आप ने 26 मई को पार्टी की प्रदेश इकाईयों के संयोजकों और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है.
लोकसभा चुनाव 2019 की मतगणना के चलते यातायात पुलिस ने दिल्ली के द्वारका इलाके में कुछ मार्गों में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया है. यह प्रतिबंध 23 मई की सुबह 4 बजे से लागू होगा.
इस लोकसभा चुनाव परिणाम (Lok sabha chunav results 2019) से अगले पांच साल के लिए भारत का भविष्य तय होगा. ऐसे में देशवासियों के जेहन में सवाल उठना लाजमी है कि इस अहम मौके पर वे कहां से वोटों की गिनती से लेकर चुनाव परिणाम की सटीक जानकारी हासिल करें. आइए जानते हैं कि आप मतगणना के दिन कहां सटीक जानकारी हासिल कर सकते हैं.
'सितारे आसमान में अच्छे लगते हैं, जमीन पर कार्यकर्ता ही अच्छे लगते हैं'- सुनील जाखड़
लोकसभा चुनाव 2019 अपने अंतिम पड़ाव पर है. 23 मई को नतीजे सामने आने के बाद यह साफ हो जाएगा कि अगले पांच साल देश की बागड़ोर किसके पास रहेगी.
लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार अभियान के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को ढाल बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोल रहे हैं.
लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने में अब महज सात दिन शेष रह गए हैं. सात दिन बाद स्पष्ट हो जाएगा कि इस चुनाव में मतदाताओं ने देश की सत्ता किस दल को सौंपी है. फिलहाल, बात उस दौर की, जब बीजेपी की इंडिया शाइनिंग मुहिम बेअसर रही और देश की सत्ता एक बार फिर कांग्रेस के हाथों में चली गई.
PM मोदी के चंडीगढ़ आने से पहले किसानों पर पुलिस का लाठीचार्ज, पंजाब राज्यपाल के घर का घिराव करने पहुंचे थे किसान
14 मार्च 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली यह देश की पहली ऐसी गैर-कांग्रेसी सरकार थी, जिसने 5 साल का कार्यकाल सफलता पूर्वक पूरा किया था.
लोकसभा चुनाव 2019 के अंतिम चरण में 8 राज्यों के 59 संसदीय क्षेत्रों में मतदान होना है. इस चरण में उत्तर प्रदेश की 13 संसदीय सीटों पर भी मतदान होना है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है.
मार्च 2019 में विनिर्माण क्षेत्र में 0.4 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई. एक साल पहले मार्च में यह 5.7 प्रतिशत बढ़ा था. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में विनिर्माण क्षेत्र का 77.63 प्रतिशत योगदान है.
बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं को डर है कि लोकसभा चुनाव 2019 में प्रदेश अध्यक्ष उनकी विधानसभा में हारे तो आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी विधायकी की दावेदारी खतरे में पड़ जाएगी.
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अब सिर्फ दो चरणों का मतदान शेष है. 23 मई को नतीजे सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस बार केंद्र में किसकी सरकार. इस बीच, चुनावनामा में हम 1998 की उस बीजेपी सरकार की बात कर रहे हैं, जो महज 13 महीनों में गिर गई थी.
लोकसभा चुनाव 2019 के छठवें चरण में दिल्ली की चांदनी चौक संसदीय सीट पर बीजेपी के सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, कांग्रेस से चार बार सांसद रहे जयप्रकाश अग्रवाल और आम आदमी पार्टी के पंकज गुप्ता के बीच रोचक मुकाबला है.
1996 से 1998 के बीच देश ने तीन प्रधानमंत्री देखे. इन प्रधानमंत्रियों में अटल बिहारी वाजपेयी, एचडी देवेगौड़ा और आईके गुजराल का नाम शामिल है.
लोकसभा चुनाव 2019 के छठवें चरण में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी राजनीति का केंद्र बन चुके हैं. राजीव गांधी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के छिड़ी नई जुबानी जंग छिड़ चुकी है.
उत्तराखंड की टिहरी गढ़वाल सीट से महाराजा मानवेंद्र शाह आठ बार सांसद बनने का रिकार्ड बना चुके हैं. वर्तमान समय में महाराजा मानवेंद्र शाह की बहू माला राज्यलक्ष्मी शाह बीजेपी से सांसद हैं.
बांदा जनपद के 7 पोलिंग स्टेशन ऐसे भी हैं, जहां पर 90 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है. इन पोलिंग स्टेशन में जिलाधिकारी हीरा लाल द्वारा गोद लिया गया गांव पिपरी भी शामिल है.
लोकसभा चुनाव 2019 के चौथे चरण में हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बांदा जिले की तिंदवारी सीट पर भी इन्हीं तरीकों का इस्तेमाल मतदान बढ़ाने के लिए किया गया था. जिसके परिणाम स्वरूप 2014 की अपेक्षा इस चुनाव के मतदान में 12 फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ था.
23 मई को लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने के बाद यह साफ हो पाएगा कि बीजेपी पांचवी बार केंद्र में सरकार बनाने में कामयाब रहती है या कांग्रेस को देश की सत्ता का सिंघासन मिलता है.
लोकसभा चुनाव 2019 में बांदा जिला प्रशासन ने मतदान बढ़ाने के लिए लोक संस्कृति को जुड़ी कलाओं को मतदाताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया है. इस प्रयास का मकसद लोक संस्कृति को पुनर्जीवित करने के साथ मतदान के प्रतिशत को बढ़ाना है.
लोकसभा चुनाव 2019 जीतकर देश की सत्ता हासिल करने के लिए विपक्षी दलों ने महागठबंधन बनाया है. कुछ ऐसा ही गठबंधन 1989 में तत्कालीन राजीव सरकार के खिलाफ वीपी सिंह ने तैयार किया था.