बिहार में किसानों ने नहीं दी पीएम की रैली के लिए जमीन, सभा स्थल बदला

अपनी कच्चे फसल को काटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के लिए मंच बनाने का विरोध कर रहे किसानों के आगे झुकते हुए जिला प्रशासन ने सभा स्थल को बदलने की घोषणा की है। जिला प्रशासन द्वारा मुआवजा देने के आश्वासन के बावजूद किसान इस बात पर अड़े रहे कि पीएम की सभा के लिए अपनी कच्ची फसल कुर्बान कर जमीन नहीं देंगे। किसानों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के समय भी पीएम की सभा के लिए फसल का मुआवजा देने की बात कहकर जिला प्रशासन ने फसल को नष्ट कर दिया था लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला। 

बिहार में किसानों ने नहीं दी पीएम की रैली के लिए जमीन, सभा स्थल बदला

पटना : अपनी कच्चे फसल को काटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के लिए मंच बनाने का विरोध कर रहे किसानों के आगे झुकते हुए जिला प्रशासन ने सभा स्थल को बदलने की घोषणा की है। जिला प्रशासन द्वारा मुआवजा देने के आश्वासन के बावजूद किसान इस बात पर अड़े रहे कि पीएम की सभा के लिए अपनी कच्ची फसल कुर्बान कर जमीन नहीं देंगे। किसानों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के समय भी पीएम की सभा के लिए फसल का मुआवजा देने की बात कहकर जिला प्रशासन ने फसल को नष्ट कर दिया था लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिहार के वैशाली स्थित सुल्तानपुर में होने वाली एक रैली के आयोजन स्थल को लेकर विवाद सामने आया है। रैली के लिए पहले से तय जमीन पर से किसानों द्वारा फसल काटने से इनकार करने के बाद इसका आयोजन स्थल बदल दिया गया. सुल्तानपुर गांव के किसानों ने करीब 60 एकड़ में लगी कच्ची फसल को काटने से इंकार कर दिया है। जिला प्रशासन के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी अब सुल्तानपुर के बजाय छौकिया में लोगों को संबोधित करेंगे।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी 12 मार्च को बिहार आने वाले हैं। इस दौरान वह पटना उच्च न्यायालय के शताब्दी वर्ष समापन समारोह में भाग लेने के बाद वैशाली जिले के हाजीपुर में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे।
 
किसानों के विरोध के बाद जिलाधिकारी रचना पाटील और एसपी वैशाली राकेश कुमार ने अन्य विकल्प की तलाश में गंगा ब्रिज थाना क्षेत्र के तेरसिया गांव स्थित पाया नंबर एक के निकट स्थान चिह्नित किया है जहां किसानों ने बगैर मुआवजा के जमीन देने पर सहमति व्यक्त की है। विदित हो कि पहले जिला प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्र में नाइपर के निकट सभा होने की घोषणा की थी और किसानों ने फसल नष्ट कर अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया था।