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बाल विवाह की सूचना देने के लिए बनाया जा रहा है मोबाइल ऐप : डॉ एन विजयलक्ष्मी

कार्यशाला में यूनिसेफ के सभी विभाग के पदाधिकारियों ने सम्बंधित विभागों द्वारा किये जा रहे कार्यों के बारे में विस्तार से बताया. 

बाल विवाह की सूचना देने के लिए बनाया जा रहा है मोबाइल ऐप : डॉ एन विजयलक्ष्मी
पटना में बाल विवाह को लेकर कार्यशाला का आयोजन.

पटना : महिला विकास निगम, समाज कल्याण विभाग और बिहार सरकार द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से बाल विवाह उन्मूलन अभियान और किशोर-किशोरी सशक्तिकरण के लिए के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रमों पर सभी हितधारकों के साथ दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. यूनिसेफ बिहार के बाल संरक्षण विशेषज्ञ, सैयद मंसूर कादरी ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा दो अक्टूबर 2017 को शुरू किये गए बाल विवाह उन्मूलन अभियान और किशोर-किशोरी सशक्तिकरण के लिए आगे अपनाई जाने वाली रणनीतियों और दृष्टिकोणों को साझा करना है.

साथ ही उन्होंने कहा कि इस अभियान के कार्यान्वयन, निगरानी और रिपोर्टिंग से सम्बंधित प्रक्रिया के पालन पर समझ में सुधार लाना और इस अभियान के लिए संयुक्त जवाबदेही के क्षेत्रों के बारे में स्पष्टता लाने पर भी बल दिया जाएगा है.

उन्होंने आगे बताया की यूनिसेफ बिहार को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार को तकनिकी सहयोग दे रहा है, जिसके अंतर्गत एक्शन एड, न्यू कंसेप्ट सेंटर फॉर डेवलपमेंट कम्युनिकेशन और परक्सिसऔर सीवाईसीको इस अभियान से जोड़ा गया है.

कार्यशाला के दौरान महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक डॉ एन विजयलक्ष्मी ने कहा कि बिहार की आबादी में से 48% संख्या बच्चों की है. उन्हें बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य देने के साथ ही उनका सशक्तिकरण करना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा की सशक्तिकरण के लिए अलग सेल का गठन किया गया है. मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की इस योजना का मकसद गर्ल चाइल्ड वैल्यू को बढ़ाना, कन्या भूण हत्या को रोकना, लिंग अनुपात में वृद्धि लाना, शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना, बाल विवाह पर अंकुश लगाना और साथ ही लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना है. साथ ही उन्होंने कहा कि बाल विवाह की सूचना देने के लिए मोबाइल ऐप बनाया जा रहा है.

महिला विकास निगम के परियोजना निदेशक रुपेश कुमार सिन्हा ने बताया कि दो अक्टूबर 2017 से फरवरी 2019 तक 1,112 बाल विवाह को रोका गया है. इस अभियान के बारे में राज्य के 5 करोड़ लोगों तक जानकारी पहुंची है. साथ ही 3471000 स्कूली बच्चों को और महादलित परिवार के सदस्यों को जागरूक किया गया है.

यूनिसेफ दिल्ली की अरुपा शुक्ला ने बताया की यूनिसेफ देश के 11 राज्यों में बाल विवाह को समाप्त करने के लिए राज्य सरकारों को तकनिकी सहयोग दे रहा है. बिहार में महिला विकास निगम के साथ उन 13 जिलों में काम कर रहा है. जहां बाल विवाह का प्रतिशत ज्यादा है. इस कार्य में एक्शन एड, न्यू कंसेप्ट सेंटर फॉर डेवलपमेंट कम्युनिकेशन, पापुलेशन कौंसिल और सीवाईसी की सहायता से कार्य कर रहा है.

उर्वशी कौशिक सामाजिक नीति विशेषज्ञ, यूनिसेफ बिहार ने बिहार में किशोर/किशोरियों से संबंधित जनसांख्यिकीय संकेतकों को साझा करते हुए कहा की बिहार में 22.5% किशोर/ किशोरी है जो देश की कुल किशोर/ किशोरी आबादी का 9.2% है. उन्होंने आगे बताया की राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के अनुसार बिहार में 15-19 साल की लड़कियों में से 12.2% मां बन चुकी है.

कार्यशाला में यूनिसेफ के सभी विभाग के पदाधिकारियों ने सम्बंधित विभागों द्वारा किये जा रहे कार्यों के बारे में विस्तार से बताया. कार्यशाला के दूसरे हिस्से में इस अभियान के लिए कार्यरत सभी एजेंसियों ने आगे की कार्ययोजना बनाई और इसे सभी के सामने प्रस्तुत किया.

इस कार्यशाला में महिला विकास निगम, यूनिसेफ, एक्शन एड, न्यू कंसेप्ट सेंटर फॉर डेवलपमेंट कम्युनिकेशन और सीवाईसी के पदाधिकारी के साथ ही बाल विवाह उन्मूलन के लिए विभिन्न जिलों में कार्यरत जिला समन्वयक समेत लगभग 80 प्रतिभागियोंने हिस्सा लिया. बीरपुर के एस डी एमसुभाष कुमार और रजौली के एस डी एम चंद्रशेखर आज़ाद ने भी कार्यशाला में हिस्सा लिया.