close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

झारखंड: 15 दिनों से हड़ताल पर हैं आंगनबाड़ी के कर्मचारी, विशाल जनसभा कर तय की जाएगी रणनीति

आज पूरे राज्य भर के हजारों हजार की संख्या में सेविका सहायिका आज हरमू मैदान में विशाल जनसभा किया. वहीं, आज इस सभा में आगे की रणनीति तय की जाएगी और अनिचितकालिन हड़ताल जारी रहेगा.

झारखंड: 15 दिनों से हड़ताल पर हैं आंगनबाड़ी के कर्मचारी, विशाल जनसभा कर तय की जाएगी रणनीति
आज इस सभा में आगे की रणनीति तय की जाएगी और अनिचितकालिन हड़ताल जारी रहेगा.

रांची: झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन कर्मचारी संघ ने आज नौ सूत्री मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन करते आ रहे हैं. लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. आज पूरे राज्य भर के हजारों हजार की संख्या में सेविका सहायिका आज हरमू मैदान में विशाल जनसभा किया. वहीं, आज इस सभा में आगे की रणनीति तय की जाएगी और अनिचितकालिन हड़ताल जारी रहेगा.

महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के द्वारा कई बार लिखित समझौता होने के बाद भी इनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया इसलिए 16 अगस्त से अपनी नौ सूत्री मांगो को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है. आज 16 दिन हो गए और इस हड़ताल को कर रहे आंगनवाड़ी वर्कर्स का मांग है कि इससे विकास सहायिका का नियमावली बनाया जाए और सहायिका को तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए साथ ही मानदेय नहीं वेतन दिया जाए.

 

उनकी मांग हा कि आंगनबाड़ी सेविका को 18 हजार और सहायिका को 9000 रुपया दिया जाए. साथ ही समान काम के बदले समान वेतन लागू किया जाए. साथ ही उनकी मांग है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक लाभ, एक मुश्त पांच लाख रूपये का पेंशन लागू किया जाए. इन सभी विभिन्न मांगो को जब तक सरकार पूरी नहीं करेगी तब तक हड़ताल जारी रहेगा.

आज के आंदोलन के बाद राज्यभर में जुटी हुई सभी सेविका सहायिका हजारों की संख्या में आज इस सभा के माध्यम से निर्णय लिया जाएगा आंदोलन को कैसे धारदार बनाया जाए ताकि राज्य सरकार की सभी योजनाओं में सेविका सहायिका की अहम भूमिका होती है और लोगों तक इसका लाभ मिलता है. अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद आज 16 दिन भी पूरे राज्य भर के आंगनबाड़ी में ताला लटका हुआ है और सेविका सहायिका अपनी मांग को लेकर डटी है लेकिन कोई सूध लेने वाला नहीं है.

बहरहाल अब यह देखना होगा कि आखिरकार इनकी मांगों पर सरकार कितना ध्यान देती है या फिर ऐसे ही आंदोलन जारी रहेगा ये देखने वाली बात होगी.