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चाईबासा: सारंडा में वन माफियाओं के खिलाफ छापेमारी करना पड़ा महंगा, ग्रामीणों ने किया हमला

 वहीं, विभाग के गाड़ियों पर भी तोड़फोड़ की. यही नहीं इसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की छह सदस्यीय टीम को घायल कर बंधक बना लिया. 

 चाईबासा: सारंडा में वन माफियाओं के खिलाफ छापेमारी करना पड़ा महंगा, ग्रामीणों ने किया हमला
वन माफियाओं के खिलाफ छापेमारी करना वन विभाग को महंगा पड़ गया.(फाइल फोटो)

आनंद प्रियदर्शी, चाईबासा: नक्सल व उग्रवाद प्रभावित झारखंड के सारंडा में वन माफियाओं के खिलाफ छापेमारी करना वन विभाग को महंगा पड़ गया. आक्रोशित ग्रामीणों ने बीती शाम छापामारी कर रहे वन विभाग की टीम पर अचानक हमला कर दिया. इस दौरान में दो वनकर्मी समेत छह लोगों को पारंपरिक हथियार से हमला कर ग्रामीणों ने घायल कर दिया. वहीं, विभाग के गाड़ियों पर भी तोड़फोड़ की. यही नहीं इसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की छह सदस्यीय टीम को घायल कर बंधक बना लिया. 

मामला सारंडा वन क्षेत्र के किरीबुरू स्थित संस्ग्दा प्रक्षेत्र का है. बताया जाता है की सारंडा के भनगांव वन माफियाओं के द्वारा लकड़ी की कटाई और तस्करी की सुचना वन विभाग को मिली थी. इस सुचना पर वन विभाग टीम तैयार कर वनकर्मी समेत मजदूरों को भनगांव छापामरी के लिए भेजा था. 

जब टीम वहां पहुंच वन माफियाओं की धर पकड़ और अवैध लकड़ी को जब्त करना शुरू किया तो ग्रामीणों ने वन कर्मियों की टीम पर पारम्परिक धारदार हथियार व तीर धनुष से हमला करना शुरू कर दिया. इस हमले में तीन वनकर्मी घायल हो गए. कुछ वन कर्मी मौके से जान बचाकर करमपदा सीआरपीएफ कैम्प पहुंचे और इसकी जानकारी, इधर ग्रामीणों ने छापामरी दल के छह लोगों को घायल अवस्था में बंधक बना लिया. 

बाद में प्रशासनिक दबाव में देर रात दो बजे सभी बंधक वनकर्मियों व मजदूरों को ग्रामीणों ने छोड़ा. फिलहाल घायल वन कर्मी व मजदूरों का ईलाज किरीबुरू सेल अस्पताल में चल रहा है. वहीँ सारंडा के डीएफओ रजनीश कुमार इस मामले की जाँच कर दोषी लोगों पर कार्रवाई करने की प्रक्रिया में लग गए हैं. डीएफओ ने साफ़ तौर पर कानूनी कार्रवाई की बात कही है. 

बता दें की सारंडा में वन माफियों का कब्ज़ा है. आये दिन यहां के घने साल के वनों को काटकर वन माफिया करोड़ों के लकड़ियों का गोरख धंधा करते हैं. इस धंधे में अब ग्रामीण इनका ढाल बनकर प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं और वन माफियों को बचाने का काम कर रहे हैं जो चिंता का विषय है. पुलिस, प्रशासन और वन विभाग के लिए ऐसी परिस्थिति में वन माफियों के खिलाफ कार्रवाई करना बड़ी चुनौती बन गयी है.