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बिहार: जमुई में विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा, चिराग पासवान को टक्कर देना आसान नहीं

 पांच साल तक यहां विकास की बात होती है, लेकिन अंत कुनबे की राजनीति पर हो रही है. इस बार भी कोई पुरानी अवधारणा ध्वस्त होने वाली नहीं है. कई विकास मॉडल को आजमाए जाने हैं. 

बिहार: जमुई में विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा, चिराग पासवान को टक्कर देना आसान नहीं
2014 में एनडीए का सिंचाई की समस्या, ट्रेनों के ठहराव, स्टेशनों के सौंदर्यीकरण का मुद्दा था. (फाइल फोटो)

जमुई: बिहार के जमुई लोकसभा क्षेत्र का चुनाव कई मायनों में अलग है. पांच साल तक यहां विकास की बात होती है, लेकिन अंत कुनबे की राजनीति पर हो रही है. इस बार भी कोई पुरानी अवधारणा ध्वस्त होने वाली नहीं है. कई विकास मॉडल को आजमाए जाने हैं. राजनीतिक गलियारे से लेकर विकास मॉडल की चर्चा शहर की सड़कों से गांव की गलियारे तक शुरू हो गई है. एनडीए से चिराग पासवान प्रत्याशी तय है जो वर्तमान सांसद भी हैं. 

वहीं, दूसरी ओर महागठबंधन ने भूदेव चौधरी को आरएलएसपी की सीट से चुनावी मैदान में उतारा है जो वर्ष 2009 में जेडीयू की सीट से जमुई लोकसभा के सांसद रह चुके हैं. लोकसभा चुनाव 2019 का मुकाबला यहां एलएजपी और यूपीए के घटक दल के बीच ही होगा. आरएलएसपी के खाते में जमुई सीट चले जाने से आरजेडी का पूर्ण समर्थन मिलेगा या नहीं इस पर भी संशय बरकरार है. 

जिले के चकाई व जमुई विधानसभा पर आरजेडी का कब्जा है तो सिकंदरा से कांग्रेस के विधायक हैं. 2014 में एनडीए का सिंचाई की समस्या, ट्रेनों के ठहराव, स्टेशनों के सौंदर्यीकरण में सुविधा विस्तार मुद्दा था. इन्हीं सब पर विकास का मुद्दा लेकर एनडीए इस बार चुनावी मैदान में उतरी है. हालांकि कुछ काम भी किए गए हैं. लेकिन असली फैसला तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही सामने आएंगे की जनता ने किसका साथ दिया है.

सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए 35 साल से एक ही मुद्दा बरकरार बरनार जलाशय योजना पिछले 35 वर्षों से चुनावी मुद्दा है. सभी चुनाव में जलाशय निर्माण मुद्दा रहा. इसके पूर्व मुंगेर लोकसभा के अंश क्षेत्र होने के दौरान तत्कालीन सांसद जयप्रकाश ने इसको मुद्दा बनाया था. वर्तमान सांसद चिराग इसके लिए 1138 एकड़ जमीन वन विभाग को स्थानांतरित करने को जलाशय निर्माण की बढ़ती कड़ी बता रहे हैं.

जमुई संसदीय क्षेत्र में 22% सवर्ण और 18 % यादव मतदाता हैं. संसदीय क्षेत्र में अति पिछड़े मतदाताओं की संख्या 20 प्रतिशत और महादलित मतदाता भी 20 प्रतिशत हैं. 6 प्रतिशत अल्पसंख्यक मतदाता भी परिणाम बदलने में अहम योगदान रखते हैं. वहीं अन्य बचे मतदाताओं का दल भी कभी-कभी चुनाव परिणाम बदलने में भारी पड़ जाता है.

एनडीए से वर्ष 2009 में भूदेव चौधरी सांसद बने थे. उस वक्त इनके उपर लापता सांसद का आरोप भी लगा था. आम जनता इन्हें देखने को तरस गई थी और इनके लिए कई जगह लापता सांसद का बैनर-पोस्टर भी लगाया गया था. अब वर्ष 2019 में ये महागठबंधन के आरएलएसपी प्रत्याशी बनकर एनडीए के एलजेपी प्रत्याशी चिराग पासवान को टक्कर देने मैदान में उतरे हैं. 

2009 के चुनाव में जेडीयूके भूदेव चौधरी ने राजद के श्याम रजक को पराजित किया था. इस चुनाव में भूदेव चौधरी को 178560, श्याम रजक को 148763 मत मिले थे. 2014 के चुनाव में एनडीए से लोजपा के चिराग पासवान को 285354 मत प्राप्त हुआ. प्रतिद्वंदी आरजेडी के सुधांशु शेखर भास्कर को 199407 मत हासिल हुआ था.

फिलहाल यहां रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण को लेकर कार्य चल रहा है, जमुई रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म का विस्तार किया जा रहा है. वहीं, झाझा रेलवे स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज का भी शिलान्यास किया गया. केंद्रीय विद्यालय खोला जाना, झाझा से बटिया तक 20 किलोमीटर नई रेल लाइन का शिलान्यास, मेडिकल कॉलेज और केंद्रीय विद्यालय का एनडीए प्रत्याशी वोट मांगने में इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि महागठबंधन के प्रत्याशी इसे महज एक छलावा बता रहे हैं. देखने वाली बात होगी कि जनता इस बार किसे चुनती है. (रिपोर्ट: मनीष)