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बिहार : कहीं बाढ़, कहीं सुखाड़, बेगूसराय में किसान कम बारिश से परेशान

बेगूसराय के किसानों की त्रासदी है कि जुलाई महीना बीत रहा है, लेकिन अब तक आवश्यकता से 55 फीसदी से भी कम बारिश हुई है.

बिहार : कहीं बाढ़, कहीं सुखाड़, बेगूसराय में किसान कम बारिश से परेशान
बेगूसराय में किसान कम बारिश से परेशान.

बेगूसराय : बिहार में इन दिनों प्रकृति का अजीब नजारा देखने को मिल रहा है. कहीं पानी ही पानी, तो कंही पानी बिन लोग तड़प रहे हैं. यानी प्रदेश के 12 जिलों के लोग जहां बाढ़ के पानी से त्रस्त हैं वहीं, शेष जिले में सूखे से किसानों का शरीर सूख रहा है. ये चिंतित हैं कि अब करें तो क्या करें? इन्हीं जिलों में शामिल है बिहार का कृषि प्रधान जिला बेगूसराय.

बेगूसराय के किसानों की त्रासदी है कि जुलाई महीना बीत रहा है, लेकिन अब तक आवश्यकता से 55 फीसदी से भी कम बारिश हुई है. किसानों के सामने भीषण संकट पैदा हो गया है. ये अपने खेत में न तो धान का बिचड़ा डाल पाएं हैं और न ही मक्के की बुआई.

वर्तमान के आकड़ों पर अगर गौर करें तो धान के उत्पादन का लक्ष्य 1000 हेक्टेयर में है, जबकि पानी नहीं मिलने के कारण मात्र 218.5 हेक्टेयर में बिचड़ा डाला जा सका है. धान की रोपनी का लक्ष्य 10 हजार हेक्टेयर था, लेकिन 242 हेक्टेयर. मक्के का लक्ष्य 64 हजार हेक्टेयर था, लेकिन 29 हजार हेक्टेयर में ही बुआई किया गया. हालात यह है कि न्यूनतम पानी में उत्पादित होने वाले सोयाबीन का लक्ष्य 35 हजार हेक्टेयर था, लेकिन 19,998 हेक्टेयर में ही हो पाया. कुल मिलाकर खरीफ फसल का 1,10,275 हेक्टेयर में खेती होनी थी, लेकिन अब तक मात्र 50426.75 हेक्टेयर में ही संभव सका है.

किसानों की समस्या है कि न तो धान का बिचड़ा दे पाए और न ही सोयाबीन और मक्का की खेती कर पाए. उन्होंने अपने खेत को तैयार कर रखा था कि वर्षा होगी उसके बाद खेत में बीज डालेंगे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया. जून महीना में बरसात नहीं होने और जुलाई में हल्की बारिश होने के कारण किसानों को काफी समस्या से जूझना पड़ा. धान का बिचड़ा झुलस गया.

अगर मौसम का मिजाज इसी कदर जारी रहा तो अन्नदाता के सामने बड़ी कठिनाई पैदा हो जाएगी. इधर, बिहार सरकार के स्टेट ट्यूबवेल का भी हालत खराब है. इसके कारण सिंचाई करना संभव नहीं हो सका है. जिले में करीब-करीब सभी स्टेट बोरिंग मरणासन्न में हैं.

बेगूसराय के जिला कृषि पदाधिकारी कहते हैं कि जून में सिर्फ 29% बारिश हुई थी, लेकिन जुलाई में अच्छी बारिश हुई है. इसलिए खेतों में नमी आ जाने के कारण धान को छोड़कर सोयाबीन और मक्के की खेती किसानों ने शुरू किया है. उन्होंने कहा कि आगे बारिश नहीं भी होती है तो यहां के किसान के साथ वैसी समस्या नहीं है. लगभग सभी किसानों के पास बोरिंग है.