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बिहार: MDM के लिए स्कूल में ही होती है सब्जी की खेती, बच्चों को मिलता पौष्टिक खाना

प्रतिदिन ताज़ी सब्जियां तोड़कर बच्चों के लिए मिड डे मील बनायी जाती है. बच्चों को यहां पर प्रतिदिन सलाद में खीरा भी दिया जाता है.

बिहार: MDM के लिए स्कूल में ही होती है सब्जी की खेती, बच्चों को मिलता पौष्टिक खाना
सरकारी स्कूल में बच्चों के लिए सब्जी की खेती.

राकेश सिंह, छपरा: मिड डे मील (MDM) में धांधली और गड़बड़ी की खबरें तो आपने काफी पढ़ी होंगी. सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना का छात्रों ने कम और शिक्षकों ने ज्यादा फायदा उठाया है, लेकिन एमडीएम से जुड़ी एक सुखद तस्वीर छपरा में देखने को मिली है. मढौरा प्रखंड के नरहरपुर शारदा राय टोला स्थित उत्क्रमित मध्य विधालय के प्राचार्य ने बच्चों को शुद्ध और पौष्टिक भोजन देने के लिए स्कूल के ही दो कट्ठा जमीन पर हरी सब्जियों की खेती की है.

ये सब कुछ मुमकिन हो पाया है प्रधानाध्यापक सूर्यदेव सिंह की कोशिशों से. सूर्यदेव सिंह पोषण वाटिका के रूप में स्कूल के एक इलाके को विकसित कर जैविक खेती का सहारा ले रहे हैं, जिससे वो हरी सब्जियां उगाकर बच्चों को पोषण युक्त भोजन दे पाएं. स्कूल परिसर में भिंडी, लौकी, करेला, बैंगन आदि की सब्जी और साग लगाए गए हैं. बारिश के पानी में से सब्जियों की खेती की जाती है.

प्रतिदिन ताज़ी सब्जियां तोड़कर बच्चों के लिए मिड डे मील बनायी जाती है. बच्चों को यहां पर प्रतिदिन सलाद में खीरा भी दिया जाता है. यानी पूरा पोषण मिलता है. ये सब कुछ संभव हो पाया है शिक्षक की उन्नत सोच और जैविक खेती से. छात्रों के बौद्धिक विकास के साथ उन्हें हृष्ट-पृष्ट रखने की जिम्मेदारी अगर हर शिक्षक समझे तो एक विकसित समाज की कल्पना की जा सकती है.

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यहां पढ़ने वाले बच्चे भी प्राचार्य के इस कदम से बेहद खुश हैं. बच्चों में पढ़ाई के साथ पूरा पोषण देने की इस कोशिश की हर तरफ सरहाना हो रही है. जहां आए दिन मिड डे मील में गड़बड़ी की खबरें सामने आती है, वहां एक शिक्षक की पहल एक अलग उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जो कि काबिले तारीफ है.