएं.

दयाशंकर मिश्र | Oct 10, 2018, 09:04 AM IST

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