वाल्मीकि टाईगर रिजर्व क्षेत्र से बाहर निकलकर एक बाघ आदमखोर हो गया था. बाघ धीरे-धीरे लोगों का शिकार कर रहा था. बाघ के आतंक से ग्रामीण डरे हुए थे, इधर वन विभाग के अधिकारी बाघ को पकड़ने में नाकाम साबित हो रहे थे.
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बगहा : बिहार के बगहा में पिछले एक महीने से आदमखोर बाघ के आतंक मचा रखा था. शनिवार को वन विभाग के कर्मियों ने चार गोलियां मारकर आदमखोर बाघ को ढेर कर दिया. दरअसल, पिछले तीन दिन से लगातार इंसानों को अपना शिकार बना रहा था. गुरुवार को एक लड़की को मारा था. जबकि शुक्रवार को एक युवक को अपना शिकार बनाया था, तो वहीं इसके कुछ घंटे बाद मां-बेटे पर हमला कर मार डाला. इस तरह बाघ ने एक महीने के भीतर 9 लोगों को अपना शिकार बनाया था.
क्या है पूरा मालमा
बता दें कि वाल्मीकि टाईगर रिजर्व क्षेत्र से बाहर निकलकर एक बाघ आदमखोर हो गया था. बाघ धीरे-धीरे लोगों का शिकार कर रहा था. बाघ के आतंक से ग्रामीण डरे हुए थे, इधर वन विभाग के अधिकारी बाघ को पकड़ने में नाकाम साबित हो रहे थे. वन विभाग की टीम ने बाघ को मारने के आदेश दे दिए थे, जिसके चलते शनिवार को बाघ के पैरों के निशाना के बाद एक्सपर्ट की टीम को यह यकीन हो गया कि वो गन्ने के खेत में छिपा है. इसके बाद उस खेत की चारों ओर से जाल के माध्यम से घेराबंदी की गई. इसके बाद राइफल से लैस टीम हाथी पर सवार होकर गन्ने के खेत के अंदर गई. वहां पहुंचते ही बाघ पर टीम की नजर गई और उस पर फायरिंग की गई. टीम ने बाघ को 4 गोली मारी. इसमें से दो गोली उसे लगी और बाघ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.
बाघ के हमसे से 9 लोगों की मौत
बाघ ने पिछले नौ महीने में गांव के 10 लोगों पर हमला किया था. इस हमले में करीब 9 लोगों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल है. बता दें कि शुक्रवार की सुबह बाघ ने मां-बेटे पर हमला कर दिया था.
बाघ का कैसे पड़ा था T-105 नाम
बता दें कि मारे गए बाघ के पिता T-5 की मुलाकात वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के हड़नाटांड वन क्षेत्र में T-34 से हुई. इस दरमियां T-34 मां बन गई. चूंकि पिता T-5 की टेरिटरी वन के बाहरी हिस्से की तरफ थी, ऐसे में अपने बच्चों को T-5 से बचाने के लिए गन्ने के खेतों में T-34 लेकर रहने लगी. इस दरमियान बच्चे धीरे-धीरे बड़े होने लगे। युवा अवस्था में आने के बाद T-34 अपने बच्चे के लिए टेरिटरी बनाकर दूसरे शावक के साथ अलग क्षेत्र में चली गई. इस प्रकार इस शावक का नाम T-105 पड़ा था.
पोस्टमार्टम के बाद होगा अंतिम संस्कार
बता दें कि आदमखोर बाघ की मौत के बाद उसका नामोनिशान मिटा दिया जाता है. इसके लिए जो एसओपी बनाई गई है, उसमें बाघ का पहले पोस्ट मार्टम कराया जाता है. इसके बाद पंचनामा की कार्रवाई होती है. पोस्ट मार्टम के लिए पूरी टीम गठित की जाती है. इसके अलावा बाघ को अफसरों की मौजूदगी में जलाया जाता है. साथ ही फील्ड निदेशक की उपस्थिति या ऑथराइजड अफसर (जो उप वन संरक्षक के पद से नीचे का न हो) की मौजूदगी में ही अंतिम संस्कार किया जाता है.
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