अमेरिका ने मुंह मोड़ा तो पाकिस्तान के प्रति पसीजा चीन का कलेजा, देगा वित्तीय पैकेज

पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने मंगलवार को कहा कि चीन ने सहायता पैकेज के जरिये देश की वित्तीय समस्या को दूर करने में उच्चस्तरीय मदद करने का वादा किया है.

अमेरिका ने मुंह मोड़ा तो पाकिस्तान के प्रति पसीजा चीन का कलेजा, देगा वित्तीय पैकेज
चीन दौरे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी.
Play

इस्लामाबाद: डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई वाली मौजूदा अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तान को मिलने वाले आर्थिक पैकेज पर रोक लगाई तो पड़ोसी चीन उसकी मदद को आगे आया है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने मंगलवार को कहा कि चीन ने सहायता पैकेज के जरिये देश की वित्तीय समस्या को दूर करने में उच्चस्तरीय मदद करने का वादा किया है. प्रधानमंत्री इमरान खान की हाल ही में संपन्न हुई चीन यात्रा के बारे में उमर ने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ मीडिया को जानकारी दी. दोनों ही मंत्री चीन गए प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे. उमर ने कहा कि चीन के द्वारा जताई गई प्रतिबद्धता के बाद पाकिस्तान के भुगतान संतुलन का मुद्दा प्रभावी तरीके से सुलझ गया है.

पाकिस्तान के प्रति नाराजगी जाहिर कर चुके हैं ट्रंप
इसी साल जुलाई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि उसने गत 15 वर्षों में 33 अरब डॉलर की सहायता के बदले अमेरिका को 'झूठ और धोखे' के सिवा कुछ भी नहीं दिया है. ट्रंप ने साथ ही यह भी कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवादियों को 'सुरक्षित पनाहगाह' मुहैया करायी. पाकिस्तान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े हमले में ट्रंप यह संकेत देते हुए प्रतीत हुए कि वह पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता रोक सकते हैं. 

ट्रंप ने कड़े शब्दों वाले ट्वीट में कहा था, "अमेरिका ने मूर्खतापूर्ण तरीके से पाकिस्तान को गत 15 वर्षों में 33 अरब डॉलर से अधिक की सहायता दी और उन्होंने हमारे नेताओं को मूर्ख सोचते हुए हमें ‘झूठ और धोखे’ के अलावा कुछ भी नहीं दिया.'' उन्होंने इस वर्ष के अपने पहले ट्वीट में कहा, 'उन्होंने उन आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करायी जिनके खिलाफ हम बहुत कम मदद के अफगानिस्तान में कार्रवाई करते हैं. अब और नहीं.'

अमेरिका ने IMF से मिलने वाले कर्ज पर भी लगाई थी लगाम
इसी साल अगस्त में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) से आग्रह किया है कि वह पाकिस्तान की नई सरकार को भी किसी प्रकार का कर्ज न दे. उसने चीन के ऋणदाताओं को भुगतान के लिए किसी संभावित राहत पैकेज की मंजूरी के प्रति आगाह किया. चीन के बैंक चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए धन दे रहे हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा कि कोई गलती नहीं होनी चाहिए. आईएमएफ जो करेगा उस पर हमारी निगाह है. मीडिया में इस तरह की खबरें आई हैं कि पाकिस्तान आईएमएफ से 12 अरब डॉलर का भारी भरकम पैकेज चाहता है. पॉम्पियो से इसी बारे में पूछा गया था.

चरमरा गई है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
पैसों की कमी के चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पिछले छह साल में पहली बार सुस्त पड़ी है. इस वित्त वर्ष में इसकी वृद्धि 5.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. वहीं, साल की शुरुआत में इसके 6.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था. अगर आर्थिक वृद्धि दर कमजोर पड़ती है तो पाकिस्तान कई साल पीछे जा सकता है. सरकार ने अर्थव्यवस्था ने कहा है कि राजकोषीय दबाव और कृषि एवं निर्माण क्षेत्र में मंदी के कारण वृद्धि पर असर दिखता है. इससे पहले आईएमएफ ने भी आर्थिक वृद्धि अनुमान को घटाकर 4.7 फीसदी किया था.

सिर्फ 10 हफ्ते तक का भंडार
पाकिस्तान के पास जितनी विदेशी मुद्रा है, वो ज्यादा से ज्यादा 10 हफ्तों तक के आयात के बराबर है. विदेशों में नौकरी कर रहे पाकिस्तानी देश में जो पैसे भेजते थे, उसमें भी गिरावट आई है. इसके साथ ही पाकिस्तान का आयात बढ़ा है. चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर में लगी कंपनियों को भारी भुगतान के कारण भी विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो रहा है.

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close