नाबालिग बच्चियों को अवैध रूप से तमिलनाडु ले जा रही कंपनियां, पूर्व MLA ने किया भंडाफोड़

सबसे खास बात यह है की इन लड़कियों में कुछ लडकियों की उम्र 15 से लेकर 17 साल की थी. यानि की नाबालिग बच्चियों को भी दुसरे राज्य की निजी कम्पनियां अपने यहां काम दिलाने के लिए बहला फुसला कर ले जा रही हैं.

नाबालिग बच्चियों को अवैध रूप से तमिलनाडु ले जा रही कंपनियां, पूर्व MLA ने किया भंडाफोड़
नाबालिग बच्चियों को अवैध रूप से तमिलनाडू ले जा रही कंपनियां, पूर्व MLA ने किया भंडाफोड़.

चक्रधरपुर: कोरोना संकट काल अभी टला नहीं है, लेकिन झारखण्ड से मजदूरों का बड़े पैमाने पर गैरकानूनी तरीके से पलायन जारी है. कोरोना संकट काल में दुसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को वापस लाने में झारखण्ड सरकार ने ही पहल कर देश दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था. लेकिन अब वापस रोजगार की तलाश में दुसरे राज्य जा रहे मजदूरों को रोक पाने में भी सरकार नाकाम है.

चक्रधरपुर में एक बार फिर से मजदूरों से भरी तमिनाडु की बस पकड़ी गई है. इस बस में चक्रधरपुर और गिरिडीह के दो दर्जन से भी ज्यादा मजदूर सवार थे. चक्रधरपुर के जो मजदुर बस में सवार होकर तमिलनाडु जा रहे थे, उसमें सभी की सभी लड़कियां थीं. 

नाबालिग बच्चियां जा रही हैं दूसरे राज्य
सबसे खास बात यह है की इन लड़कियों में कुछ लडकियों की उम्र 15 से लेकर 17 साल की थी. यानि की नाबालिग बच्चियों को भी दुसरे राज्य की निजी कम्पनियां अपने यहां काम दिलाने के लिए बहला फुसला कर ले जा रही हैं.

इन नाबालिग बच्चियों समेत सभी महिला पुरुष मजदूरों को लाने के लिए तमिलनाडु की कंपनी ने बकायादा बस भेजी थी. हैरानी की बात यह भी है कि इन बस मालिकों के पास झारखंड में प्रवेश कर मजदूरों को ले जाने का कोई वैधानिक पास भी नहीं है. इसके बावजूद ये बस धड़ल्ले से झारखण्ड में घुसकर यहां की नाबालिग समेत सभी मजदूरों को मजदूरी के लिए दूसरे राज्य ले जा रहे हैं.

बच्चियों को बाल मजदूरी अपराध का भी नहीं है बोध
नाबालिग बच्चियों को तो पता ही नहीं कि उन्हें बाल मजदूरी की इजाजत नहीं है. सरकार के नियम कानून भला ये कैसे समझें. सरकार ने स्कुल में पढने वाली इन बच्चियों के अधिकार के लिए क्या क्या कानून बनाएं हैं. इनके जीवन रक्षण के लिए क्या क्या भावी योजना सरकार चला रही है, इसकी भी जानकारी ना तो इन्हें है और ना ही इनके परिवार को. 

मानव तस्कर और दुसरे राज्य की निजी कंपनियां ऐसे नाबालिगों को बहला फुसला कर शहर के चकाचौंध का सब्जबाग दिखाकर इन्हें फांसती हैं और इनका बचपन छीन इनसे बाल मजदूरी करवाती हैं. 

बिना रजिस्ट्रेशन चालू था मानव तस्करी का यह काम
मजदूरों से बात करने पर पता चला की मजदूरों ने अबतक दुसरे राज्य में मजदूरी करने के लिए जाने से पहले अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है. जबकि सरकार का साफ़ आदेश है की बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी मजदुर को काम करने के लिए बाहर जाने ना दिया जाए. 

मजदूरों का कहना है कि उन्हें झारखण्ड में काम नहीं मिल रहा है, घर में भुखमरी के हालात हैं. दुसरे राज्यों में काम पैसा और रहने खाने की पूरी सुविधा दी जा रही है. इसलिए वे झारखंड छोड़ दोबारा दूसरे राज्य में जाने को मजबूर हैं.

पूर्व विधायक थाने ले गए मजदूरों से भरी बस
चक्रधरपुर के पूर्व विधायक शशिभूषण सामड ने कोल्हान कोरोना रिलीफ टीम की अगुवाई करते हुए इस बस को पकड़ा है. इसमें से जब नाबालिग बच्चियों को भी मजदुर बनाकर दुसरे राज्य ले जाने का मामला सामने आया तो पूर्व विधायक हैरान परेशान हो गए. 

पूर्व विधायक थाने में मजदूरों से भरी बस ले गए. थाना के तरफ से जवाब मिला कार्रवाई चक्रधरपुर के सीओ साहब करेंगे. सीओ साहब को फोन लगाया गया तो सीओ ने कहा मामले में कार्रवाई थाना पुलिस करेगी. विधायक ने कहा कि यहां मजदूरों की रक्षा के लिए कोई काम नहीं कर रहा है. सब एकदूसरे पर काम थोपने में लगे हैं.

एक दूसरे पर काम थोपने में लगे हैं नेता-अधिकारी
पूर्व विधायक शशिभूषण सामड ने नाबालिगों का रेस्क्यू कर उन्हें वापस घर भेजने का इंतजाम कराया और उनकी समस्या को दूर करने का भरोसा दिया. उन्होंने कहा की राज्य के सीएम हेमंत सोरेन को ये तस्वीर भी देखनी चाहिए कि उनकी निकम्मी सरकार और प्रशासन के कारण आज नाबालिगों का दुसरे राज्यों में सौदा हो रहा है. 

कोरोना संकट काल में झारखंड में ही मजदूरों को काम देने का दम भरने वाली हेमंत सरकार राज्य से गैर कानूनी तरीके से बाहर जा रहे मजदूरों को रोक तक नहीं पा रही है. 

पूर्व विधायक ने कहा कि वे इसकी विस्तृत जानकारी जिले के डीसी और मुख्यमंत्री को देंगे ताकि जल्द से जल्द मजदूरों को झांसा देकर बाहर ले जाने वाले कंपनियों पर कार्रवाई और यहां के मजदूरों का भविष्य सुरक्षित हो.