नवरात्रि दूसरा दिन: आज होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए विधि..

Second Day of Navratri: हाथ में कमण्डल और स्फटिक की माला धारण करने वाली देवी श्वेत वस्त्र पहनती हैं जो स्वच्छता, सौंदर्य और शुचिता पूर्ण बुद्धि और हृदय के प्रतीक हैं. तप और साधना देवी की प्रवृत्ति है जो यह बताती है कि मानव समाज को तपस्वी जीवन जीना चाहिए.

नवरात्रि दूसरा दिन: आज होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए विधि..
आज होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Patna: आज शारदीय नवरात्र का दूसरा दिन है. इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है. मा के नाम में छुपे 'ब्रह्म' का अर्थ है 'तपस्या' और 'चारिणी' का अर्थ है 'आचरण करने वाली.' 

शिवपुराण और रामचरितमानस में लिखा है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए एक हजार वर्षों तक फलों का सेवन कर और फिर बाद में तीन हजार वर्षों तक पेड़ों की पत्तियां खाकर तपस्या की. मां की इसी कठिन तपस्या के कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ गया.

हाथ में कमण्डल और स्फटिक की माला धारण करने वाली देवी श्वेत वस्त्र पहनती हैं जो स्वच्छता, सौंदर्य और शुचिता पूर्ण बुद्धि और हृदय के प्रतीक हैं. तप और साधना देवी की प्रवृत्ति है जो यह बताती है कि मानव समाज को तपस्वी जीवन जीना चाहिए, जिसमें कर्म प्रधान है और श्रम और एकाग्रता ही सफलता के मूल हैं.

भक्तों को देती हैं मनचाहा वरदान
मां का यह रूप भक्तों को मनचाहे वरदान का आशीर्वाद देता है. कहा जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से  मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है.

ऐसे करें देवी की पूजा

  • देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और प्रार्थना करें. 
  • इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें.
  • इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें 
  • 'दधानां करपद्याभ्यामक्षमालाकमण्डल. देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्माचारिण्यनुत्तमा'
  • मां को चीनी का भोग चढ़ाए. 
  • प्रसाद के बाद पान सुपारी भेंट करें. 
  • प्रदक्षिणा करें यानी 3 बार अपनी ही जगह खड़े होकर घूमें. 
  • देवी की कथा पढ़ें
  • इसके बाद घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें.
  • इन सबके बाद क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांट दें.

मां ब्रह्मचारिणी की कथा
मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था. नारदजी की सलाह पर उन्होंने कठोर तप किया, ताकि वे भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें. कठोर तप के कारण उनका ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी नाम पड़ा. भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने 1000 वर्ष तक केवल फल-फूल खाए तथा 3000 वर्ष तक शाक खाकर जीवित रहीं. कठोर तप से उनका शरीर क्षीण हो गया. उनक तप देखकर सभी देवता, ऋषि-मुनि अत्यंत प्रभावित हुए. उन्होंने कहा कि आपके जैसा तक कोई नहीं कर सकता है. आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगा. भगवान शिव आपको पति स्वरूप में प्राप्त होंगे.

 

मां ब्रह्माचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता 
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता 
ब्रह्मा जी के मन भाती हो
ज्ञान सभी को सिखलाती हो
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा
जिसको जपे सकल संसारा
जय गायत्री वेद की माता
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता
कमी कोई रहने न पाए
कोई भी दुख सहने न पाए
उसकी विरति रहे ठिकाने
जो ​तेरी महिमा को जाने
रुद्राक्ष की माला ले कर
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर
आलस छोड़ करे गुणगाना
मां तुम उसको सुख पहुंचाना
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम
पूर्ण करो सब मेरे काम
भक्त तेरे चरणों का पुजारी
रखना लाज मेरी महतारी